चित्रकूट। पार्टी का गिरता जनाधार और हाथों से निकलते राज्यों के साथ महंगाई के मुद्दे पर विफलता के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने अपने तरकश में चित्रकूट में बैठकर वे तीर निकालने की रणनीति बनाई है जिनकी धार वास्तव में कुंद हो चुकी है। राष्ट्रीयस्तर पर पार्टी की क्षमता को बढ़ाने के लिये रणनीति के प्रमुख हिस्से संगठन मंत्रियों को भी नये जमाने की हाईटेक हवा लग चुकी है। भाजपा के तरकश के ये तीर अब उतने कारगर रुप से लक्ष्य को नहीं भेद पा रहे जितनी आशा उनसे संगठन करता है। इसीलिये उप्र, राजस्थान, दिल्ली जैसे राज्य पार्टी के हाथों से निकल गये।
वैसे केंद्र की सत्ता तक पहुंचने में जहां राममंदिर के साथ ही अटल विहारी बाजपेई, लालकृष्ण आडवानी व मुरलीमनोहर जोशी की छवि ने काम किया था वहीं उस समय संघ, विहिप के साथ ही भाजपा के सभी संगठन मंत्री तेजी से लगे थे पर अब समय बदल चुका है। सत्ता का स्वाद चखकर जहां नेताओं के दिन बहुर चुके हैं वहीं कभी कार्यकर्ताओं के घर से रोटी खाने और पार्टी के कार्यालयों में रात्रि में रुकने वाले संगठनमंत्री महंगी गाडि़यों में घूमते नजर आते हैं। चित्रकूट में अभ्यास वर्ग में पहुंचने से पूर्व तो उत्तर प्रदेश के कुछ संगठन मंत्री यहीं के लाजों में विश्राम कर उद्यमिता विद्यापीठ प्रांगण में पहुंचे थे। उधर, परिचयात्मक सत्र के बाद जब मीडिया से बात करने के लिये सतना के पार्टी जिलाध्यक्ष व अभ्यास वर्ग में सर्वव्यवस्था प्रमुख का दायित्व संभाल रहे सुरेन्द्र सिंह बघेल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि क्या किया जाये। जब सत्ता मिलने के बाद कार्यकर्ता भी थोड़ा बहुत आराम तलब हो जाते हैं तो संगठन मंत्री क्यों न ऐसे हो जायें। वैसे इस अभ्यास सत्र का मुख्य उद्देश्य भी इन्हीं संगठन मंत्रियों को एक बार फिर से सोद्देश्य बनाने के लिये तेजी से काम पर लगाना है।
वैसे केंद्र की सत्ता तक पहुंचने में जहां राममंदिर के साथ ही अटल विहारी बाजपेई, लालकृष्ण आडवानी व मुरलीमनोहर जोशी की छवि ने काम किया था वहीं उस समय संघ, विहिप के साथ ही भाजपा के सभी संगठन मंत्री तेजी से लगे थे पर अब समय बदल चुका है। सत्ता का स्वाद चखकर जहां नेताओं के दिन बहुर चुके हैं वहीं कभी कार्यकर्ताओं के घर से रोटी खाने और पार्टी के कार्यालयों में रात्रि में रुकने वाले संगठनमंत्री महंगी गाडि़यों में घूमते नजर आते हैं। चित्रकूट में अभ्यास वर्ग में पहुंचने से पूर्व तो उत्तर प्रदेश के कुछ संगठन मंत्री यहीं के लाजों में विश्राम कर उद्यमिता विद्यापीठ प्रांगण में पहुंचे थे। उधर, परिचयात्मक सत्र के बाद जब मीडिया से बात करने के लिये सतना के पार्टी जिलाध्यक्ष व अभ्यास वर्ग में सर्वव्यवस्था प्रमुख का दायित्व संभाल रहे सुरेन्द्र सिंह बघेल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि क्या किया जाये। जब सत्ता मिलने के बाद कार्यकर्ता भी थोड़ा बहुत आराम तलब हो जाते हैं तो संगठन मंत्री क्यों न ऐसे हो जायें। वैसे इस अभ्यास सत्र का मुख्य उद्देश्य भी इन्हीं संगठन मंत्रियों को एक बार फिर से सोद्देश्य बनाने के लिये तेजी से काम पर लगाना है।

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