चित्रकूट। केवल एक कारण कैसे पूरे एक इलाके की दशा और दिशा को बदल देता है। पहले के एक कारण ने लगभग आठ सालों तक क्षेत्र में पुलिस और डाकुओं के कारण दहशत का माहौल कायम रखा तो अब केवल एक व्यक्ति ने यहां की आब-ओ-हवा को बिलकुल बदल दिया।
जी हां, यह इलाका है पवित्र धाम चित्रकूट का पश्चिम की तरफ का प्रवेश द्वार भरतकूप। सन् 2001 में डाकू अम्बिका पटेल उर्फ ठोकिया के डकैत बनने के बाद बगहिया से लेकर मडफा पहाड़ का पूरा इलाका उसके खौफ के कारण दहशत में रहा करता था। ठोकिया के मददगारों की लिस्ट में इस इलाके के लोगों के ज्यादा नाम होने के कारण उनके परिवार के लोगों को ज्यादा कष्ट भोगना पड़ा। इस तरह से बच्चों की पढ़ाई भी काफी बाधित होती थी।
जहां कभी शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करना बेमानी प्रतीत होता था। वहीं पर अब वातावरण पूरी तरह से बदल चुका है। राजकीय इंटर कालेज घुरेटनपुर के छात्रों को देखकर लगता नही कि अब यहां पर पुलिस या डाकुओं के खौफ का कोई साया भी है। पूरी तरह से तैयार ड्रेस में जब यहां के छात्र और छात्रायें पीटी, ड्रिल और कदमताल करते हैं तो यह समझ नही पड़ता कि ये छात्र-छात्रायें इतनी यांत्रणा भोग चुके हैं। साढ़े तीन सौ छात्र-छात्राओं को नये तरह के हिंदुस्तान से परिचित कराने का काम पिछले ही सत्र में यहां पर आये प्रधानाचार्य एमपी सिंह ने किया। प्रधानाचार्य जहां बच्चों के अंदर से डाकुओं और पुलिस का डर निकालकर उन्हें मानव बनाने के साथ ही सच्चा देशभक्त इंसान बनाने की बात करते हैं। वहीं उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ भी मुहिम छेड़ रखी है। वे बताते हैं कि उनके विद्यालय में लगभग चालीस प्रतिशत छात्र व छात्रायें शादीशुदा हैं। काफी का गौना अभी नही हुआ है। कहते हैं कि नया एडमीशन और गौना बालिग हो जाने पर ही अभिभावक लें इसके लिये वे पहले से अभिभावकों से लिखित वायदा करवा रहे हैं। इस साल हाई स्कूल बोर्ड की परीक्षा आठ बच्चों ने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। एक बालिका ने तो सत्तर प्रतिशत से ज्यादा अंक लाये।
पर्यावरण का रक्षक बने छात्र
इस विद्यालय की सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर पौधों का रोपण बच्चों द्वारा करवाया गया है। बच्चों ने न केवल पौधों का रोपण किया बल्कि उनकी सुरक्षा और पोषण की पूरी जिम्मेदारी भी उठाई हुई है। फलदार पौधों में नींबू, आंवला, आम, अमरुद, केला, संतरा, महुवा व फूल वाले पौधों में गंदा, चांदनी, बेला, कनेर, बोगेनबेलिया के साथ ही शीशम और सागौन गुलमोहर आदि के पौधे हैं। प्रधानाचार्य बताते हैं कि आसपास के रहने वाले छात्र सुबह से आते हैं और वे पौधों में पानी डालते हैं।
कहते हैं अधिकारी
जिला विद्यालय निरीक्षक मंशा राम कहते हैं कि घुरेटनपुर का राजकीय इंटर कालेज वास्तव में इस समय न केवल शिक्षा बल्कि संस्कारों और खेलकूद के लिये जिले का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बना हुआ है। इसका पूरा श्रेय वहां के प्रधानाचार्य को जाता है। देहात में रहने वाले बच्चों के अंदर जो संस्कार डालने का काम उन्होंने किया है वह वास्तव में काबिल-ए-तारीफ है।
जी हां, यह इलाका है पवित्र धाम चित्रकूट का पश्चिम की तरफ का प्रवेश द्वार भरतकूप। सन् 2001 में डाकू अम्बिका पटेल उर्फ ठोकिया के डकैत बनने के बाद बगहिया से लेकर मडफा पहाड़ का पूरा इलाका उसके खौफ के कारण दहशत में रहा करता था। ठोकिया के मददगारों की लिस्ट में इस इलाके के लोगों के ज्यादा नाम होने के कारण उनके परिवार के लोगों को ज्यादा कष्ट भोगना पड़ा। इस तरह से बच्चों की पढ़ाई भी काफी बाधित होती थी।
जहां कभी शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करना बेमानी प्रतीत होता था। वहीं पर अब वातावरण पूरी तरह से बदल चुका है। राजकीय इंटर कालेज घुरेटनपुर के छात्रों को देखकर लगता नही कि अब यहां पर पुलिस या डाकुओं के खौफ का कोई साया भी है। पूरी तरह से तैयार ड्रेस में जब यहां के छात्र और छात्रायें पीटी, ड्रिल और कदमताल करते हैं तो यह समझ नही पड़ता कि ये छात्र-छात्रायें इतनी यांत्रणा भोग चुके हैं। साढ़े तीन सौ छात्र-छात्राओं को नये तरह के हिंदुस्तान से परिचित कराने का काम पिछले ही सत्र में यहां पर आये प्रधानाचार्य एमपी सिंह ने किया। प्रधानाचार्य जहां बच्चों के अंदर से डाकुओं और पुलिस का डर निकालकर उन्हें मानव बनाने के साथ ही सच्चा देशभक्त इंसान बनाने की बात करते हैं। वहीं उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ भी मुहिम छेड़ रखी है। वे बताते हैं कि उनके विद्यालय में लगभग चालीस प्रतिशत छात्र व छात्रायें शादीशुदा हैं। काफी का गौना अभी नही हुआ है। कहते हैं कि नया एडमीशन और गौना बालिग हो जाने पर ही अभिभावक लें इसके लिये वे पहले से अभिभावकों से लिखित वायदा करवा रहे हैं। इस साल हाई स्कूल बोर्ड की परीक्षा आठ बच्चों ने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। एक बालिका ने तो सत्तर प्रतिशत से ज्यादा अंक लाये।
पर्यावरण का रक्षक बने छात्र
इस विद्यालय की सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर पौधों का रोपण बच्चों द्वारा करवाया गया है। बच्चों ने न केवल पौधों का रोपण किया बल्कि उनकी सुरक्षा और पोषण की पूरी जिम्मेदारी भी उठाई हुई है। फलदार पौधों में नींबू, आंवला, आम, अमरुद, केला, संतरा, महुवा व फूल वाले पौधों में गंदा, चांदनी, बेला, कनेर, बोगेनबेलिया के साथ ही शीशम और सागौन गुलमोहर आदि के पौधे हैं। प्रधानाचार्य बताते हैं कि आसपास के रहने वाले छात्र सुबह से आते हैं और वे पौधों में पानी डालते हैं।
कहते हैं अधिकारी
जिला विद्यालय निरीक्षक मंशा राम कहते हैं कि घुरेटनपुर का राजकीय इंटर कालेज वास्तव में इस समय न केवल शिक्षा बल्कि संस्कारों और खेलकूद के लिये जिले का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बना हुआ है। इसका पूरा श्रेय वहां के प्रधानाचार्य को जाता है। देहात में रहने वाले बच्चों के अंदर जो संस्कार डालने का काम उन्होंने किया है वह वास्तव में काबिल-ए-तारीफ है।

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