चित्रकूट। मां मंदाकिनी के किनारे रहने वाले जहां पानी की कमी के कारण कराह रहे हैं वहीं पाठा पर इंद्रदेव की मेहरबानी कुछ इस तरह की हुई कि आशा बंधाकर किसानों को निराश कर दिया। कुछ इसी तरह के हाल भरतकूप और बरगढ़ और मऊ के इलाकों के हैं। कृषि विभाग के अधिकारी भी इस बात की आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि कहीं अवर्षण की स्थिति में सूखा न पड़ जाय।
पिछले एक दशक से सूखे के कारण कराहते बुंदेलखंड के इस भूभाग पर मौसम की मेहरबानी उस अंदाज में नहीं हुई जिसकी आशा इस साल भी की गई। पहले तो पन्द्रह जून को धता बताकर मानसून की पहली फुहार एक जुलाई को गिरी और फिट एक महीने में छिटपुट बारिश होती रही। पिछले एक हफ्ते से तो इंद्रदेव ने जहां अपना काम हल्के फुलके अंदाज में किया वहीं गर्मी और उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया। जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराये जाने को लेकर भाजपा, कांग्रेस और सपा के नेता आंदोलन छेड़ने की बात तो करते हैं पर पंचायत चुनावों के चक्कर में वे अभी सीधे तौर पर सड़क पर उतरने से कतरा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी व रवि त्रिपाठी कहते हैं कि इस समय किसान की हालत काफी दयनीय है। पहले तो हलकी बारिश कर ऊपर वाले ने आशा बंधाई कि फसल जोरदार होगी, लेकिन अब पानी न बरसा कर उनकी भावनाओं पर तुषारापात कर रहा है।
कांग्रेस के रघुनाथ द्विवेदी मुखर होकर कहते हैं कि वास्तव में इस समय अन्नदाता की स्थिति काफी खराब है। खेतों पर पड़ा दाना भी वापस होता दिखाई नहीं देता। ऐसे में कर्ज लेकर खेती करने वाला किसान क्या करेगा? जल्द ही किसानों को सरकार की तरफ से राहत दी जानी चाहिये।
सपा के ब्लाक प्रमुख पहाड़ी मनोज सिंह कहते हैं कि पहाड़ी ब्लाक के गांवों में तो हालत दूसरे क्षेत्रों से ज्यादा खराब है। यहां पर नदी के तटवर्ती इलाकों के हालात और भी ज्यादा खराब हैं। यहां पर तो जमीन पर हल ही नहीं चल पा रहा है। जब किसान का हल ही नहीं चलेगा तो क्या खाक खेती होगी।
जिला कृषि अधिकारी हर नाथ सिंह कहते हैं कि लगता है कि एक बार फिर सूखे के हालातों का सामना चित्रकूट जिले को करना पड़ सकता है। अभी तो कुल 186 मिमी पानी की जिले में बरसा है। यह भी क्षेत्रवार ही बरसा है। कहीं पर तो तीन सौ मिमी के आसपास पानी बरस चुका है तो कहीं पर पचास मिमी पानी नहीं बरसा। उन्होंने कहा कि खेती के लिये तो हर माह पानी की जरूरत रहती है।
पिछले एक दशक से सूखे के कारण कराहते बुंदेलखंड के इस भूभाग पर मौसम की मेहरबानी उस अंदाज में नहीं हुई जिसकी आशा इस साल भी की गई। पहले तो पन्द्रह जून को धता बताकर मानसून की पहली फुहार एक जुलाई को गिरी और फिट एक महीने में छिटपुट बारिश होती रही। पिछले एक हफ्ते से तो इंद्रदेव ने जहां अपना काम हल्के फुलके अंदाज में किया वहीं गर्मी और उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया। जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराये जाने को लेकर भाजपा, कांग्रेस और सपा के नेता आंदोलन छेड़ने की बात तो करते हैं पर पंचायत चुनावों के चक्कर में वे अभी सीधे तौर पर सड़क पर उतरने से कतरा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी व रवि त्रिपाठी कहते हैं कि इस समय किसान की हालत काफी दयनीय है। पहले तो हलकी बारिश कर ऊपर वाले ने आशा बंधाई कि फसल जोरदार होगी, लेकिन अब पानी न बरसा कर उनकी भावनाओं पर तुषारापात कर रहा है।
कांग्रेस के रघुनाथ द्विवेदी मुखर होकर कहते हैं कि वास्तव में इस समय अन्नदाता की स्थिति काफी खराब है। खेतों पर पड़ा दाना भी वापस होता दिखाई नहीं देता। ऐसे में कर्ज लेकर खेती करने वाला किसान क्या करेगा? जल्द ही किसानों को सरकार की तरफ से राहत दी जानी चाहिये।
सपा के ब्लाक प्रमुख पहाड़ी मनोज सिंह कहते हैं कि पहाड़ी ब्लाक के गांवों में तो हालत दूसरे क्षेत्रों से ज्यादा खराब है। यहां पर नदी के तटवर्ती इलाकों के हालात और भी ज्यादा खराब हैं। यहां पर तो जमीन पर हल ही नहीं चल पा रहा है। जब किसान का हल ही नहीं चलेगा तो क्या खाक खेती होगी।
जिला कृषि अधिकारी हर नाथ सिंह कहते हैं कि लगता है कि एक बार फिर सूखे के हालातों का सामना चित्रकूट जिले को करना पड़ सकता है। अभी तो कुल 186 मिमी पानी की जिले में बरसा है। यह भी क्षेत्रवार ही बरसा है। कहीं पर तो तीन सौ मिमी के आसपास पानी बरस चुका है तो कहीं पर पचास मिमी पानी नहीं बरसा। उन्होंने कहा कि खेती के लिये तो हर माह पानी की जरूरत रहती है।

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