कन्या पूजन एवं सहभोज कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, नारी सम्मान और सामाजिक समरसता का दिया संदेश
सेवा भारती, उत्तर प्रदेश की जिला इकाई चित्रकूट के तत्वावधान में कन्या पूजन एवं सहभोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिवरामपुर रोड स्थित सीतापुर में बाणगंगा सरोवर के सामने बने आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में 151 कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उन्हें भोजन कराया गया। इस दौरान कन्याओं के माथे पर रोली एवं चंदन का तिलक लगाकर उनका स्वागत किया गया तथा भोजन के उपरांत फल और दक्षिणा भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
कार्यक्रम में सेवा भारती के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने कन्याओं को सम्मानपूर्वक बैठाकर श्रद्धाभाव से भोजन प्रसाद कराया। आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति में कन्याओं के प्रति श्रद्धा, नारी सम्मान और समाज में समरसता की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।
समाज सेवा और जागरूकता के लिए प्रतिबद्ध है सेवा भारती
सेवा भारती के जिला महामंत्री राज किशोर शिवहरे ने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्याओं को देवी स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ समाज में संस्कार, सेवा और नारी सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं।
उन्होंने बताया कि सेवा भारती शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सामाजिक समरसता और नशामुक्ति सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। संस्था द्वारा साइबर अपराध के प्रति जागरूकता तथा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी वर्षभर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
सामाजिक भेदभाव दूर करने पर जोर
सेवा भारती के जिला अध्यक्ष गुरु प्रकाश शुक्ला ने कहा कि संस्था का उद्देश्य सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में जागरूकता, समरसता और सद्भाव को बढ़ावा देना है। ऐसे आयोजनों से सामाजिक कुरीतियों एवं भेदभाव को दूर करने तथा आपसी सहयोग और सम्मान की भावना विकसित करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर सेवा और संस्कार के कार्य निरंतर जारी रहने चाहिए।
कार्यक्रम में सेवा भारती के जिला कोषाध्यक्ष राजकिशोर त्रिपाठी, जिला स्वावलंबन प्रमुख शिवकुमार सहित स्थानीय ग्रामवासी, महिलाएं एवं बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
सेवा, संस्कार और समरसता के संदेश के साथ संपन्न हुए इस आयोजन में 151 कन्याओं का पूजन कर उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया गया।






