अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

पैरों की लयात्मकता में बरसा संगीत

महोबा, स्टाफ रिपोर्टर : विलक्षण. अद्भुत की आवाजों के साथ ही तालियों की गड़गड़ाहट .. जी हां, खजुराहो के चंदेली मंदिर समूह के ओपन सभागार में जैसे ही घुंघरूओं से बंधे पैरों की लयात्मकता बढ़ी वैसे ही उपस्थित लोगों के हाथों से तालियों की गूंज सुनाई देने लगी। उमा सत्यनारायण की वरिष्ठ शिष्या माने जाने वाली अन्वेषा दास के द्वारा भरतनाट्यम नृत्य के दौरान 'अरंगेत्रम' के दौरान तो लोग मंत्र मुग्ध हो गए, ऐसा लगा कि सैकड़ों लोग सांस रोककर नृत्य का आनंद ले रहे हैं।




ओडिसा की रहने वाली चेन्नई में पली बढ़ी अन्वेषा दास के नृत्य की विशेषता उनका भाव प्रवण अभिनय था। इसके पश्चात ओडिसी के सुविख्यात गुरु केलु चरण महापात्र, कुमकुम मोहन्ती, मायाधर राउत के शिष्य पूर्णा श्री राउत व लकी मोहंती ने जब युगल नृत्य प्रस्तुत किया तो उसमें उड़िया छाप साफ दिखाई दी। नृत्य में भगवान जगन्नाथ की आराधना साफ झलकी। मुद्राओं और चितवन के साथ पैरों की थिरकन बिलकुल तबले की थापें गिनी जा सकती थी। इस बीच बलभद्र और सुभद्रा का संवाद भी काफी सराहा गया। डा. वेंकट वेम्पति व वेम्पति रवि शंकर का कुचिपुड़ी नृत्य न केवल आकर्षक मुद्राओं के लिए दर्शनीय बना बल्कि उनका जोश और पथ संचलन दर्शकों की तालियों का कारण बना। खजुराहो नृत्य उत्सव की अंतिम प्रस्तुति के दौरान दर्शकों का उत्साह इतना बढ़ा कि वह लोग खड़े होकर देर तक तालियां बजाते रहे। स्थानीय दर्शकों के अलावा फ्रांस, जर्मनी, चेकोस्लाविया, नामीबिया, ब्राजील के अलावा तमाम देशों के दर्शक मौजूद रहे।

मंगलवार, 22 जनवरी 2013

जब भैसों को खिलाएं पंजीरी तो कैसे बनें बेटियां 'सबला'

संदीप रिछारिया, महोबा: बेटियां युवती से महिला बनने की प्रक्रिया की बारीकियां तो सीखने में रुचि दिखा रही हैं, पर शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम 'पुष्टाहार' भैंस-गायों के हवाले कर रही हैं। यह नजारा केवल एक गांव का नहीं बल्कि हर गांव व गली में ऐसे दृश्य आम हैं। सबला को परवान चढ़ाने में लगे अधिकारी भी इस बात से भौचक हैं कि 'एमाइलेज रिच एनर्जी' का दुरुपयोग आखिर हो क्यों रहा है? अधिकारी कहते हैं कि शायद योजना के प्रसार प्रचार या कार्यकत्रियों के समझाने में कहीं न कहीं कमी है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मई 2010 में राजीव गांधी किशोरी सशक्तिकरण स्कीम (सबला) का प्रारंभ किया गया था। इस योजना के अन्तर्गत 11 वर्ष से लेकर 18 वर्ष तक की बेटियों को शारीरिक संरचना समझाने के साथ शरीर का विकास और स्वस्थ मां बनने में आने वाली अड़चनों को दूर रखने के गुर सिखाने का प्रावधान है। आंगनबाड़ी केद्रों पर इसके लिए शिक्षण, प्रशिक्षण के साथ स्वास्थ्य संबंधित जानकारियों व जांचों के साथ पुष्टाहार खिलाने की भी व्यवस्था की गई है। गंभीर बात यह है कि केंद्रों पर बालिकाएं जाकर डाकघर व बैंक से संबंधित सेवाओं के उपयोग के साथ ही अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी व शरीर विज्ञान की संरचना समझने में तो खूब रूचि दिखा रही हैं। लेकिन जब मामला एमाइलेज रिच एनर्जी 'पुष्टाहार' को खाने का आता है तो वह उसे जानवरों के हवाले कर देती हैं। कुछ इस तरह का हाल रक्त अल्पता से बचाने के लिए दी जाने वाली आयरन फोलिक एसिड की गोलियों का होता है।
अब सवाल उठता है कि जब बेटियां अपने बारे में जानने और मां बनने के पूर्व के सवालों को चाव से सुनती और समझती हैं तो फिर शरीर को स्वस्थ रखने वाले पुष्टाहार से परहेज क्यों कर रही हैं?
एमाइलेज रिच एनर्जी में पाए जाने वाले पोषक तत्व
गेंहू आटा, सोया आटा, मक्का, माल्टेड रागी, चीनी, घी, विटामिन मिनरल
सीडीपीओ रामेश्वर पाल कहते हैं कि वास्तव में इस तरह की शिकायतें कई गांवों से आई हैं। बेटियों की काउंसलिंग कर समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

रविवार, 27 मार्च 2011

सृजन की नयी धारा का नाम है डफ की फाग

जागरण विशेष

- संरक्षण करने के प्रयास में लगे हैं लोग
चित्रकूट, संवाददाता: चित्रकूट की धरती स्रजन की धरती मानी जाती है और जब लोभ, मोह, माया, मत्सर, तृष्णा और तमाम सांसारिक वस्तुओं का त्याग चुके वीतरागी संतों के हाथ में फागुन के महीने में सुबह भगवान की आरती के बाद हाथ में ढपली आती है तो उनके मुंह से श्री राम-मां जानकी व श्री कृष्ण और राधा जी के होली में डूबे हुये गीत सुनाई देने लगते हैं। उमंग और उल्लास अपने आप जब छा जाता है तो उन्हें इस बात का जरा भी भान नही होता कि वे बैठे कहां हैं और क्या कर रहे हैं। इन दिनों धर्मनगरी के कई मंदिरों पर फगुवा गाने का दौर कुछ इसी अंदाज में चल रहा है।
धर्मनगरी की अपनी विलक्षणता के कारण यहां की स्थानीय भाषा में गाये जाने वाले फाग के रंग भी देश भर से अलग हैं। कामतानाथ पर्वत के उत्तरी दिशा में बसे गांव कामतन के रहने वाले संत राम भरोसे तिवारी उल्लसित होकर रघुनंदन खेलत होली ' को जब अपनी साधुक्कड़ी भाषा में गाते हैं तो शमा कुछ दूसरी ही हो जाती है। कामता गांव के ही कृष्ण गोपाल पयासी कहते हैं चित्रकूट की फाग में जो लचक है वह लचक और लोच दूसरी विधा में दिखाई नही देती। घेर कामता बने हैं दिवाला, चित्रकूट निज धाम हमको पियारौ लागै रामा धाम जैसे अनगिनत गीत जब उनके स्वरों में गूंजते हैं तो सुनने वाले अपने आप तालियां बजाने को मजबूर हो जाते हैं। गनेश प्रसाद पटेल ,डा. अशोक त्रिपाठी, ब्रज किशोर पांडेय, भूपेन्द्र पांडेय, श्याम द्विवेदी व बीरू द्विवेदी आदि जब ढपली, खडताल, ढोलक, झांझ और नगड़ियां में जब होली खेलत रघुवीरा गाते हैं तो वातावरण जीवंत हो उठता है।
बजरंग आश्रम के संत निर्भय दास बताते हैं कि चित्रकूट की डफ फाग वास्तव में विलुप्त होने के कगार पर है। हाल के वर्षो से इसे संरक्षित किये जाने का काम चल रहा है। पुराने और नये लोगों के सम्मिश्रण से अब आगे का लोगों को प्रेरित कर इस विधा को गाने के लिये प्रेरित किया जा रहा है।
लोक लय समारोह के कर्ताधर्ता समाजसेवी गोपाल भाई कहते हैं कि चित्रकूट की थाती है साधुक्कड़ी शैली में ढपली की सहायता से गाये जाने वाली फाग। इसको संरक्षित करने के लिये लोग अब आगे आने लगे हैं। लोकगीतों की कोई प्रचलित स्वरलिपि न होने के कारण तमाम विधायें गायब होने के कगार पर हैं। उन्हीं में एक यह भी है। इस बार होली के तुरन्त बाद होने वाले लोकलय में चित्रकूट की डफ फाग का विशेष प्रदर्शन होगा।



लोकगीत है फिल्मी गीत को हिट कराने का फार्मूला

चित्रकूट, संवाददाता: महंगाई डायन खाय जात है तो एक नमूना है .मुन्नी बदनाम हुई के साथ ही हिट हुये गानों की श्रंखला देखिये और फिर कहिये कि क्या यह पिट सकते हैं। अरे भइया लोक धुनें तो हमारी थाती हैं इन्हें सहेजकर ही कर्णप्रिय मैटेरियल बाहर आ सकता है। इसके लिये हमें गांवों में जाकर लोक कलाकारों की पहचान करनी पड़ेगी उनको संरक्षण देने के उपाय करने पड़ेगे। तब जाकर बुंदेली हो या फिर अन्य कोई लोक विधा तभी जाकर वास्तविक गरीबों को लाभ मिल पायेगा।

बातचीत में उरई से आईं लोक कला मर्मग्य की उपाधि से विभूषित बुंदेली संगीत में शोध करने वाली डाक्टर वीणा श्रीवास्तव इतनी मुखर हो उठी कि उन्होंने पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र के संगीत से बुंदेली संगीत के पिछड़ने का कारण यहां के कलाकारों को मान लिया। उन्होंने वर्तमान व्यवस्था पर भी चोट करते हुये कहा कि लोक संगीत की थाती को सहेजकर रखने वाले अधिकतर लोग गांव से आते हैं। शहर में उन्हें पिछड़ा माना जाता है। अब कलाकार दो वक्त की रोटी के लिये जद्दोजहद करें या फिर अपने गले व हाथों से आपको मधुर स्वर लहरियां सुनायें। वैसे पिछले सात साल के सूखे ने तो यहां के लोगों के साथ ही संगीत की भी चूल्हें हिला कर रख दी वह तो भला हो आमिर खान का जिनके कानों में बुंदेली के अब मशहूर हो चुके गारी विधा के गीत 'सखि सईयां तो बहुतई कमात हैं मंहगाई डायन खाय जात है' को ओरिजनल कंपोजिशन में डालकर प्रस्तुत किया गया और बुंदेली संगीत को संजीवनी मिल गई।
अब यहां पर कलाकारों को संरक्षण देने के लिये सरकार के साथ ही सामाजिक संस्थाओं को आगे आना होगा जिससे कलाकारों के पेट रोटी के इंतजाम के साथ ही उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था हो सके। लगातार सेमिनारों और प्रशिक्षण सत्रों से यहां के बुंदेली संगीत का भला हो सकेगा।



यहां पर स्थापित है नाथ संप्रदाय की पहली गादी

चित्रकूट, संवाददाता: 'हानि लाभ जीवन मरण यश अपयश विधि हाथ' भले ही यह लाइनें गोस्वामी तुलसीदास ने साढे़ पांच सौ साल पहले ही लिखी हों पर वास्तव में इन शब्दों के गूढ़ मायने चित्रकूट की धरती पर पांच हजार साल पहले ही व्यक्त किये जा चुके थे। कैलाश पर्वत पर भगवान शंकर से दीक्षा के लेने के बाद जब स्वामी मच्कि्षन्द्र नाथ को विश्व भ्रमण का आदेश मिला तो उनके कदम चित्रकूट पहुंचकर थम गये। यहां की प्राकृतिक सुषमा और विविधता से वह इतने प्रभावित हुये कि उन्होंने अपनी पहली गादी यहीं स्थापित कर दी। यहीं चित्रकूट में अनुसुइया के जंगलों पर उन्हें अपने सुयोग्य शिष्य के रूप में गोरखनाथ भी मिल गये। गादी की स्थापना करने के साथ गुरु गोरखनाथ को कैलाश ले जाकर अपनी दिव्य शक्तियां देने के बाद वे वहीं पंच तत्वों में विलीन हो गये। गुरु गोखरनाथ ने स्यामल नाथ को अपना शिष्य बनाया। उन्होंने भी गुप्त नाथ को अपना शिष्य बनाया। गुरु गुप्त नाथ के समय नाथ संप्रदाय के इस प्रथम तीर्थ का विस्तार काफी तेजी से हुआ। पूरे देश से यहां पर आने वाले ज्ञान पिपासु अपनी ज्ञान साधना को पूर्ण करते रहे वहीं उन्होंने यहां पर व्यंकटेश भगवान की मूर्तियों के विग्रहों की स्थापना कर भगवान बाला जी के मंदिर की स्थापना की। नाथ संप्रदाय की पहली गादी को चित्रकूट में होने की मान्यता यहां पर महाराज गुप्त नाथ के समय ही मिली। यह परंपरा परमहंस नाथ, ब्रह्ममनन्द नाथ, माधव नाथ से बढ़कर अब वर्तमान गुरु योगेश्यवरानंद मंगलनाथ तक आ पहुंची है।

नाथ संप्रदाय के प्रमुख आचार्य योगेश्यवरानंद मंगलनाथ जी महाराज कहते हैं कि नाथ संप्रदाय का मतलब किसी को डराना नही बल्कि सभी प्राणियों में सद्गुणों को विस्तारित करना है। हर व्यक्ति में भगवान का अंश है। उसे किसी का डर नही होना चाहिये। मनुष्य को हानि लाभ जीवन मरण यश और अपयश तो विधि के विधान के अनुरूप ही मिलता है पर साधना वास्तव में उसे सभी कष्टों में खड़ा रहने की कला सिखाती है। जीवन संग्राम में विजय पथ का रास्ता केवल साधना से ही संभव है। आदि नाथ भगवान शंकर के डमरू से निकला ओंकार आज भी उतना ही प्रभावी है जितना प्रभावी वह स्वामी मच्छिन्द्र नाथ जी के समय पर था। वे कहते हैं कि दर्शन ही सभी प्रकार के ज्ञान और विज्ञान की मां है। अगर दर्शन नही होता तो किसी प्रकार की वस्तुओं का जन्म ही नही होता। खुद को शांत रखने के लिये वे साधना करने पर बल देते हैं और थोड़ा समय अपने लिये निकाल लेने पर ऐसा करना संभव बताते हैं।

पेयजल समस्या से निपटने के लिये प्रशासन ने कसी कमर

सर्वाधिक गांव हैं मानिकपुर ब्लाक में

-पहाड़ी ब्लाक में हो सकती है इस बार ज्यादा दिक्कत
चित्रकूट, संवाददाता: अब तो प्यास को लेकर मारामारी की स्थिति पैदा होने ही वाली है। पानी की समस्या को लेकर ऐसे हालत बनते जा रहे हैं कि आने वाले दिन भयावह होने वाले हैं। वैसे सरकारी आंकड़ों में पेयजल समस्या के मामले में मानिकपुर ब्लाक को जहां सर्वाधिक संवेदनशील घोषित किया गया है वहीं मंदाकिनी के सूख जाने के बाद अब तो तो तिरहार क्षेत्र में इस बार दिक्कतें काफी बढ़ सकती हैं। वैसे दो दिन पहले ही मुख्यालय के समीपवर्ती गांव में हैंडपम्पों के जवाब देने के कारण जल निगम को पानी सप्लाई देने के लिये रात में टयूब बेल चलाये जाने के निर्देश खुद जिलाधिकारी ने दिये हैं। फिलहाल जल निगम ने प्यासों को पानी देने के लिये अभी से अपनी कमर कस ली है। पिछले सालों की तरह ही इस साल भी टैंकरों के सहारे प्यासों की प्यास को बुझाने का इंतजाम किया जायेगा। इस योजना में लगभग 69 लाख रुपयों के खर्च होने का स्टीमेट बनाया है।
जल निगम अस्थायी शाखा के परियोजना प्रबंधक डी के शुक्ला बताते हैं कि पानी को लेकर अभी से कार्य योजना बनाकर उसकी स्वीकृति विभागीय स्तर पर ले ली गई है। मानिकपुर ब्लाक के इटवां गांव से पानी की दिक्कत होने की पहली शिकायत आयी है। सर्वे के लिये अधिकारियों को भेजा गया है। अगर जरूरत होगी तो टैंकर से पानी की सप्लाई प्रारंभ कर दी जायेगी।
उन्होंने बताया कि खुटहा, रैपुरवा माफी, घुरेटनपुर, मानपुर यादव के डेरा में, रसिन मजरा -चक्कला, ब्यूर, छिवलहा, गौशाला, महोदव व रसिन गांव में हरिजन बस्ती, ग्राम पंचायत बैहार मजरा डोकहा पुरवा, भभई, महराजपुर, बकटा बुजुर्ग, इटौरा, कपना, पथरामानी, पहाड़ी कस्बा व कर्का पडरिया का मजरा वेटन का पुरवा व कोलहाई, उमरी का मजरा बगीचा का पुरवा, डांडी व कोलान, किहुनिया का मजरा पयासी पुरवा, ऊंचाडीह का मजरा गढ़वा, टेढुवा, झलमल, कोलान,गुलरियापुरवा, डोडामाफी का मजरा सोसायटी कोलान, गोपीपुर , ग्राम सेमरदहा, खांचा पुरवा, गदरहापुरवा, खैराहनपुरवा, कोटा कदैला का मजरा हडहाई पुरवा, चूल्ही, रामपुर कल्याणगढ़, ददरी माफी का मजरा छोटी बिलहरी, बराह माफी, सरहट मानिकपुर देहात, सकरौंहा, अमचुर नेरूआ, कोटा कदैला का मजरा कदैला पुरवा, सिंगवन पुरवा, रूकमा बुजुर्ग का मजरा खांचा पुरवा, टिकरिया मजरा जमुनिहाई, निही मजरा भाटा, सिमरधा बडौदा, मारकुंडी डांडी कोलान, महुलिया, टंकी पुरवा, भभरा पुरवा, खिरवा पुरवा, चमरवा पुरवा, इटवां, महुलिया व देवरा आदि गांवों को आने वाले समय में पेयजल किल्लत होने वाले संभावितों में शामिल कर लिया गया है। टैंकरों की व्यवस्था भी कर ली गई है। पीने के पानी की समस्या की जानकारी मिलने पर तुरन्त ही टैंकर भेज दिये जायेंगे।



अगले साल चित्रकूट में होगा श्री राम यज्ञ

चित्रकूट, संवाददाता: भगवान राम बाबा भोलेनाथ की पूजा करते हैं तो शंकर भी हर समय भगवान राम का ही जप करते हैं। आध्यात्म की इस बड़ी गुत्थी को सही सिद्ध करने का काम नाथ संप्रदाय के साधकों द्वारा चित्रकूट की धरती पर अगले साल किया जायेगा। योगाभ्यानंद मंगलनाथ महाराज ने अगले साल की चैत्र राम नवमी को बाला जी मंदिर में श्री राम यज्ञ किये जाने की घोषणा की। शनिवार को नाथ संप्रदाय के प्रमुख योगाभ्यानंद मंगलनाथ महाराज ने अपने शिष्यों को संदेश देते हुये कहा कि अब उनके जीवन के पचहत्तर बंसत बीत चुके हैं और भारतीय दर्शन की आश्रम व्यवस्था की डोर उन्हें सन्यास आश्रम में जाने के लिये कह रही है। इसलिये अब पूर्ण रूप से वे भगवा वस्त्र धारण कर सन्यासी के वेश में रहकर सभी को आत्म कल्याण के साथ ही पूरे विश्व के कल्याण के गुर सिखाते रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2012 में चित्रकूट में नाथ संप्रदाय की पहली गादी पर चैत्र माह की राम नवमी को श्री राम यज्ञ करने की घोषणा की। इस दौरान टाउन हाल पर बाहर से आये स्थानीय हजारों भक्तों की मौजूदगी में नव नाथ यज्ञ की पूर्णाहुति हुई। इसके पूर्व मंगलनाथ महाराज ने भगवान भोले नाथ का रूद्राभिषेक करने के साथ ही नारायण स्त्रोत का पाठ किया।
इस दौरान व्यवस्था का गुरुतर भार उठाने में आनंद राव तैलंग, श्री रंग परस पारखी, नरेन्द्र केवले, अतुल पांडरीकर, मधुकर राव नायगांवकर, पद्माकर चोरधरे, कु. भालेन्द्र सिंह, श्री राम पांडेय, सुरेश राम हरि जोग, इन्द्र कुमार त्रिपाठी व गोबिंद पयासी आदि लोग शामिल रहे।