अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

शनिवार, 11 सितंबर 2010

हर जगह होती रही नानाजी के कार्यो की चर्चा

चित्रकूट। ग्रामोदय विश्वविद्यालय में शुक्रवार को हर जगह युगऋषि नानाजी ही चर्चाओं के केंद्र में रहे। चाहे भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी हों या मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, इन वीआईपी की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मी हों या फिर ग्रामोदय विश्वविद्यालय के छात्र सभी नानाजी को याद कर नतमस्तक हो रहे थे।
मौका था युगऋषि समाजसेवी नानाजी देशमुख के षट्मासिक श्राद्ध का। कृतज्ञ ग्रामोदय विश्वविद्यालय परिवार ने शुक्रवार को अपने संस्थापक कुलाधिपति नानाजी देशमुख के षट्मासिक श्राद्ध का आयोजन किया। इस आयोजन में चित्रकूट के समीपवर्ती क्षेत्रों के हजारों लोगों के साथ विभिन्न राज्यों से आये भाजपा के नेताओं ने भी हिस्सा लिया। सुबह से शुरू हुये यज्ञ में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णबिहारी पांडेय ने पत्नी विनोदनी पांडेय के साथ हवन कुंड में आहुतियां दीं। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मदनदास देवी, श्रीकृष्ण महेश्वरी, माखन सिंह, शंकर प्रसाद ताम्रकार, भाजपा के उत्तर प्रदेश संगठन महामंत्री नागेन्द्रनाथ त्रिपाठी समेत विभिन्न प्रांतों से आये भाजपा के संगठन मंत्रियों ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पहुंचकर नानाजी को श्रद्घासुमन अर्पित किये।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामोदय विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षकों के साथ ही आयोजन में आये सभी लोग की जुबां पर बस नानाजी के कार्यो की चर्चा थी। धर्मनगरी से सटे पालदेव गांव से आये बुजुर्ग नारायण ने कहा कि नानाजी तो इस क्षेत्र के लिये भगवान की तरह थे। उन्होंने दस्युओं का गढ़ रहे इस क्षेत्र में शिक्षा, विकास व सामाजिक समरसता की गंगा बहा कर जीवन का नजरिया बदल दिया। विश्वविद्यालय के अध्ययनरत छात्र विनीत द्विवेदी ने कहा कि नानाजी अब हमारे बीच नहीं हैं किंतु चित्रकूट क्षेत्र में हुये कार्य सदैव नानाजी की याद दिलाते रहेंगे।

बैठक में नहीं फटक सके स्थानीय भाजपाई

चित्रकूट। भाजपा संगठन मंत्रियों के तीन दिवसीय के राष्ट्रीय अभ्यास वर्ग में पहले दिन ही स्थानीय नेताओं का प्रवेश वर्जित कर दिया गया। वो तो भला हो ग्रामोदय विश्वविद्यालय का जिसने नानाजी के षट्मासिक श्राद्ध कार्यक्रम को सार्वजनिक कर दिया वरना स्थानीय भाजपाइयों को अपने बडे़ नेताओं के दर्शन भी न मिलते।
चित्रकूट के उद्यमिता विद्यापीठ में शुक्रवार को भाजपा के देश भर से आये संगठन मंत्रियों का तीन दिवसीय अभ्यास वर्ग शुरू हो गया। बैठक में पार्टी के बडे़ नेताओं के आगमन को लेकर स्थानीय भाजपाइयों ने भी तैयारी कर रखी थी किंतु आयोजन स्थल के द्वार पर ऐसी सख्ती हुई कि भाजपाइयों के पार्टी नेताओं से मिलने के अरमान धरे रह गये। उद्यमिता विद्यापीठ में तैनात सुरक्षाकर्मियों के अलावा प्रवेश द्वार पर लगे पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं ने पहले ही दिन साफ कर दिया कि बैठक में किसी सूरत में भाग लेने के लिये आमंत्रित किये गये संगठन मंत्री के अलावा कोई नेता नहीं जायेगा। इसके बावजूद स्थानीय भाजपाइयों ने प्रवेश द्वार से घुसने के लिये पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की काफी मान मनौव्वल भी की किंतु अंत में मायूसी ही हाथ लगी।
ऐसे में आमजनों के बीच हो रही फजीहत से परेशान भाजपाइयों के लिये ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित श्राद्ध कार्यक्रम राहत का सबब बन गया। इस कार्यक्रम को विश्वविद्यालय परिवार ने सार्वजनिक तौर पर समाजसेवी नानाजी देशमुख की याद में आयोजित किया था। जिसमें क्षेत्र के हजारों लोगों को आमंत्रित भी किया गया था। उद्यमिता विद्यापीठ में प्रवेश से वंचित होने बाद मायूस भाजपाई मजबूरी में ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में पहुंचे। इसके बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी व मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रमों में पहुंचने पर स्थानीय भाजपाई भी बड़े नेताओं के इर्द गिर्द मंडराते रहे।
हालांकि भाजपा के कुछ नेता धर्मनगरी में बडे़ नेताओं के आगमन पर स्वागत द्वार व होडिरर््ग्स लगवाने के साथ ही उद्यमिता विद्यापीठ के सामने तक पहुंच गये। मप्र की जमीन पर उत्तर प्रदेश के नेताओं के होर्डिग्स चर्चा के विषय भी रहे। होर्डिग्स के सहारे अपना चेहरा दिखाकर अभ्यास वर्ग में अंदर पहुंच पाने की जुगत भी नेताओं की कामयाब नहीं हो पाई।

राजनीति और समाजसुधार एक ही सिक्के के दो पहलू : मदन दास

चित्रकूट। 'पूर्ण कालिक अवधारणा की भूमिका' विषय पर बोलते हुये राष्ट्रीय प्रचारक प्रमुख मदनदास देवी ने देश भर से आये संगठन मंत्रियों को संदेश दिया कि सेवा का व्रत कठिन है। राजनीति और समाज सुधार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। नानाजी ने अपना जीवन एक ऋषि की तरह जिया। पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में उनसे अच्छा उदाहरणात्मक व्यक्तित्व दिखाई नही देता। राजनीति में तो उदाहरण बने ही समाजसेवा के क्षेत्र में भी उन्होंने समाज की दिशा और दशा दोनों को बदलने का काम किया।
उद्यमिता विद्यापीठ के डा. राम मनोहर लोहिया सभागार में शुक्रवार को प्रारंभ हुये संगठन सचिवों के अभ्यास वर्ग का पहला पाठ सुबह 11 बजे से 12.30 तक मदनदास देवी ने ही पढ़ाया। यही सत्र परिचयात्मक सत्र भी बना जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी व मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके विचार सुने। भोजन और चाय के बाद दूसरा सत्र भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने लिया। इसका विषय देश की वर्तमान स्थिति और भाजपा रहा। डेढ़ घंटे के इस सत्र में उन्होंने सभी संगठन मंत्रियों से दिल खोलकर बात की। उन्होंने बताया कि एक कार्यकर्ता का आचरण कैसा होना चाहिये। इस समय संगठन की स्थिति कैसी है इसमें सुधार करने की जरुरत कहां-कहां पर है। राम मंदिर विवाद या फिर बिहार और उत्तर प्रदेश के चुनाव सभी पर उन्होंने अपने विचार काफी गंभीरता के साथ व्यक्त किये। इस दौरान उन्होंने गुजरात मुद्दे के साथ ही उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों के बारे में भी चर्चा कर संगठन सचिवों को कमर कस कर तैयार हो जाने का आवाहन किया। शाम पांच बजे से साढ़े छह बजे तक तीन सत्र चले। इन सत्रों में प्रशिक्षण विषय पर रामप्यारे पांडेय, अन्त्योदय विषय पर, मोर्चा और प्रकोष्ठों से संबंधित जानकारी मनोहर लाल ने दी। शाम के सत्र में साढ़े सात बजे से मदनदास देवी ने एक बार फिर 'परिवार संकल्पना व समन्वय अनुभव और कठिनाइयां' विचार बांटे। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर काम करने वाले सभी एक परिवार की तरह होते हैं। इसलिये सभी के आचार विचार और व्यवहार भी ऐसे ही होने चाहिये। इस दौरान नानाजी देशमुख के जीवन दर्शन को दिखाता एक फोल्डर व दीनदयाल शोध संस्थान की पत्रिका नवरचना की प्रतियां भी सभी को बांटी गई।

गडकरी ने पढ़ाया पार्टी के मूल सिद्धांतों का पाठ

चित्रकूट। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने शुक्रवार को यहां देश भर से आये संगठन मंत्रियों को पार्टी के मूल सिद्धांतों का पाठ लगभग डेढ़ घंटे पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने अयोध्या मामले के साथ ही कश्मीर में धारा 370 को हटाये जाने के मामलों पर भी चिंतन प्रस्तुत किया।
उद्यमिता विद्यापीठ के डा. राममनोहर लोहिया सभागार में पार्टी कार्यकर्ताओं को मुख्य रूप से संदेश देने के उनके विषय बिहार व उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव रहे। उन्होंने कहा कि वास्तव में देश में भाजपा की स्थिति को मजबूत करने के लिये कौन से कारक व मुद्दे अच्छे हो सकते हैं इसके लिये सभी को चिंतन करना है। कहा कि उप्र के कार्यकर्ताओं के सामने अग्निपरीक्षा का समय है। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्यों को अधिक से अधिक संख्या में जिताने के प्रयास होने चाहिये।
लगभग डेढ़ घंटे तक चले उद्बोधन में देश की वर्तमान स्थिति के बारे में भी उन्होंने चर्चा की। कहा कि महंगाई सुरसा की तरह बढ़ रही है इसको रोकने के केंद्र के सभी उपाय व्यर्थ हैं। इसके पूर्व आरोग्य धाम परिसर पर हेलीपैड पर पत्रकारों से उन्होंने बात करने से इंकार करते हुये कहा कि वे यहां संगठन मंत्रियों के अभ्यास वर्ग में आये हैं। यहां राजनीति पर कोई भी बात करना उचित नही होगा।
नानाजी देशमुख के षट्मासिक श्राद्ध कार्यक्रम में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी भवन पहुंचकर नानाजी व श्रीराम दरबार के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के बाद उन्होंने कहा कि यहां नानाजी के श्राद्ध कार्यक्रम में आये हैं। इसलिये यहां भी राजनीतिक चर्चा नहीं होनी चाहिये। उन्होंने नानाजी को युगऋषि बताते हुये कहा कि राजनीतिक जीवन में रहते हुये भी वे एक ऋषि का जीवन व्यतीत करते थे। आज भले ही वे नही हैं पर वे चित्रकूट के लोगों के साथ ही अन्य सभी के दिलों में जिंदा हैं। उनके साथ ही आये मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के होते हुये उनका बोलना ठीक नहीं है। अभ्यास वर्ग के परिचयात्मक सत्र के बाद वे ग्रामोदय विश्वविद्यालय में नानाजी के षट्मासिक श्राद्ध कार्यक्रम में भी सम्मिलित हुये। उनके साथ सतना से सांसद गणेश सिंह भी आये थे। हेलीपैड पर राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत चित्रकूट मप्र विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार ने किया।

अभ्यास वर्ग: कुंद होती धार को तेज करने का प्रयास

चित्रकूट। पार्टी का गिरता जनाधार और हाथों से निकलते राज्यों के साथ महंगाई के मुद्दे पर विफलता के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने अपने तरकश में चित्रकूट में बैठकर वे तीर निकालने की रणनीति बनाई है जिनकी धार वास्तव में कुंद हो चुकी है। राष्ट्रीयस्तर पर पार्टी की क्षमता को बढ़ाने के लिये रणनीति के प्रमुख हिस्से संगठन मंत्रियों को भी नये जमाने की हाईटेक हवा लग चुकी है। भाजपा के तरकश के ये तीर अब उतने कारगर रुप से लक्ष्य को नहीं भेद पा रहे जितनी आशा उनसे संगठन करता है। इसीलिये उप्र, राजस्थान, दिल्ली जैसे राज्य पार्टी के हाथों से निकल गये।
वैसे केंद्र की सत्ता तक पहुंचने में जहां राममंदिर के साथ ही अटल विहारी बाजपेई, लालकृष्ण आडवानी व मुरलीमनोहर जोशी की छवि ने काम किया था वहीं उस समय संघ, विहिप के साथ ही भाजपा के सभी संगठन मंत्री तेजी से लगे थे पर अब समय बदल चुका है। सत्ता का स्वाद चखकर जहां नेताओं के दिन बहुर चुके हैं वहीं कभी कार्यकर्ताओं के घर से रोटी खाने और पार्टी के कार्यालयों में रात्रि में रुकने वाले संगठनमंत्री महंगी गाडि़यों में घूमते नजर आते हैं। चित्रकूट में अभ्यास वर्ग में पहुंचने से पूर्व तो उत्तर प्रदेश के कुछ संगठन मंत्री यहीं के लाजों में विश्राम कर उद्यमिता विद्यापीठ प्रांगण में पहुंचे थे। उधर, परिचयात्मक सत्र के बाद जब मीडिया से बात करने के लिये सतना के पार्टी जिलाध्यक्ष व अभ्यास वर्ग में सर्वव्यवस्था प्रमुख का दायित्व संभाल रहे सुरेन्द्र सिंह बघेल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि क्या किया जाये। जब सत्ता मिलने के बाद कार्यकर्ता भी थोड़ा बहुत आराम तलब हो जाते हैं तो संगठन मंत्री क्यों न ऐसे हो जायें। वैसे इस अभ्यास सत्र का मुख्य उद्देश्य भी इन्हीं संगठन मंत्रियों को एक बार फिर से सोद्देश्य बनाने के लिये तेजी से काम पर लगाना है।

वाल्मीकि ने दशरथ नंदन को किया राम के रूप में स्थापित

चित्रकूट। 'उल्टा राम जपति जग जाना, वाल्मीकि भये ब्रह्म समाना' श्री राम चरित के अमर गायक गोस्वामी तुलसीदास जी ने जिन महर्षि वाल्मीकि को श्री राम के गुणगान करने के कारण ब्रह्म की श्रेणी में रख दिया था वास्तव में श्री राम के प्रति उनके विचार कुछ अलग थे। इस बात का पुख्ता सबूत महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित 'मूल रामायणम्' में साफ मिलता है कि उन्होंने श्री राम को परमात्मा नही बल्कि मर्यादा की प्रतिमूर्ति पुरुषोत्तम दशरथ नंदन को ही माना है और शायद चित्रकूट में युग ऋषि नाना जी देशमुख की प्रेरणा से बना राम दर्शन इसी बात की अनुभूति कराता है। जहां पर श्री राम को विश्व का पहले समाजसुधारक के रुप में चरितार्थ किया गया है।
महर्षि वाल्मीकि के जन्म स्थान को लेकर चाहे जितने विवाद विद्वानों के बीच हों पर यहां के विद्वान सिर्फ एक कारण के साथ ही पूरे विवादों की इति श्री कर देते हैं।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के अधिष्ठाता प्रो. योगेश चंद्र दुबे कहते हैं कि मूल रामायण हो या फिर रामायणम् या फिर बाबा तुलसीकृत श्री राम चरित मानस तीनों में ही चित्रकूट के साथ ही यहां के अन्य प्राकृतिक सुषमा से युक्त स्थानों का विशद वर्णन जितने स्पष्ट तौर पर प्रमाणिकता के साथ किया गया है। उतना किसी और भाषा की या लेखक की रामायण में नही मिलता। इसलिये यह विवाद व्यर्थ का है वे कहां पर रहे हैं। वैसे इस प्रमाणिकता को पूरा विश्व स्वीकार कर चुका है कि श्री राम के चरित्र का पहला प्रक्षेपण महर्षि वाल्मीकि ने ही किया था।
उन्होंने कहा कि मूल रामायण के प्रथम चरण में ही जब देवर्षि नारद से महर्षि वाल्मीकि प्रश्न करते हैं कि पूरी सृष्टि में कौन सा ऐसा पुरुष है जिसका चरित्र और कर्तव्य निष्कलंक है तो उनका जवाब दशरथ नंदन श्री राम ही होता है।
कहा कि श्री राम जी का चरित्र ही एक ऐसा चरित्र है जो अन्य देव पुरुषों से उन्हें अलग करता है। पुरुषोत्तम की संज्ञा केवल उन्हें इसलिये दी गई है कि सोलह कलायें केवल श्री राम में है। श्री कृष्ण और अन्य देव पुरुषों में यह पूरी कलायें नही पाई गई।

जल्द ही मिलेगी मंदाकिनी को सीवर से मुक्ति

चित्रकूट। अगर सब कुछ सही चला तो मां मंदाकिनी को आने वाले साल के पहले महीने में सीतापुर कस्बे के सीवर से मुक्ति मिल जायेगी। जल निगम के अधिकारी दशकों पुरानी इस योजना को पूरा करने का काम कर रहे हैं। परियोजना प्रबंधक तो साफ तौर पर कहते हैं कि आगामी जनवरी के पहले हफ्ते में उनकी योजना नगर विकास मंत्री को चित्रकूट लाकर इस योजना का लोकार्पण करवाने की है।
गौरतलब है कि मंदाकिनी प्रदूषण को लेकर जागरण के जल संरक्षण अभियान के बाद जब उप्र की सरकार चेती। सबसे पहले उसे मंदाकिनी में गिरने वाले विशालकाय नाले से निजात दिलाने के लिये वर्षो पुरानी बंद पड़ी चित्रकूट सीवरेज योजना के लिये धन आवंटित कराने के प्रयास तेज किये। इस साल के मई महीने में प्रारंभ हुये 366.84 लाख रुपयों के काम अब अंतिम चरण में चलते दिखाई दे रहे हैं। इस योजना में जहां जमीन के अंदर 4153 मीटर पाइपों में 4100 मीटर पाइप डाला जा चुका है। सम्पवेल का काम भी 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है। 75 गुणा 150 मीटर के दो आक्सीडेशन पांड को बनाने का काम भी सत्तर प्रतिशत पूरा हो चुका है। जनरेटर रुम को बनाने का काम बरसात की वजह से रोका गया है वैसे बरसात के पहले इसका लगभग तीस प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
जल निगम अस्थायी निर्माण खंड के परियोजना प्रबंधक आर.बी.लाल बताते हैं कि सम्पवेल का 60 प्रतिशत आक्सीडेशन पांड का काम 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सीवर लाइन तो पूरी बिछ चुकी है। केवल ज्वाइंटस को कसा जाना है। 1400 मीटर की राइजिंग मेन भी पूरी पड़ चुकी है। नवम्बर-दिसम्बर तक काम पूरा कर दिया जायेगा। जनवरी के पहले सप्ताह में नगर विकास मंत्री को चित्रकूट लाकर चित्रकूट सीवरेज योजना का शुभारंभ करवाने की इच्छा है।
उन्होंने बताया कि विभाग को यह योजना वर्ष 1996 में मिली थी। कभी पैसे की कमी आडे़ आई तो कभी स्थानीय परिस्थितियों ने साथ नही दिया। मई में काम को प्रारंभ किया गया था। बरसात के तुरन्त बाद काम समाप्त करने की स्थिति होगी।

मानवीय गुणों को दर्शाता महामानव का आचरण

चित्रकूट। प्राकृतिक सुषमा में रची बसी तपोस्थली पर त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि ने एक ऐसा महाकाव्य रच दिया, जिसने एक साधारण मानव अयोध्या नरेश दशरथ के पुत्र राम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया। आज भी इस भूमि की धूल को साधारण न समझकर रामरज कहा जाता है और उसका वंदन कर पापों के नष्ट होने जैसी मान्यता विद्यमान है। सोलह कलाओं से युक्त जिस महामानव की कल्पना का यथार्थ महर्षि वाल्मीकि ने इस धरती पर देखा था, उसको साकार रूप देने का काम युग ऋषि नानाजी देशमुख की इच्छा पर यहां राम दर्शन के रूप में फलीभूत हुआ। सेठ मंगतूराम जयपुरिया के पुत्र डॉ. राजाराम जयपुरिया के आर्थिक सहयोग से जब नानाजी की कल्पना ने उड़ान भरी तो पांच मंदिरों का समूह कुछ ऐसे रूप में सामने आया कि मानो परब्रह्म पूर्णतम् परमेश्वर का रूप यहां पर पुरुषोत्तम, समाजसुधारक और समाज को नयी दिशा देने के साथ नये युग की शुरूआत करनेवाले श्रीराम नजर आने लगे।
महर्षि वाल्मीकि और बाबा तुलसीदास जी के लिखे रामचरित से नाना जी ने वह प्रसंग और दृश्य निकाले जो श्रीराम को महामानव व युग उद्धारक के रूप में सीधे तौर पर परिभाषित करते हैं। पहले मंदिर में जहां विश्व में रामलीला आयोजित किये जानेवाले देशों के साथ ही वहां के निमंत्रण पत्र व मुखौटों के साथ ही अन्य विवरण मिलते हैं। यहां यह देख कर आश्चर्य होता है कि चीन और सोवियत रूस जैसे कम्युनिस्ट शासन वाले देशों में भी श्रीरामचरित का विस्तार इतने मार्मिक तरीके से किया जा रहा है। कोरिया के राजकुमार का विवाह अयोध्या की राजकुमारी के साथ का दुर्लभ चित्र भी यहां मौजूद है। इसके साथ ही रूस, जापान, वर्मा, कनाड़ा, लाओस, वियतनाम, फ्रांस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, म्यांमार आदि देशों की भाषाओं में लिखी रामायणों के साथ ही वहां पर आयोजित होने वाली रामलीलाओं के दृश्यों को संयोजित किया गया है।
दूसरे मंदिर की शुरुआत श्रीराम के शिक्षा व अध्ययन से होती है। यहां पर शिक्षा का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि विश्वविद्यालय से उपाधियां पाकर या आजीविका की क्षमता अर्जित कर स्वयं को शिक्षित मानना अपने आपको धोखा देना है। मुनि विश्वामित्र द्वारा यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम लक्ष्मण को मांगना, अहल्या का पुर्नमिलन, राक्षसी ताड़का का वध, उच्च पदाधिकारी बहुलाश्व को प्राणदंड, पीडि़त युवतियों को समाज में उचित स्थान दिलाना, विनयशीलता की कुशलता से परशुराम का क्रोध शांत करना, मां की आज्ञा से भाई को राजपाट देकर खुद चौदह वर्ष के लिए वन में प्रस्थान, ऊंच-नीच का भेद मिटाकर निषादराज को गले लगाने के साथ ही भीलनी शबरी के हाथों से बेर खाना, चित्रकूट में मुनि वशिष्ठ और मां अनुसूइया से मिलन, भरत के चित्रकूट आने पर उन्हें स्नेह तो दिया पर राज्याभिषेक से इंकार कर वापस उन्हें अयोध्या भेजना, दानवी प्रकृति वाले राक्षसराज रावण से वानर और भालुओं के सहयोग से विजय प्राप्त करने जैसे दृश्य काफी मार्मिक हैं।
..और भी काफी खास है राम दर्शन
नव गृह के साथ ही सत्ताइस नक्षत्रों के पेड़ों के साथ ही रामदर्शन मंदिर समूह की विशेषता है कि यहां की किसी भी मूर्ति की न तो पूजा होती है और न ही कहीं प्रसाद या अगरबत्ती इत्यादि लगाने का प्रावधान है। मंदिर के मुख्य प्रवेशद्वार पर विनयवत श्री राम व जानकी को अपने हृदय में धारण करनेवाले बजरंगबली की विशालकाय प्रतिमा के दर्शन होते हैं तो आगे बढ़ने पर रामचरित के प्रथम प्रणेता महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास जी की विशाल प्रतिमाएँ दिखायी देती हैं।
दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव डॉ. भरत पाठक कहते हैं कि नानाजी देशमुख श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में ही पूजा करते थे। वे कहा करते थे कि श्रीराम विश्व के पहले समाजसुधारक थे। रामदर्शन का निर्माण भी इसी भावना के साथ किया गया था कि यहां आने वाले लोग श्रीराम के मानवीय गुणों को देखें और परखें और उसी अनुसार आचरण करें, जिससे वे भी भावी जीवन मंगलमय तरीके से बिता सकें।

चित्रकूट: जहां आकर मूर्ति ध्वंसक औरंगजेब का हुआ था दर्प चूर

चित्रकूट।संदीप रिछारिया  कभी मुगलिया सल्तनत को विस्तार देने के उद्देश्य से देश भर के मंदिरों और मूर्तियों को तोड़कर हिंदू संस्कृति पर कुठाराघात करने वाले सम्राट औरंगजेब की जिंदगी का एक अध्याय ऐसा यहां जीती जागती अवस्था में मौजूद है जो उनकी विपरीत छवि को पेश करता है। देश में हिंदू मूर्तियों को तोड़ने वाले इस सम्राट ने चित्रकूट में न केवल एक विशाल मंदिर बनवाया बल्कि मंदिर की सम्पूर्ण व्यवस्था के लिये कर मुक्त आठ गांवों की जमीन दी व रोजाना की पूजा, भोग की व्यवस्था के लिये एक रुपया भी देना मुकर्रर किया। लेकिन आज इस विशाल मंदिर की हालत यह है कि इसे अपनों ने ही बरबाद कर दिया । पहले मंदिर के एक पूर्व महंत की नशे की लत ने गांवों की जमीनों को बरबाद कर दिया और विशाल मंदिर के बड़े भाग पर अतिक्रमणकारियों के कब्जे को लेकर जब विवाद बढ़ा तो इस पर जिला प्रशासन ने अपना रिसीवर नियुक्त कर दिया। इन सब के बावजूद आज भी देश के सम्राट के नतमस्तक होने की कहानी कहता यह अपनी गौरवगाथा दोहरा रहा है। यह मंदिर चित्रकूट में पवित्र मंदाकिनी के किनारे बना बाला जी का मंदिर है। जो निर्वाणी संत बाबा बालक दास जी महाराज को मुगलिया सल्तनत के जहांपनाह औरंगजेब द्वारा बनवाकर दिया गया था।
मंदिर के महंत राम नरेश दास बताते हैं कि 1683 ई. में सम्राट औरंगजेब चित्रकूट आया और उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि यहां के सब मंदिरों और मूर्तियों को तोड़ दिया जाये। रात होने के कारण यह काम सुबह से प्रारंभ किया जाना था। तभी अचानक रात में सभी सैनिकों के साथ खुद सम्राट के पेट में तेज दर्द प्रारंभ हो गया। इस दर्द से निजात पाने का उपाय उनके साथ आये हकीम नही कर सके। आसपास के लोगों ने उन्हें बताया कि चित्रकूट विलक्षण चमत्कारी संतों की भूमि है पास ही बाबा बालक दास जी रहते हैं उनसे बात करें तो शायद कुछ हो जाये। जहांपनाह खुद ही पैदल चल कर बाबा बालक दास की धूनी में पहुंचे। कातर दृष्टि से क्षमा याचना करने के बाद अपना कष्ट बताया। बाबा ने अपनी धूनी से उन्हें भभूती देकर कहा कि इसे खुद खाओ और सभी सैनिकों को भी खिलाओ। चमत्कारिक रुप से सभी का पेट दर्द सही हो गया। बाबा की चमत्कारिक सिद्धि से प्रभावित होकर औरंगजेब ने जब बाबा से कुछ मांगने को कहा तो बाबा नाराज हो उठे और उन्होंने चिमटा लेकर बादशाह को दौड़ा लिया। बाद में औरंगजेब की काफी आरजू मिन्नत करने पर उन्होंने कहा कि तुम पूरे देश में हिंदू मूर्तियों व मंदिरों का अपमान करते रहे हो यहां पर मंदिर बनवाओ और उसमें खुद ही मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करो और इसके बाद तुम कभी किसी मूर्ति को तोड़ने का आदेश मत देना। बाबा की बात मानकर उसने न केवल यहां पर विशाल मंदिर बनवाया बल्कि मंदिर की व्यवस्था को सुचारु रुप से चलाने के लिये ठाकुर जी के सम्मान में 8 गांव देवखरी, हिनौता, चित्रकूट, रौदार, सिरिया, पड़री, जखा, दोहरिया दान में दिये। इसके साथ ही 330 बीघा बिना लगानी खेती काबिल जमीन राठ परगना के जोरा खांड गांव की 150 बीघा व अमरावती गांव की 180 बीघा जमीन भी दी। इसके साथ ही कोनी परोठा परगना के लगान से एक रुपया रोज भोग के लिये देना मुकर्रर किया।
वैसे सम्राट औरंगजेब ने बाबा के प्रति पूरा सम्मान दिखाते हुये इसे एक फरमान के द्वारा अपने शासनकाल के पैंतीसवें वर्ष मुकद्दस रमजान माह की 19 वीं तारीख को लेखक नवाब रफीउक कादर सहादत खां से तांब्र पत्र में लिपिबद्ध करवाकर मंदिर को सौंपा और उसमें इस बात का भी जिक्र किया कि आने वाली पीढि़यों में भी इस तरह की सहायता जारी रहेगी। आलमगीर का फरमान चित्रकूट के अधिपति पन्ना नरेश हिंदूपन्त ने भी इस बात का अक्षरश: पालन किया। अंग्रेजों ने भी उसे ज्यों का त्यों बरकरार रखा। आजादी के बाद जमींदारी उन्मूलन हो जाने के बाद भी इन गांवों का कुछ प्रतिकर मंदिर को मिलता रहा और मंदिर के वारिस आठ गांवों पर खेती करवाकर उपज लेते रहे। लगभग तीस साल पहले मंदिर के वैभव पर ग्रहण लगना प्रारंभ हुआ। मंदिर के एक महंत ने तो अपनी नशे की लत पूरी करने के लिये खेती पर ध्यान देने के बजाय जमीन को ही बेंचना प्रारंभ कर दिया। मंदिर परिसर पर बने कमरों में भी तमाम लोगों ने कब्जा करना प्रारंभ कर दिया। धीरे-धीरे सोलह बीघे के विशाल मंदिर परिसर पर केवल गर्भगृह पर ही पुजारियों का कब्जा रह सका। लगातार स्थिति बिगड़ती देखकर जिला प्रशासन ने इसे अपने आधिपत्य में ले लिया। तहसीलदार को इसका रिसीवर बना दिया गया।
अखिल भारतीय समाजसेवा संस्थान के संस्थापक गोपाल भाई कहते हैं कि आज देश में सांप्रदायिक सद्भाव की भावना की बेहद जरुरत है और इस तरह की बेशकीमती मिशाल बरबाद हो रही है। सरकारी संरक्षण के नाम पर भी इसे कुछ प्राप्त नही हो रहा है।
पुरातत्व विभाग के मंडल अधिकारी रणजीत सिंह कहते हैं कि उनको औरंगजेब के बनवाये बाला जी मंदिर की जानकारी हुई थी। इसके लिये लिखा पढ़ी की गई है, पर मामला अदालत में होने के कारण अभी यह मंदिर उनके विभाग को नही मिला है।
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के प्राध्यापक डा. कमलेश थापक कहते हैं कि चित्रकूट में ही आकर औरंगजेब को वास्तव में हिंदू ऋषियों के महत्व का ज्ञान हुआ था। उसने यहां पर बाबा बालकदास का चमत्कार देखकर न केवल मंदिर बनवाया बल्कि जागीरें भी दी। इस स्थान का विकास तो सरकार की जिम्मेदारी होना चाहिये।
एक दर्द यह भी
मंदिर के महंत रामनरेश दास बताते हैं कि विवादों के कारण सरकारी हस्तक्षेप हुआ। मंदिर के गर्भगृह को छोड़कर कुछ कमरों में रिसीवर ने न केवल तालाबंद कर दिया बल्कि मंदिर की सबसे कीमती धरोहर सम्राट औंरगजेब द्वारा दिया गया शाही फरमान भी सरकारी अधिकारी उठा ले गये। यह शाही फरमान तांबे पर उत्कीणित कर बनाया गया था। तब से आज तक कोई भी सरकारी अधिकारी यह बताने को तैयार नही की यह फरमान है कहां। उन्होंने आशंका जताई कि शायद यह फरमान सरकारी अधिकारियों ने गायब कर दिया है। इसलिये मंदिर में आने वालों को कागज पर फोटो कापी कराये हुये फरमान को ही दिखाया जाता है।
कहते हैं अधिकारी
मंदिर के रिसीवर बताये जाने वाले तहसीलदार अश्विनी कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अब वहां का रिसीवर तहसीलदार नही है। बल्कि पूर्व एडीएम ने एक समिति बनाकर उसको मंदिर की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी दे दी थी। तब से समिति का अध्यक्ष प्रधान और उसके सदस्य ही जारौमाफी की जमीन का गल्ला ले रहे हैं। फरमान को लाये जाने के बावत उन्होंने कहा कि यह उनके पहले का मामला है इसलिये इस बात की उन्हें जानकारी नही है।

शहीदों के खून से लाल हो गया था हनुमान धारा का पहाड़

चित्रकूट। आदिकाल से धर्म की ध्वजा को विश्व में फैलाने वाला 'चित्रकूट' खुद में अबूझ पहेली है। तप और वैराग्य के साथ स्वतंत्रता की चाह में अपने प्राण का न्योछावर करने वालों के लिये यह आदर्श भूमि सिद्ध होती है। राम-राम की माला जपने वाले साधुओं ने वैराग्य की राह में रहते हुये मातृभूमि का कर्ज चुकाने के लिये अंग्रेजों की सेना के साथ दो-दो हाथ कर लड़ते-लड़ते मरना पसंद किया। लगभग तीन हजार साधुओं के रक्त के कण आज भी हनुमान धारा के पहाड़ में उस रक्तरंजित क्रांति की गवाह हैं।
बात 1857 की है। पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल बज चुका था। यहां पर तो क्रांति की ज्वाला की पहली लपट 57 के 13 साल पहले 6 जून को मऊ कस्बे में छह अंग्रेज अफसरों के खून से आहुति ले चुकी थी।
एक अप्रैल 1858 को मप्र के रीवा जिले की मनकेहरी रियासत के जागीरदार ठाकुर रणमत सिंह ने लगभग तीन सौ साथियों को लेकर नागौद में अंग्रेजों की छावनी में आक्रमण कर दिया। मेजर केलिस को मारने के साथ वहां पर कब्जा जमा लिया। इसके बाद 23 मई को सीधे अंग्रेजों की तत्कालीन बड़ी छावनी नौगांव का रुख किया। पर मेजर कर्क की तगड़ी व्यूह रचना के कारण यहां पर वे सफल न हो सके। रानी लक्ष्मीबाई की सहायता को झांसी जाना चाहते थे पर उन्हें चित्रकूट का रुख करना पड़ा। यहां पर पिंडरा के जागीरदार ठाकुर दलगंजन सिंह ने भी अपनी 1500 सिपाहियों की सेना को लेकर 11 जून को 1958 को दो अंग्रेज अधिकारियों की हत्या कर उनका सामान लूटकर चित्रकूट का रुख किया। यहां के हनुमान धारा के पहाड़ पर उन्होंने डेरा डाल रखा था, जहां उनकी सहायता साधु-संत कर रहे थे। लगभग तीन सौ से ज्यादा साधु क्रांतिकारियों के साथ अगली रणनीति पर काम कर रहे थे। तभी नौगांव से वापसी करती ठाकुर रणमत सिंह भी अपनी सेना लेकर आ गये। इसी समय पन्ना और अजयगढ़ के नरेशों ने अंग्रेजों की फौज के साथ हनुमान धारा पर आक्रमण कर दिया। तत्कालीन रियासतदारों ने भी अंग्रेजों की मदद की। सैकड़ों साधुओं ने क्रांतिकारियों के साथ अंग्रेजों से लोहा लिया। तीन दिनों तक चले इस युद्ध में क्रांतिकारियोंको मुंह की खानी पड़ी। ठाकुर दलगंजन सिंह यहां पर वीरगति को प्राप्त हुये जबकि ठाकुर रणमत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गये। करीब तीन सौ साधुओं के साथ क्रांतिकारियों के खून से हनुमानधारा का पहाड़ लाल हो गया।
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के अधिष्ठाता डा. कमलेश थापक कहते हैं कि वास्तव में चित्रकूट में हुई क्रांति असफल क्रांति थी। यहां पर तीन सौ से ज्यादा साधु शहीद हो गये थे। साक्ष्यों में जहां ठाकुर रणमत ंिसह के साथ ही ठाकुर दलगंजन सिंह के अलावा वीर सिंह, राम प्रताप सिंह, श्याम शाह, भवानी सिंह, सहामत खां, लाला लोचन सिंह, भोला बारी, कामता लोहार, तालिब बेग आदि के नामों को उल्लेख मिलता है वहीं साधुओं की मूल पहचान उनके निवास स्थान के नाम से अलग हो जाने के कारण मिलती नहीं है। उन्होंने कहा कि वैसे इस घटना का पूरा जिक्र आनंद पुस्तक भवन कोठी से विक्रमी संवत 1914 में राम प्यारे अग्निहोत्री द्वारा लिखी गई पुस्तक 'ठाकुर रणमत सिंह' में मिलता है।

हां. हमें मालूम है आजादी का सही मतलब

चित्रकूट। भले ही आजादी के पहले का दौर इन्होंने देखा हो पर वे आज के बदलते हिंदुस्तान के हिमायती है। कभी हिंदुस्तानियों को अंग्रेजों के बूटों के तले रौंदने का मंजर इनके सामने से होकर गुजरा था पर बेबसी और डर के कारण हिम्मत नही जुटा पाये पर मुखर होकर पुरानी पीढ़ी के ये नौजवान कहते हैं वह सचमुच चौंकाने वाला है।
बुजुर्ग शरद चंद्र चतुर्वेदी कहते हैं कि हम होंगे कामयाब नही बल्कि अब हम हो चुके कामयाब नारा होना चाहिये। आज भारत विश्व गुरु बन चुका है। बाबा रामदेव को बिट्रेन हो या अमेरिका सभी जगह पर आदर के साथ बुलाया जाता है। अमेरिका ने तो अपनी कीमती जमीन भी योग और आध्यात्म के प्रचार के लिये दी है। अंग्रेजों के जमाने की बातें गुजरा हुआ कल था, आज हमारे पक्ष में पूरे विश्व में बयार बह रही है। भारतीयों की तूती पूरे विश्व में गूंज रही है। अमेरिका का राष्ट्रपति अपने बैग में हनुमान जी की मूर्ति रखता और दीपावली पर दिये जलाता है। यह भारत और भारतीयता की जीत है।
बुजुर्ग रामकृष्ण यादव कहते हैं कि आज हम विश्व शक्ति बनने के करीब हैं। फिर तमाम बातें अनर्गल क्यों की जा रही हैं। विश्व के लगभग सभी देशों में भारतीय मेघा अपना कब्जा कर रखा है। अमेरिका का व्हाइट हाउस तो भारतीय अधिकारियों से भरा पड़ा है। इस तरह में अपने आपकी बुराई कर खुद को हतोत्साहित करने का काम कोई गंदी मानसिकता का भारतीय ही कर सकता है।
पेशे से शिक्षक अवधेश कुमार शुक्ला कहते हैं कि क्या अंग्रेजों के जमाने में भ्रष्टाचार नही था। वे भी खूब भ्रष्टाचार करते थे पर उनकी दहशत के कारण कोई उनका विरोध नही करता था उस जमाने
के जागीरदार और लम्बरदार भी बड़े भ्रष्टाचारी हुआ करते थे।
एसएन पांडेय कहते हैं कि हिंदुस्तान की बुराई करने वालों को वे हिंदुस्तानी नही मानते। जिस देश की संस्कृति और सभ्यता का लोहा पूरा विश्व मानता हो उसे अपने ही गाली दें यह अच्छा नही है। आज भारतीय सिरमौर हैं और रहेंगे।

नाग पंचमी पर घर-घर पूजे गये नाग देव

चित्रकूट। बुंदेलखंड का प्रमुख माने जाने वाला नागपंचमी का त्योहार लोगों ने जोरदार तरीके से मनाया। जहां घर-घर में दरवाजों पर नाग देवता की आकृति बनाकर उनकी पूजा अर्चना की गई। इस दौरान काफी जगहों पर गुडि़या पीटी गई तो कई क्षेत्रों में दंगल होने की भी सूचनायें आ रही हैं।
जानकारी के मुताबिक लोगों का हुजूम सुबह से ही पवित्र नदियों और सरोवरों की तरफ जाता दिखाई दे रहा था। वहां पर लोगों ने डुबकियां मारकर शिवालयों पर रुद्राभिषेक करने के साथ नाग देवताओं का विशेष पूजन किया। इस दौरान महिलाओं की संख्या भारी मात्रा में रही।
घरों में महिलाओं ने गोबर के आस्तिक बना कर दूबा और घी, गुड और अक्षतों से उनकी पूजा की। इस दौरान राजा परीक्षित को तक्षक नाग द्वारा डसने के बाद उनकी पीढ़ी की नागों से सुरक्षित रखने की कथा भी सुनी सुनाई गई।
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में इस मौके पर विशाल दंगल का आयोजन हुआ। यहां पर विवि के अलावा बाहर के भी पहलवानों ने भाग लिया। इस दौरान कुलपति प्रो. के बी पांडेय के अलावा समस्त स्टाफ मौजूद रहा। शाम के समय कुछ जगहों कपड़े की बनी गुडि़या भी कूटी गई।

भारत माता की जय व पर्यावर ण के नारों से गूंजा नगर

चित्रकूट। सूर्यदेव की रंग बदलती काया और हल्की फुहारों के बीच जब जागरण परिवार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रभात फेरी आयोजित करने के लिये देशभक्ति से ओतप्रोत नारे लगाते बच्चों के बीच पहुंचा तो सभी प्रसन्न हो उठे। ज्यों ही उन्हें पर्यावरण संबंधी नारे लिखी तख्तियां दी गईं तो वे भारत माता की जय के साथ ही पर्यावरण बचाओ के नारे भी लगाने लगे।
स्वतंत्रता दिवस की सुबह सात बजे से ही ट्रैफिक चौराहा, पटेल तिराहा, पुराना अस्पताल चौराहा, चकरेही चौराहा, भगवानदीन चौराहा, काली देवी चौराहा आदि जगहों पर स्कूली बच्चे रंग बिरंगे परिधानों से सजे दिखाई दे रहे थे। स्कूलों की प्रभातफेरियां भी आकर्षक स्वरूपों के साथ थीं। कहीं महात्मा गांधी रघुपति राघव राजा राम कहते चल रहे थे तो कहीं सुभाषचंद्र बोस तुम मुझे खून दो में तुम्हें आजादी दूंगा का नारा बुलंद कर रहे थे। सहज पब्लिक स्कूल, पूर्व माध्यमिक विद्यालय नया बाजार कर्वी, प्राथमिक विद्यालय नया बाजार कर्वी, भाभा कान्वेंट स्कूल, प्राथमिक विद्यालय कर्वी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय कर्वी, सहज ग‌र्ल्स इंटर कालेज, डा. अंबेडकर पब्लिक स्कूल, ज्ञान भारती इंटर कालेज, किंग्सन इंग्लिश स्कूल, शांती पब्लिक स्कूल, रामदयाल विद्या मंदिर, सरस्वती शिशु मंदिर, मार्डन पब्लिक स्कूल आदि के बच्चों ने जागरण परिवार के नारे शुद्ध वातावरण के समर्थन में हामी भरी।

..नहीं चल सकीं ट्रेनें

चित्रकूट। एक घोषणा नेता की तो दूसरी घोषणा अधिकारी की, पर मजे की बात तो यह कि दोनों की घोषणा अभी तक महज लफ्फाजी साबित हो रही है। मामला रेलवे से संबंधित है। रेल मंत्रालय की मुखिया ममता बनर्जी ने बुंदेलखंड के इस भूभाग के लिये एक ट्रेन कानपुर से चित्रकूटधाम कर्वी के लिये नयी चलाने के साथ निजामुद्दीन से मानिकपुर तक चलने वाली उप्र संपर्क क्रांति एक्सप्रेस को रोजाना चलाये जाने की घोषणा की थी, पर अभी तक केवल संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के आने के समय के बदलाव के अलावा कुछ परिवर्तन होता दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय रेलवे के अधिकारी कहते हैं कि कानपुर-चित्रकूटएक्सप्रेस के आने व जाने का समय तो आ चुका है। संपर्क क्रांति के आने के समय में परिवर्तन भी हो चुका है। अभी रेलवे के पास नये रैक न होने के कारण नयी ट्रेन प्रारंभ नहीं हो पा रही है।
गौरतलब है कि बुंदेलखंड़वासियों की विशेष मांग के साथ ही जब दो केंद्रीय मंत्रियों की संस्तुति जुड़ी तो रेल मंत्रालय ने बुंदेलखंड के इस भूभाग के लिये एक नयी ट्रेन चलाने के साथ ही संपर्क क्रांति को रोजाना करने की घोषणा की। कानपुर से चित्रकूटधाम कर्वी एक्सप्रेस ट्रेन की घोषणा कराने में जहां केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल का विशेष योगदान रहा वहीं उप्र संपर्क क्रांति को रोजाना करवाये जाने के पीछे ग्राम्य विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने प्रयास किये। इनके प्रयास तो रंग ले आये और रेल मंत्री ममता बनर्जी ने इन दोनों ट्रेनों की घोषणा भी कर दी। लेकिन जब इनके संचालन की बात आई तो यह कहा गया कि रेलवे की नयी समय सारणी जुलाई से प्रारंभ होती है और जुलाई से ही ये चलेंगी। जुलाई के महीने में सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस के निजामुद्दीन से आने का समय जरुर साढ़े आठ बजे से साढ़े सात बजे हो गया लेकिन ट्रेनों का संचालन नहीं शुरू हो सका। वैसे बीच में यहां पर आये डीआरएम ने भी पत्रकारों से बात करते हुये कहा था कि जल्द ही रैक की व्यवस्था होने पर ट्रेनों का संचालन कर दिया जायेगा।
उपस्टेशन अधीक्षक एसके सिंह ने बताया कि कानपुर-चित्रकूट एक्सप्रेस ट्रेन के आने का समय 17:53 बजे व 17:56 पर जाने का समय आ चुका है। संपर्क क्रांति को पूरे हफ्ते चलाये जाने के लिये अभी तो व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि ट्रेनों का संचालन तो ऊपर से ही होगा। अप्रैल में हुई इस घोषणा के बाद रेलवे की नयी समय सारणी में कई स्टेशनों पर आगमन और प्रस्थान का समय के साथ ट्रेन नंबर भी आ गया है पर ट्रेनों के संचालन में रेलवे विभाग पीछे हटता नजर आ रहा है।

कहीं सूखा न पड़ जाय!

चित्रकूट। मां मंदाकिनी के किनारे रहने वाले जहां पानी की कमी के कारण कराह रहे हैं वहीं पाठा पर इंद्रदेव की मेहरबानी कुछ इस तरह की हुई कि आशा बंधाकर किसानों को निराश कर दिया। कुछ इसी तरह के हाल भरतकूप और बरगढ़ और मऊ के इलाकों के हैं। कृषि विभाग के अधिकारी भी इस बात की आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि कहीं अवर्षण की स्थिति में सूखा न पड़ जाय।
पिछले एक दशक से सूखे के कारण कराहते बुंदेलखंड के इस भूभाग पर मौसम की मेहरबानी उस अंदाज में नहीं हुई जिसकी आशा इस साल भी की गई। पहले तो पन्द्रह जून को धता बताकर मानसून की पहली फुहार एक जुलाई को गिरी और फिट एक महीने में छिटपुट बारिश होती रही। पिछले एक हफ्ते से तो इंद्रदेव ने जहां अपना काम हल्के फुलके अंदाज में किया वहीं गर्मी और उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया। जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराये जाने को लेकर भाजपा, कांग्रेस और सपा के नेता आंदोलन छेड़ने की बात तो करते हैं पर पंचायत चुनावों के चक्कर में वे अभी सीधे तौर पर सड़क पर उतरने से कतरा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी व रवि त्रिपाठी कहते हैं कि इस समय किसान की हालत काफी दयनीय है। पहले तो हलकी बारिश कर ऊपर वाले ने आशा बंधाई कि फसल जोरदार होगी, लेकिन अब पानी न बरसा कर उनकी भावनाओं पर तुषारापात कर रहा है।
कांग्रेस के रघुनाथ द्विवेदी मुखर होकर कहते हैं कि वास्तव में इस समय अन्नदाता की स्थिति काफी खराब है। खेतों पर पड़ा दाना भी वापस होता दिखाई नहीं देता। ऐसे में कर्ज लेकर खेती करने वाला किसान क्या करेगा? जल्द ही किसानों को सरकार की तरफ से राहत दी जानी चाहिये।
सपा के ब्लाक प्रमुख पहाड़ी मनोज सिंह कहते हैं कि पहाड़ी ब्लाक के गांवों में तो हालत दूसरे क्षेत्रों से ज्यादा खराब है। यहां पर नदी के तटवर्ती इलाकों के हालात और भी ज्यादा खराब हैं। यहां पर तो जमीन पर हल ही नहीं चल पा रहा है। जब किसान का हल ही नहीं चलेगा तो क्या खाक खेती होगी।
जिला कृषि अधिकारी हर नाथ सिंह कहते हैं कि लगता है कि एक बार फिर सूखे के हालातों का सामना चित्रकूट जिले को करना पड़ सकता है। अभी तो कुल 186 मिमी पानी की जिले में बरसा है। यह भी क्षेत्रवार ही बरसा है। कहीं पर तो तीन सौ मिमी के आसपास पानी बरस चुका है तो कहीं पर पचास मिमी पानी नहीं बरसा। उन्होंने कहा कि खेती के लिये तो हर माह पानी की जरूरत रहती है।

खौफ से ठिठके कदम बढ़े शिक्षा की ओर

चित्रकूट। केवल एक कारण कैसे पूरे एक इलाके की दशा और दिशा को बदल देता है। पहले के एक कारण ने लगभग आठ सालों तक क्षेत्र में पुलिस और डाकुओं के कारण दहशत का माहौल कायम रखा तो अब केवल एक व्यक्ति ने यहां की आब-ओ-हवा को बिलकुल बदल दिया।
जी हां, यह इलाका है पवित्र धाम चित्रकूट का पश्चिम की तरफ का प्रवेश द्वार भरतकूप। सन् 2001 में डाकू अम्बिका पटेल उर्फ ठोकिया के डकैत बनने के बाद बगहिया से लेकर मडफा पहाड़ का पूरा इलाका उसके खौफ के कारण दहशत में रहा करता था। ठोकिया के मददगारों की लिस्ट में इस इलाके के लोगों के ज्यादा नाम होने के कारण उनके परिवार के लोगों को ज्यादा कष्ट भोगना पड़ा। इस तरह से बच्चों की पढ़ाई भी काफी बाधित होती थी।
जहां कभी शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करना बेमानी प्रतीत होता था। वहीं पर अब वातावरण पूरी तरह से बदल चुका है। राजकीय इंटर कालेज घुरेटनपुर के छात्रों को देखकर लगता नही कि अब यहां पर पुलिस या डाकुओं के खौफ का कोई साया भी है। पूरी तरह से तैयार ड्रेस में जब यहां के छात्र और छात्रायें पीटी, ड्रिल और कदमताल करते हैं तो यह समझ नही पड़ता कि ये छात्र-छात्रायें इतनी यांत्रणा भोग चुके हैं। साढ़े तीन सौ छात्र-छात्राओं को नये तरह के हिंदुस्तान से परिचित कराने का काम पिछले ही सत्र में यहां पर आये प्रधानाचार्य एमपी सिंह ने किया। प्रधानाचार्य जहां बच्चों के अंदर से डाकुओं और पुलिस का डर निकालकर उन्हें मानव बनाने के साथ ही सच्चा देशभक्त इंसान बनाने की बात करते हैं। वहीं उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ भी मुहिम छेड़ रखी है। वे बताते हैं कि उनके विद्यालय में लगभग चालीस प्रतिशत छात्र व छात्रायें शादीशुदा हैं। काफी का गौना अभी नही हुआ है। कहते हैं कि नया एडमीशन और गौना बालिग हो जाने पर ही अभिभावक लें इसके लिये वे पहले से अभिभावकों से लिखित वायदा करवा रहे हैं। इस साल हाई स्कूल बोर्ड की परीक्षा आठ बच्चों ने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। एक बालिका ने तो सत्तर प्रतिशत से ज्यादा अंक लाये।
पर्यावरण का रक्षक बने छात्र
इस विद्यालय की सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर पौधों का रोपण बच्चों द्वारा करवाया गया है। बच्चों ने न केवल पौधों का रोपण किया बल्कि उनकी सुरक्षा और पोषण की पूरी जिम्मेदारी भी उठाई हुई है। फलदार पौधों में नींबू, आंवला, आम, अमरुद, केला, संतरा, महुवा व फूल वाले पौधों में गंदा, चांदनी, बेला, कनेर, बोगेनबेलिया के साथ ही शीशम और सागौन गुलमोहर आदि के पौधे हैं। प्रधानाचार्य बताते हैं कि आसपास के रहने वाले छात्र सुबह से आते हैं और वे पौधों में पानी डालते हैं।
कहते हैं अधिकारी
जिला विद्यालय निरीक्षक मंशा राम कहते हैं कि घुरेटनपुर का राजकीय इंटर कालेज वास्तव में इस समय न केवल शिक्षा बल्कि संस्कारों और खेलकूद के लिये जिले का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बना हुआ है। इसका पूरा श्रेय वहां के प्रधानाचार्य को जाता है। देहात में रहने वाले बच्चों के अंदर जो संस्कार डालने का काम उन्होंने किया है वह वास्तव में काबिल-ए-तारीफ है।

ज्यादा फल देने वाले पौधे लगायें - डा. गौतम

चित्रकूट। खाद्य एवं प्रसंस्करण के अन्तर्राष्ट्रीय सलाहकार डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी विश्वविद्यालय हिमांचल विश्वविद्यालय के शिक्षा विस्तार शिक्षा निदेशक डा. डीआर गौतम ने कहा कि श्रेष्ठ गुणवत्ता वाले पौध उत्पादन पर विशेष ध्यान देना चाहिये। ताकि बाग भविष्य में अधिक उत्पादन और उच्च गुणवत्ता वाला फल दे सके। हमारे संसाधन अवश्य सीमित हैं। किंतु हमारा प्रयास इस तरह रहे कि कम भूमि में अधिक आय प्राप्त कर सकें।
डा. गौतम मंगलवार को महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्व विद्यालय में आयोजित उच्च गुणवत्ता युक्त पौधशाला और भविष्य की सफल बागवानी विषयक विशिष्ट व्याख्यान में विचार व्यक्त कर रहे थे। इस क्षेत्र में बारिश कम होने तथा सिंचाई के अभाव में किसानों की आर्थिक स्थिति अच्छी नही है। प्रकृति प्रदत्त नदी, नालों में वारिस का पानी तो रहता है। किन्तु उसका व्यवस्थित संचय न होने के कारण किसानों को पूरा लाभ नही मिल पाता है। नदी नालों में चेक डैम का निर्माण करके धरातलीय पानी के स्तर और मात्रा को और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जलाभाव वाले क्षेत्रों में बेल, अमरूद,जामुन,करौदा,इमली,हरड,बहेड़ा,आंवला, अनार इत्यादि प्रजाति वाले फलो का उत्पादन किया जाना लाभकारी होता है। सघन बागवानी इस दिशा में अच्छा कदम होगा। बदलते पर्यावरण और ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार को भी हम इन प्रयासों से कम कर सकते है।
व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये कुलपति प्रो. केबी पाण्डेय ने कहा कि देश की लगभग प्रत्येक समस्या के समाधान और विकास के लिये वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ अनुसंधान का लाभ जन सामान्य को भी मिले इसका प्रयास होना चाहिये। उन्होंने कहा कि शोधों का निष्कर्ष लोक भाषा में भी प्रसारित कराया जाना चाहिये। इस दौरान विवि परिवार के काफी सदस्य मौजूद रहे।