शनिवार, 19 दिसंबर 2009
रविवार, 1 नवंबर 2009
जो सही श्रोता नहीं वह वक्ता नहीं: आचार्य नवलेश
चित्रकूट। दीपावली की अमावस्या को प्रभु श्रीराम, जानकी और भाई लक्ष्मण के साथ कामता नाथ स्वामी की परिक्रमा करते हैं, इस दिन यहां दीपदान करने वाले का जीवन धन्य हो जाता है।
यह उद्गार कथावक्ता आचार्य नवलेश दीक्षित ने मुख्यालय में बस स्टैंड के समीप जय शंकर मिश्र के आवास पर चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि वक्ता से ज्यादा बुद्धिमान श्रोता को होना चाहिये। वास्तव में जो सही श्रोता नहीं बन सकता वह वक्ता बन नहीं सकता। कहा कि किसी की रोटी छीनना महापाप है। किसी को रुलाने का प्रयास किया तो उससे दो गुना खुद ही रोना होगा। अगर हमारे हाथ से किसी का किंचित मात्र भी भला हो तो यही सबसे बड़ा भाग्य होगा।
उन्होंने कहा कि सुदामा की सबसे बड़ी विशेषता उनके संतोष रूपी धन की है। जाति की पूजा नहीं अपितु गुणों की पूजा होती है। संस्कृति के हिसाब से सुदामा ब्राह्मण होने के साथ ही गुणी भी थे। तभी तो श्री कृष्ण खुद ही सुदामा जी की दशा देखकर रोये और अपने नयनों के जल से उनके पैरों को धोया।
कथावाचक ने कहा कि दीपावली की रात तीर्थ क्षेत्र के श्री कामतानाथ मंदिर के आसपास दीपदान करने का विशेष महत्व है। यहां दीपदान करने से जीवन में प्रकाश छा जाता है व जीवन उल्लासमय हो जाता है।
कथा के अंतिम दिन कथा को सुनने के लिये सांसद आर के पटेल, ब्लाक प्रमुख मनोज सिंह, राजबहादुर यादव, गौरी शंकर मिश्र, शक्ति प्रताप सिंह, जयशंकर मिश्र व माया सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहें।
यह उद्गार कथावक्ता आचार्य नवलेश दीक्षित ने मुख्यालय में बस स्टैंड के समीप जय शंकर मिश्र के आवास पर चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि वक्ता से ज्यादा बुद्धिमान श्रोता को होना चाहिये। वास्तव में जो सही श्रोता नहीं बन सकता वह वक्ता बन नहीं सकता। कहा कि किसी की रोटी छीनना महापाप है। किसी को रुलाने का प्रयास किया तो उससे दो गुना खुद ही रोना होगा। अगर हमारे हाथ से किसी का किंचित मात्र भी भला हो तो यही सबसे बड़ा भाग्य होगा।
उन्होंने कहा कि सुदामा की सबसे बड़ी विशेषता उनके संतोष रूपी धन की है। जाति की पूजा नहीं अपितु गुणों की पूजा होती है। संस्कृति के हिसाब से सुदामा ब्राह्मण होने के साथ ही गुणी भी थे। तभी तो श्री कृष्ण खुद ही सुदामा जी की दशा देखकर रोये और अपने नयनों के जल से उनके पैरों को धोया।
कथावाचक ने कहा कि दीपावली की रात तीर्थ क्षेत्र के श्री कामतानाथ मंदिर के आसपास दीपदान करने का विशेष महत्व है। यहां दीपदान करने से जीवन में प्रकाश छा जाता है व जीवन उल्लासमय हो जाता है।
कथा के अंतिम दिन कथा को सुनने के लिये सांसद आर के पटेल, ब्लाक प्रमुख मनोज सिंह, राजबहादुर यादव, गौरी शंकर मिश्र, शक्ति प्रताप सिंह, जयशंकर मिश्र व माया सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहें।
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2009
तो क्या एक बार फिर चित्रकूट अपने पुराने वैभव को प्राप्त को प्राप्त करेगा या फिर अपनों के द्वारा ही छला जाता रहेगा। शायद अब तो यहां पर ऐसा होता ही दिखाई देता है। भारत के विशिष्टतम तीर्थों के साथ ही पर्यटन स्थलों पर अपनी जगह बना चुका चित्रकूट आज भी भौतिक सुखसुविधाओं के लिहाज से काफी पीछे है। शासन प्रशासन के द्वारा यहां के विकास के लिये बनाई गई करोडों की योजनायें या तो कागजों पर हैं या फिर अधिकारियों और नेताओं के द्वारा बंदरबांट कर डाली गई। ताजा प्रमाण उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में पर्यटन विभाग द्वारा करचाया जा रहा त्र
वाल्मीकि आश्रम के विकास का संतों ने लिया संकल्प
चित्रकूट। रामायणम् के रचयिता आदि कवि वाल्मीकि ने ही विश्व को श्री राम से परिचित कराने का काम किया था। इसके बाद ही संत तुलसीदास ने श्री राम को पूर्ण पुरुषोत्तम के रूप में श्री राम चरित मानस में प्रस्तुत कर उन्हें जन-जन का राम बना दिया।
यह बात महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विद्यालय में रविवार को वाल्मीकि जयंती पर आयोजित संत सम्मेलन में महंत दिव्य जीवनदास ने कही। उन्होंने कहा कि आदिकवि वाल्मीकि महान युगदृष्टा थे। महंत रामदुलारे दास ने कहा कि पदुम पुराण और अश्वमेघ यज्ञ पुराण में उल्लेख है कि वाल्मीकि आश्रम में श्रीराम के पुत्र लव ने अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को बांध लिया था। इसके पूर्व संत सम्मेलन में जुटे संत-महंतों ने लालापुर के वाल्मीकि आश्रम की उपेक्षा पर नाराजगी जतायी। निर्णय लिया गया कि चित्रकूट के सभी साधु संत वाल्मीकि आश्रम के विकास का प्रयास करेगे।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे आचार्य चंद्रदत्त पांडेय ने बताया कि सन् 1700 में औरंगजेब के कहर का शिकार लालापुर का मां आशांबरा देवी मंदिर व वाल्मीकि आश्रम भी हो गया था। इस मौके पर आश्रम के महंत कुटिलानंद, मानिकपुर नगर पंचायत अध्यक्ष नत्थू कोल, रामधाम आश्रम के रामकुमार दास, अवध बिहारी दास आदि मौजूद रहे।
यह बात महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विद्यालय में रविवार को वाल्मीकि जयंती पर आयोजित संत सम्मेलन में महंत दिव्य जीवनदास ने कही। उन्होंने कहा कि आदिकवि वाल्मीकि महान युगदृष्टा थे। महंत रामदुलारे दास ने कहा कि पदुम पुराण और अश्वमेघ यज्ञ पुराण में उल्लेख है कि वाल्मीकि आश्रम में श्रीराम के पुत्र लव ने अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को बांध लिया था। इसके पूर्व संत सम्मेलन में जुटे संत-महंतों ने लालापुर के वाल्मीकि आश्रम की उपेक्षा पर नाराजगी जतायी। निर्णय लिया गया कि चित्रकूट के सभी साधु संत वाल्मीकि आश्रम के विकास का प्रयास करेगे।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे आचार्य चंद्रदत्त पांडेय ने बताया कि सन् 1700 में औरंगजेब के कहर का शिकार लालापुर का मां आशांबरा देवी मंदिर व वाल्मीकि आश्रम भी हो गया था। इस मौके पर आश्रम के महंत कुटिलानंद, मानिकपुर नगर पंचायत अध्यक्ष नत्थू कोल, रामधाम आश्रम के रामकुमार दास, अवध बिहारी दास आदि मौजूद रहे।
फुहारों के बीच शुरू हुआ शरदोत्सव
चित्रकूट। पतित पावनी मंदाकिनी का किनारा और रिमझिम बरसते बादल। ऐसे सुहाने मौसम में शुरू हुये शरदोत्सव में कई प्रांतों से आये कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का रंग बिखेरा तो गोयनका घाट एक बार फिर रोशनाई में नहा गया।
मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत पद्मश्री नाना जी देशमुख का जन्म दिन पर की गई। शाम को राम नाथ गोयनका घाट के दूसरे किनारे पर बने खुले मंच पर शरदोत्सव के कार्यक्रमों की शुरूआत मप्र के संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के माध्यम से चित्रकूट की पवित्र भूमि में संस्कृति के सृजन व संरक्षण का काम किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध संत राजगुरू प्रपन्नाचार्य महाराज ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत से पहले मंदाकिनी की अर्चना के बाद नयनाभिराम गीतों व नृत्यों की श्रंखला प्रारंभ हुई। हल्की फुहारों के बीच नावों पर बैठकर लोगों नें बृज की होली और त्रिपुरारी के सुदर्शन चक्र के दृश्यों का लिया। हरियाणा का घूमर, मध्य प्रदेश का लोक नृत्य व उड़ीसा प्रांतों के डंडे में खड़े होकर नृत्य करने वाले कलाकारों को भी काफी सराहना मिली। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देर रात तक समा बांधा। उनके गाये हुये राम पहिरे फूलन का सेहरा, मनवा राम नाम गाये जा को बेहद पसंद किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम का आनंद लेने के लिये दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सतना सांसद गणेश सिंह, डीएम सतना सुखबीर सिंह, संस्कृति सचिव मध्य प्रदेश शासन मनोज श्रीवास्तव, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडे, विधायक ब्रजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ ही अन्य लोग मौजूद रहे।
इस मौके पर दीन दयाल शोध संस्थान की तरफ से पद्म श्री नाना जी देशमुख के जन्म दिन की खुशी में सभी का मुंह मीठा कराने का पूरा इंतजाम भी किया गया था। शरद पूर्णिमा के मौके पर आसमान से बरसने वाले अमृत के मद्देनजर यहां पर भी खीर को खिलाने का पूरा इंतजाम किया गया था।
मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत पद्मश्री नाना जी देशमुख का जन्म दिन पर की गई। शाम को राम नाथ गोयनका घाट के दूसरे किनारे पर बने खुले मंच पर शरदोत्सव के कार्यक्रमों की शुरूआत मप्र के संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के माध्यम से चित्रकूट की पवित्र भूमि में संस्कृति के सृजन व संरक्षण का काम किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध संत राजगुरू प्रपन्नाचार्य महाराज ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत से पहले मंदाकिनी की अर्चना के बाद नयनाभिराम गीतों व नृत्यों की श्रंखला प्रारंभ हुई। हल्की फुहारों के बीच नावों पर बैठकर लोगों नें बृज की होली और त्रिपुरारी के सुदर्शन चक्र के दृश्यों का लिया। हरियाणा का घूमर, मध्य प्रदेश का लोक नृत्य व उड़ीसा प्रांतों के डंडे में खड़े होकर नृत्य करने वाले कलाकारों को भी काफी सराहना मिली। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देर रात तक समा बांधा। उनके गाये हुये राम पहिरे फूलन का सेहरा, मनवा राम नाम गाये जा को बेहद पसंद किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम का आनंद लेने के लिये दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सतना सांसद गणेश सिंह, डीएम सतना सुखबीर सिंह, संस्कृति सचिव मध्य प्रदेश शासन मनोज श्रीवास्तव, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडे, विधायक ब्रजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ ही अन्य लोग मौजूद रहे।
इस मौके पर दीन दयाल शोध संस्थान की तरफ से पद्म श्री नाना जी देशमुख के जन्म दिन की खुशी में सभी का मुंह मीठा कराने का पूरा इंतजाम भी किया गया था। शरद पूर्णिमा के मौके पर आसमान से बरसने वाले अमृत के मद्देनजर यहां पर भी खीर को खिलाने का पूरा इंतजाम किया गया था।
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैजनिया
चित्रकूट। देश भर के विभिन्न प्रांतों से आये लोक कलाकारों के दलों की भावाभिराम प्रस्तुतियां शरदोत्सव की दूसरी शाम की गवाह बनीं। हजारों श्रोताओं ने मंत्रमुग्ध कर देने वाले कार्यक्रमों को खुले आसमान के नीचे बैठकर चांदनी में अपलक निहारा। वहीं मंदाकिनी की धवन जल राशि में पड़कर चांदनी के साथ ही बिजली के रिफ्लेक्टरों की रोशनी अप्रतिम आभा बिखेर रही थी।
कार्यक्रम की दूसरी शाम का प्रारंभ मप्र की उच्च शिक्षामंत्री अर्चना चिटनिस ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने शरदोत्सव के तीसरे आयोजन के अवसर को चित्रकूट में लगातार होने को प्रभु कामतानाथ की कृपा बताते हुए कहा कि यहां पर आने वाले श्रोता भी धन्य हैं। उन्होंने नाना जी देशमुख को ऋषि की उपमा देते हुए कहा कि 'स्नेह दान देकर सभी को अपनाया, अपने घर का धन जितना बने लुटाया।' उन्होंने कहा कि नाना जी जैसे लोग विरले ही होते हैं जो केंद्रीय मंत्री रहते हुए समाज सेवा के लिये अपने पद का त्याग कर दें। सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत गायक पवन तिवारी के भजन सुनो रे राम कहानी से हुई। मिनी अनूप जलोटा के नाम से जाने जाने वाले इस गायक ने ठुमक चलत राम चंद्र बाजत पैजनिया पर लोगों की वाहवाही बटोरी। हरियाणा से आये लोक कलाकारों ने घूमर नृत्य , उड़ीसा के कलाकारों ने चढै़या, मध्य प्रदेश के कलाकारों ने नैनागढ़ की लड़ाई की प्रस्तुतियों से शमा बांध दिया। रामायणी कुटी के महंत राम हृदय दास, दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, विधायक सुरेन्द्र गहरवार, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडेय सहित हजारो लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम की दूसरी शाम का प्रारंभ मप्र की उच्च शिक्षामंत्री अर्चना चिटनिस ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने शरदोत्सव के तीसरे आयोजन के अवसर को चित्रकूट में लगातार होने को प्रभु कामतानाथ की कृपा बताते हुए कहा कि यहां पर आने वाले श्रोता भी धन्य हैं। उन्होंने नाना जी देशमुख को ऋषि की उपमा देते हुए कहा कि 'स्नेह दान देकर सभी को अपनाया, अपने घर का धन जितना बने लुटाया।' उन्होंने कहा कि नाना जी जैसे लोग विरले ही होते हैं जो केंद्रीय मंत्री रहते हुए समाज सेवा के लिये अपने पद का त्याग कर दें। सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत गायक पवन तिवारी के भजन सुनो रे राम कहानी से हुई। मिनी अनूप जलोटा के नाम से जाने जाने वाले इस गायक ने ठुमक चलत राम चंद्र बाजत पैजनिया पर लोगों की वाहवाही बटोरी। हरियाणा से आये लोक कलाकारों ने घूमर नृत्य , उड़ीसा के कलाकारों ने चढै़या, मध्य प्रदेश के कलाकारों ने नैनागढ़ की लड़ाई की प्रस्तुतियों से शमा बांध दिया। रामायणी कुटी के महंत राम हृदय दास, दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, विधायक सुरेन्द्र गहरवार, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडेय सहित हजारो लोग मौजूद रहे।
रिमझिम बारिश में भी झूमते रहे लोग
चित्रकूट। शरदोत्सव की अंतिम शाम में पार्श्व गायक सुरेश वाडकर की आवाज का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। रिमझिम बारिश के बावजूद उनको सुनने के लिए ढाई घंटे तक हजारों लोग डटे रहे।
तीन दिवसीय शरदोत्सव के अंतिम दिन जब मशहूर पार्श्व गायक सुरेश वाडकर स्टेज पर आये तो लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। उन्होंने 'मैं हूं प्रेम रोगी' 'और इस दिल में क्या रखा है' 'लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है' 'राम तेरी गंगा मैली हो गयी' सुनाये तो लोग झूम उठे। इसके बाद इंडियन आइडल द्वितीय के सातवें फाइनलिस्ट रवि त्रिपाठी ने 'नैन लड़जइहैं तौ मनवा मां कसक होइबै करी' 'यम्मा यम्मा ये खूबसूरत शमा' व 'मुम्बई से आया मेरा दोस्त' गीत गाकर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। युवाओं के उत्साह को देखकर सुरेश वाडकर ने कहा उन्हें पता नही था कि गांवों में भी इतनी अच्छी प्रतिभाएं हैं। इनको डांस इंडिया डांस या बूगी-बूगी जैसे कार्यक्रमों में जाना चाहिए। उन्होंने स्टेज पर ही ग्रामोदय विवि के छात्र बिजेन्द्र को बुलाकर इनाम भी दिया। उन्होंने अपने दूसरे दौर की प्रस्तुतियों में पिछली बार के अपेक्षाकृत तेज बीट वाले नगमे सुनाये। 'भंवरे ने खिलाया फूल -फूल' 'सपने में मिलती है कुड़ी मेरी सपने में मिलती है' 'चप्पा-चप्पा चरखा चले' गीतों पर तो शाम अपने पूरे शबाब पर पहुंच गयी।
सुनने और सुनाने वाले दोनो भीगे
कार्यक्रम की प्रस्तुति की सबसे बड़ी बात तो यह रही कि शुरुआत में ही इंद्र देव ने अपना हल्का रूप दिखाया और स्टेज के बाहर का वातावरण हल्का गीला हो गया पर लोग सुरेश वाडेकर को सुनने के लिये डटे रहे। इस दौरान गायक ने बरसात से संबंधित गाने भी खूब गाये। लेकिन बरसात से संबंधित गाने बंद होने के बाद पानी तो बिलकुल बंद हो गया पर स्टेज के ऊपरी भाग में बरसात के पानी ने अपना रंग दिखाया। संगत कर रहे भोपाल से आये वादकों के साथ ही पार्श्व गायकों पर भी पानी के छींटे पड़े।
तीन दिवसीय शरदोत्सव के अंतिम दिन जब मशहूर पार्श्व गायक सुरेश वाडकर स्टेज पर आये तो लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। उन्होंने 'मैं हूं प्रेम रोगी' 'और इस दिल में क्या रखा है' 'लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है' 'राम तेरी गंगा मैली हो गयी' सुनाये तो लोग झूम उठे। इसके बाद इंडियन आइडल द्वितीय के सातवें फाइनलिस्ट रवि त्रिपाठी ने 'नैन लड़जइहैं तौ मनवा मां कसक होइबै करी' 'यम्मा यम्मा ये खूबसूरत शमा' व 'मुम्बई से आया मेरा दोस्त' गीत गाकर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। युवाओं के उत्साह को देखकर सुरेश वाडकर ने कहा उन्हें पता नही था कि गांवों में भी इतनी अच्छी प्रतिभाएं हैं। इनको डांस इंडिया डांस या बूगी-बूगी जैसे कार्यक्रमों में जाना चाहिए। उन्होंने स्टेज पर ही ग्रामोदय विवि के छात्र बिजेन्द्र को बुलाकर इनाम भी दिया। उन्होंने अपने दूसरे दौर की प्रस्तुतियों में पिछली बार के अपेक्षाकृत तेज बीट वाले नगमे सुनाये। 'भंवरे ने खिलाया फूल -फूल' 'सपने में मिलती है कुड़ी मेरी सपने में मिलती है' 'चप्पा-चप्पा चरखा चले' गीतों पर तो शाम अपने पूरे शबाब पर पहुंच गयी।
सुनने और सुनाने वाले दोनो भीगे
कार्यक्रम की प्रस्तुति की सबसे बड़ी बात तो यह रही कि शुरुआत में ही इंद्र देव ने अपना हल्का रूप दिखाया और स्टेज के बाहर का वातावरण हल्का गीला हो गया पर लोग सुरेश वाडेकर को सुनने के लिये डटे रहे। इस दौरान गायक ने बरसात से संबंधित गाने भी खूब गाये। लेकिन बरसात से संबंधित गाने बंद होने के बाद पानी तो बिलकुल बंद हो गया पर स्टेज के ऊपरी भाग में बरसात के पानी ने अपना रंग दिखाया। संगत कर रहे भोपाल से आये वादकों के साथ ही पार्श्व गायकों पर भी पानी के छींटे पड़े।
यहां राम की भक्ति में डूब जाते सभी : सुरेश वाडेकर
चित्रकूट। इस अनुपम तीर्थ स्थल की महिमा ही निराली है, यहां जो भी यहां आता है वह राम की भक्ति में डूब जाता है। यह विचार हैं जानेमाने पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर के। वह धर्मनगरी में चल रहे शरदोत्सव कार्यक्रम में आये थे।
उन्होंने कहा यह उनका दुर्भाग्य है कि वे अब तक चित्रकूट नही आये थे। कहा कि जल्द ही वे अपने पूरे परिवार के साथ यहां पर हफ्ते भर के लिए आयेंगे। उन्होंने इस पावन भूमि को विशिष्टता की श्रेणी में रखते हुए कहा कि जहां प्रभु राम के चरण पड़ें हो वह जगह तो अपने आप में ही विशेष हो जाती है। यहां पर प्रकृति ने अपना अनुपम सौंदर्य भी उड़ेल दिया है। उन्होंने अपने पहले गाये हुये गीत 'सोना करे झिलमिल' को दिल के करीब बताते हुए कहा कि वैसे तो उन्हें उनके गाये सभी गीत पसंद हैं। अपना सर्वाधिक पसंदीदा गीत 'सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है' को बताते हुए कहा कि भले ही इसमें शायरी दिखती है पर वास्तव में यह गीत जीवन की सच्चाई को बयान करता है। उन्होंने संगीत को आध्यात्म से जोड़ नये गायकों को संदेश देते हुए कहा कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं है। गुरु के चरणों पर बैठकर जो संगीत मिलता है वह आध्यात्मिक के साथ ही धार्मिक भी हो जाता है और गुरु के आर्शीवाद से ही सफलता की राह काफी आसान हो जाती है।
उन्होंने कहा यह उनका दुर्भाग्य है कि वे अब तक चित्रकूट नही आये थे। कहा कि जल्द ही वे अपने पूरे परिवार के साथ यहां पर हफ्ते भर के लिए आयेंगे। उन्होंने इस पावन भूमि को विशिष्टता की श्रेणी में रखते हुए कहा कि जहां प्रभु राम के चरण पड़ें हो वह जगह तो अपने आप में ही विशेष हो जाती है। यहां पर प्रकृति ने अपना अनुपम सौंदर्य भी उड़ेल दिया है। उन्होंने अपने पहले गाये हुये गीत 'सोना करे झिलमिल' को दिल के करीब बताते हुए कहा कि वैसे तो उन्हें उनके गाये सभी गीत पसंद हैं। अपना सर्वाधिक पसंदीदा गीत 'सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है' को बताते हुए कहा कि भले ही इसमें शायरी दिखती है पर वास्तव में यह गीत जीवन की सच्चाई को बयान करता है। उन्होंने संगीत को आध्यात्म से जोड़ नये गायकों को संदेश देते हुए कहा कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं है। गुरु के चरणों पर बैठकर जो संगीत मिलता है वह आध्यात्मिक के साथ ही धार्मिक भी हो जाता है और गुरु के आर्शीवाद से ही सफलता की राह काफी आसान हो जाती है।
रविवार, 4 अक्टूबर 2009
जीवन समर को पार करने का पढ़ा पाठ
Oct 04, 10:32 pmबताएं
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चित्रकूट। हिम्मत, साहस, बहादुरी, शील, संयम और कर्तव्य बोध, जी हां कुछ इसी तरह के इरादों के साथ ही सीतापुर के सेठ राधाकृष्ण पोद्धार इंटर कालेज के ग्राउंड पर 12 वीं जनपद स्तरीय स्काउट गाइड रैली के दूसरे दिन लगभग बाइस स्कूलों से आये छात्र व छात्रायें जीवन समर को अड़िगता से पार करने का पाठ पढ़ा।
जहां एक तरफ साहस के लिये आग के गोले से निकलने के लिये चुनौती थी वहीं संयम और कर्तव्यबोध का पाठ पढ़ाने का काम प्राथमिक चिकित्सा का था, वहीं रोगी को विपरीत परिस्थितियों में अस्पताल तक साइकिल पर स्ट्रेचर में लादकर ले जाने का काम चतुराई और हिम्मत का था।
रैली के दूसरे दिन तमाम प्रकार की बाधाओं को पार करने के लिये स्कूलों न छात्र व छात्राओं ने
जमकर पसीना बहाया। रैली के सचिव मइयादीन पटेल के साथ ही मुख्य संचालक हलधर इंटर कालेज कपना इटौरा के प्रधानाचार्य शंकर सिंह चंदेल सक्रियता के साथ लगे रहे। प्रतियोगिताओं का संचालन जिला ट्रेनिंग कमिश्नर मोहन लाल दीन व कु. माया सैनी कर रही थीं। लगभग 13 प्रकार की बाधाओं को पार कर उत्तीर्ण होने वाले छात्रों का निर्णय केके पांडेय, मनोरमा जैन, शिव चरण अनुरागी, जयराम राही, गायत्री अवस्थी, बाबू लाल सिंह, अब्दुल शकूर खां, श्याम लाल द्विवेदी, राम चंद्र याज्ञिक, प्रकाश चंद्र द्विवेदी, शैलेन्द्र सिंह, सुरेश चंद्र वर्मा, सुरेश चंद्र सिंह ने किया। रूट मार्च के प्रभारी चंद्र प्रकाश सोनी, ध्वज शिष्टाचार के सीताराम सोनी, कैंप फायर संतोष विश्वकर्मा,एडवेंचर के मोहन लाल दीन,तम्बू निर्माण सुरेश प्रसाद,प्रार्थना सभा नवल किशोर मिश्र, वीपी व्यायाम लाल मन भी कार्यक्रमों को संचालित करने में लगे रहे।
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चित्रकूट। हिम्मत, साहस, बहादुरी, शील, संयम और कर्तव्य बोध, जी हां कुछ इसी तरह के इरादों के साथ ही सीतापुर के सेठ राधाकृष्ण पोद्धार इंटर कालेज के ग्राउंड पर 12 वीं जनपद स्तरीय स्काउट गाइड रैली के दूसरे दिन लगभग बाइस स्कूलों से आये छात्र व छात्रायें जीवन समर को अड़िगता से पार करने का पाठ पढ़ा।
जहां एक तरफ साहस के लिये आग के गोले से निकलने के लिये चुनौती थी वहीं संयम और कर्तव्यबोध का पाठ पढ़ाने का काम प्राथमिक चिकित्सा का था, वहीं रोगी को विपरीत परिस्थितियों में अस्पताल तक साइकिल पर स्ट्रेचर में लादकर ले जाने का काम चतुराई और हिम्मत का था।
रैली के दूसरे दिन तमाम प्रकार की बाधाओं को पार करने के लिये स्कूलों न छात्र व छात्राओं ने
जमकर पसीना बहाया। रैली के सचिव मइयादीन पटेल के साथ ही मुख्य संचालक हलधर इंटर कालेज कपना इटौरा के प्रधानाचार्य शंकर सिंह चंदेल सक्रियता के साथ लगे रहे। प्रतियोगिताओं का संचालन जिला ट्रेनिंग कमिश्नर मोहन लाल दीन व कु. माया सैनी कर रही थीं। लगभग 13 प्रकार की बाधाओं को पार कर उत्तीर्ण होने वाले छात्रों का निर्णय केके पांडेय, मनोरमा जैन, शिव चरण अनुरागी, जयराम राही, गायत्री अवस्थी, बाबू लाल सिंह, अब्दुल शकूर खां, श्याम लाल द्विवेदी, राम चंद्र याज्ञिक, प्रकाश चंद्र द्विवेदी, शैलेन्द्र सिंह, सुरेश चंद्र वर्मा, सुरेश चंद्र सिंह ने किया। रूट मार्च के प्रभारी चंद्र प्रकाश सोनी, ध्वज शिष्टाचार के सीताराम सोनी, कैंप फायर संतोष विश्वकर्मा,एडवेंचर के मोहन लाल दीन,तम्बू निर्माण सुरेश प्रसाद,प्रार्थना सभा नवल किशोर मिश्र, वीपी व्यायाम लाल मन भी कार्यक्रमों को संचालित करने में लगे रहे।
फुहारों के बीच शुरू हुआ शरदोत्सव
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चित्रकूट। पतित पावनी मंदाकिनी का किनारा और रिमझिम बरसते बादल। ऐसे सुहाने मौसम में शुरू हुये शरदोत्सव में कई प्रांतों से आये कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का रंग बिखेरा तो गोयनका घाट एक बार फिर रोशनाई में नहा गया।
मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत पद्मश्री नाना जी देशमुख का जन्म दिन पर की गई। शाम को राम नाथ गोयनका घाट के दूसरे किनारे पर बने खुले मंच पर शरदोत्सव के कार्यक्रमों की शुरूआत मप्र के संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के माध्यम से चित्रकूट की पवित्र भूमि में संस्कृति के सृजन व संरक्षण का काम किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध संत राजगुरू प्रपन्नाचार्य महाराज ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत से पहले मंदाकिनी की अर्चना के बाद नयनाभिराम गीतों व नृत्यों की श्रंखला प्रारंभ हुई। हल्की फुहारों के बीच नावों पर बैठकर लोगों नें बृज की होली और त्रिपुरारी के सुदर्शन चक्र के दृश्यों का लिया। हरियाणा का घूमर, मध्य प्रदेश का लोक नृत्य व उड़ीसा प्रांतों के डंडे में खड़े होकर नृत्य करने वाले कलाकारों को भी काफी सराहना मिली। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देर रात तक समा बांधा। उनके गाये हुये राम पहिरे फूलन का सेहरा, मनवा राम नाम गाये जा को बेहद पसंद किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम का आनंद लेने के लिये दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सतना सांसद गणेश सिंह, डीएम सतना सुखबीर सिंह, संस्कृति सचिव मध्य प्रदेश शासन मनोज श्रीवास्तव, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडे, विधायक ब्रजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ ही अन्य लोग मौजूद रहे।
इस मौके पर दीन दयाल शोध संस्थान की तरफ से पद्म श्री नाना जी देशमुख के जन्म दिन की खुशी में सभी का मुंह मीठा कराने का पूरा इंतजाम भी किया गया था। शरद पूर्णिमा के मौके पर आसमान से बरसने वाले अमृत के मद्देनजर यहां पर भी खीर को खिलाने का पूरा इंतजाम किया गया था।
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चित्रकूट। पतित पावनी मंदाकिनी का किनारा और रिमझिम बरसते बादल। ऐसे सुहाने मौसम में शुरू हुये शरदोत्सव में कई प्रांतों से आये कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का रंग बिखेरा तो गोयनका घाट एक बार फिर रोशनाई में नहा गया।
मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत पद्मश्री नाना जी देशमुख का जन्म दिन पर की गई। शाम को राम नाथ गोयनका घाट के दूसरे किनारे पर बने खुले मंच पर शरदोत्सव के कार्यक्रमों की शुरूआत मप्र के संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के माध्यम से चित्रकूट की पवित्र भूमि में संस्कृति के सृजन व संरक्षण का काम किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध संत राजगुरू प्रपन्नाचार्य महाराज ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत से पहले मंदाकिनी की अर्चना के बाद नयनाभिराम गीतों व नृत्यों की श्रंखला प्रारंभ हुई। हल्की फुहारों के बीच नावों पर बैठकर लोगों नें बृज की होली और त्रिपुरारी के सुदर्शन चक्र के दृश्यों का लिया। हरियाणा का घूमर, मध्य प्रदेश का लोक नृत्य व उड़ीसा प्रांतों के डंडे में खड़े होकर नृत्य करने वाले कलाकारों को भी काफी सराहना मिली। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देर रात तक समा बांधा। उनके गाये हुये राम पहिरे फूलन का सेहरा, मनवा राम नाम गाये जा को बेहद पसंद किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम का आनंद लेने के लिये दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सतना सांसद गणेश सिंह, डीएम सतना सुखबीर सिंह, संस्कृति सचिव मध्य प्रदेश शासन मनोज श्रीवास्तव, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडे, विधायक ब्रजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ ही अन्य लोग मौजूद रहे।
इस मौके पर दीन दयाल शोध संस्थान की तरफ से पद्म श्री नाना जी देशमुख के जन्म दिन की खुशी में सभी का मुंह मीठा कराने का पूरा इंतजाम भी किया गया था। शरद पूर्णिमा के मौके पर आसमान से बरसने वाले अमृत के मद्देनजर यहां पर भी खीर को खिलाने का पूरा इंतजाम किया गया था।
फुहारों के बीच शुरू हुआ शरदोत्सव
Oct 04, 10:32 pmबताएं
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चित्रकूट। पतित पावनी मंदाकिनी का किनारा और रिमझिम बरसते बादल। ऐसे सुहाने मौसम में शुरू हुये शरदोत्सव में कई प्रांतों से आये कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का रंग बिखेरा तो गोयनका घाट एक बार फिर रोशनाई में नहा गया।
मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत पद्मश्री नाना जी देशमुख का जन्म दिन पर की गई। शाम को राम नाथ गोयनका घाट के दूसरे किनारे पर बने खुले मंच पर शरदोत्सव के कार्यक्रमों की शुरूआत मप्र के संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के माध्यम से चित्रकूट की पवित्र भूमि में संस्कृति के सृजन व संरक्षण का काम किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध संत राजगुरू प्रपन्नाचार्य महाराज ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत से पहले मंदाकिनी की अर्चना के बाद नयनाभिराम गीतों व नृत्यों की श्रंखला प्रारंभ हुई। हल्की फुहारों के बीच नावों पर बैठकर लोगों नें बृज की होली और त्रिपुरारी के सुदर्शन चक्र के दृश्यों का लिया। हरियाणा का घूमर, मध्य प्रदेश का लोक नृत्य व उड़ीसा प्रांतों के डंडे में खड़े होकर नृत्य करने वाले कलाकारों को भी काफी सराहना मिली। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देर रात तक समा बांधा। उनके गाये हुये राम पहिरे फूलन का सेहरा, मनवा राम नाम गाये जा को बेहद पसंद किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम का आनंद लेने के लिये दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सतना सांसद गणेश सिंह, डीएम सतना सुखबीर सिंह, संस्कृति सचिव मध्य प्रदेश शासन मनोज श्रीवास्तव, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडे, विधायक ब्रजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ ही अन्य लोग मौजूद रहे।
इस मौके पर दीन दयाल शोध संस्थान की तरफ से पद्म श्री नाना जी देशमुख के जन्म दिन की खुशी में सभी का मुंह मीठा कराने का पूरा इंतजाम भी किया गया था। शरद पूर्णिमा के मौके पर आसमान से बरसने वाले अमृत के मद्देनजर यहां पर भी खीर को खिलाने का पूरा इंतजाम किया गया था।
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चित्रकूट। पतित पावनी मंदाकिनी का किनारा और रिमझिम बरसते बादल। ऐसे सुहाने मौसम में शुरू हुये शरदोत्सव में कई प्रांतों से आये कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का रंग बिखेरा तो गोयनका घाट एक बार फिर रोशनाई में नहा गया।
मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत पद्मश्री नाना जी देशमुख का जन्म दिन पर की गई। शाम को राम नाथ गोयनका घाट के दूसरे किनारे पर बने खुले मंच पर शरदोत्सव के कार्यक्रमों की शुरूआत मप्र के संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के माध्यम से चित्रकूट की पवित्र भूमि में संस्कृति के सृजन व संरक्षण का काम किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध संत राजगुरू प्रपन्नाचार्य महाराज ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत से पहले मंदाकिनी की अर्चना के बाद नयनाभिराम गीतों व नृत्यों की श्रंखला प्रारंभ हुई। हल्की फुहारों के बीच नावों पर बैठकर लोगों नें बृज की होली और त्रिपुरारी के सुदर्शन चक्र के दृश्यों का लिया। हरियाणा का घूमर, मध्य प्रदेश का लोक नृत्य व उड़ीसा प्रांतों के डंडे में खड़े होकर नृत्य करने वाले कलाकारों को भी काफी सराहना मिली। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देर रात तक समा बांधा। उनके गाये हुये राम पहिरे फूलन का सेहरा, मनवा राम नाम गाये जा को बेहद पसंद किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम का आनंद लेने के लिये दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सतना सांसद गणेश सिंह, डीएम सतना सुखबीर सिंह, संस्कृति सचिव मध्य प्रदेश शासन मनोज श्रीवास्तव, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडे, विधायक ब्रजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ ही अन्य लोग मौजूद रहे।
इस मौके पर दीन दयाल शोध संस्थान की तरफ से पद्म श्री नाना जी देशमुख के जन्म दिन की खुशी में सभी का मुंह मीठा कराने का पूरा इंतजाम भी किया गया था। शरद पूर्णिमा के मौके पर आसमान से बरसने वाले अमृत के मद्देनजर यहां पर भी खीर को खिलाने का पूरा इंतजाम किया गया था।
अपनों से अपनी बात
क्या लिखूं किसको लिखू कुछ याद नही हां याद है तो सिर्फ इतना कि लिखना उनके लिये था जो अपने हैं वंचित हैं पर देखता हूं तो सबसे बडा वंचित और पराया इस जग में मैं स्वयं ही हो चला हूं जिंदगी जीने का सामान नही बल्कि केवल एक मशीन सी हो चली है सभी तरफ क्षद़म वेश धरी अपनी सत्ताओं का सुख भोग रहे हैं ध्रस्टताओं का नमन पर आवरन मंदिरों तक आ गय मैले चरन मन कहां तक मूंद कर रखे नयन वाला हाल चल रहा है आज का समय ऐसे ही चल रहा है
शनिवार, 3 अक्टूबर 2009
धवल चांदनी में अमृत के साथ चखा प्रसाद
चित्रकूट। शरद पूर्णिमा की रात यानी आसमान से अमृत बरसने की रात ! जी हां तीर्थ क्षेत्र में जहां एक तरफ हजारों लोगों ने आसमान से बरसे अमृत को चावल व साबूदाने से बनी खीर में समेटा वहीं काफी लोगों ने इस अमृत के साथ ही दमा और श्वांस की बीमारी की दवा का भी सेवन किया। लगभग साढ़े पांच किलोमीटर लम्बे परिक्रमा मार्ग के साथ तीर्थ क्षेत्र के अन्य स्थानों पर शनिवार की रात कामद बूटी का खुमार लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था।
सुबह से ही तीर्थ क्षेत्र में दमा स्वांस से पीडि़तों का आना प्रारंभ हो चला था। जिसे जो भी वाहन मिला वह भागता प्रमुख द्वार पहुंच गया। दोपहर से ही मिट्टी की हांड़ी, उपले व चावल व दूध के लिये लोग जुगाड़ लगाने लगे। खीर बनाने में लगने वाले समान का भाव इतना बढ़ा कि देर शाम तक एक लीटर दूध का भाव सौ रुपये लीटर के साथ उपले का भाव पांच रुपये प्रति नग तक हो गया। लोगों ने शाम से ही परिक्रमा मार्ग पर अपना डेरा जमा लिया। रात होने के बाद बाबा हीरा लाल उधौ प्रसाद शर्मा के वंशज पात्रों में दवा को लेकर निकले और बिना किसी का चेहरा देखे पत्तलों पर रखी गयी खुली खीर पर उसे डालते गये यह क्रम काफी देर तक चला। बाद में लोगों ने इसे खाया और फिर नहा धोकर परिक्रमा लगाने के बाद वापस लौट गये।
लगभग 130 वर्षो से दमा और स्वांस की दवा का शरद पूर्णिमा की रात में नि:शुल्क वितरण करने वाले चौथी पीढ़ी के रामेश्वर प्रसाद मिश्र बताते हैं कि यह तो एक प्राचीन संत की देन उनके परिवार को है। वर्ष में एक बार शरद पूर्णिमा को उनको यह दवा बांटने का सुअवसर मिलता है। यह उनका सौभाग्य है। बताया कि शरद पूर्णिमा पर यहां पर अपने देश के सभी प्रांतों के साथ ही नेपाल से भी मरीज आते हैं। आनंद मोहन मिश्र 'नंदू भैया' कहते हैं कि दमा और स्वांस का मर्ज ठंड के मौसम में अधिक होता है और उपलों के धुवें से इसका बैर है पर पुराने ऋषियों ने इसको उपले पर बनाये जाने वाली खीर को बनाते वक्त यहां पर उनको कोई दिक्कत नही होती यह श्री कामतानाथ नाथ स्वामी का ही प्रताप है। यहां के अलावा सीतापुर के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में भी दवा के बांटने का इंतजाम किया गया है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. एस एन पांडेय ने बताया कि अजुनत्व चूर्ण, पीपर और पाधर के साथ अरर मदार की जड़ से तैयार बूटी से लोगो की स्वांस और दमा की बीमारी दूर होती है। दवा को बांटने का एक और आयोजन राम घाट पर महात्मा औघड़ बाबा सेवा न्यास के कार्यकर्ताओं द्वारा भी किया गया।
सुबह से ही तीर्थ क्षेत्र में दमा स्वांस से पीडि़तों का आना प्रारंभ हो चला था। जिसे जो भी वाहन मिला वह भागता प्रमुख द्वार पहुंच गया। दोपहर से ही मिट्टी की हांड़ी, उपले व चावल व दूध के लिये लोग जुगाड़ लगाने लगे। खीर बनाने में लगने वाले समान का भाव इतना बढ़ा कि देर शाम तक एक लीटर दूध का भाव सौ रुपये लीटर के साथ उपले का भाव पांच रुपये प्रति नग तक हो गया। लोगों ने शाम से ही परिक्रमा मार्ग पर अपना डेरा जमा लिया। रात होने के बाद बाबा हीरा लाल उधौ प्रसाद शर्मा के वंशज पात्रों में दवा को लेकर निकले और बिना किसी का चेहरा देखे पत्तलों पर रखी गयी खुली खीर पर उसे डालते गये यह क्रम काफी देर तक चला। बाद में लोगों ने इसे खाया और फिर नहा धोकर परिक्रमा लगाने के बाद वापस लौट गये।
लगभग 130 वर्षो से दमा और स्वांस की दवा का शरद पूर्णिमा की रात में नि:शुल्क वितरण करने वाले चौथी पीढ़ी के रामेश्वर प्रसाद मिश्र बताते हैं कि यह तो एक प्राचीन संत की देन उनके परिवार को है। वर्ष में एक बार शरद पूर्णिमा को उनको यह दवा बांटने का सुअवसर मिलता है। यह उनका सौभाग्य है। बताया कि शरद पूर्णिमा पर यहां पर अपने देश के सभी प्रांतों के साथ ही नेपाल से भी मरीज आते हैं। आनंद मोहन मिश्र 'नंदू भैया' कहते हैं कि दमा और स्वांस का मर्ज ठंड के मौसम में अधिक होता है और उपलों के धुवें से इसका बैर है पर पुराने ऋषियों ने इसको उपले पर बनाये जाने वाली खीर को बनाते वक्त यहां पर उनको कोई दिक्कत नही होती यह श्री कामतानाथ नाथ स्वामी का ही प्रताप है। यहां के अलावा सीतापुर के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में भी दवा के बांटने का इंतजाम किया गया है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. एस एन पांडेय ने बताया कि अजुनत्व चूर्ण, पीपर और पाधर के साथ अरर मदार की जड़ से तैयार बूटी से लोगो की स्वांस और दमा की बीमारी दूर होती है। दवा को बांटने का एक और आयोजन राम घाट पर महात्मा औघड़ बाबा सेवा न्यास के कार्यकर्ताओं द्वारा भी किया गया।
शुक्रवार, 26 जून 2009
जीने की राह दिखाती धर्मनगरी : राजपाल
Jun 24, 02:45 am
चित्रकूट। फिल्मों में अपने अभिनय से धूम मचाने वाले राजपाल यादव का मानना है कि चित्रकूट जीवन जीने का प्रेरणा स्थल है। यहां पर स्वयं भगवान राम, मां जानकी और लक्ष्मण के साथ साढ़े ग्यारह साल तक रहे।
वैदिक आध्यात्म को आत्मसात करने में लगे फिल्म स्टार राजपाल यादव ने सोमवार शाम यहां उतरते ही सबसे पहले चित्रकूट की रज माथे पर लगायी। धर्मनगरी में आगामी आठ जुलाई से होने वाले यज्ञ के सिलसिले में यहां आये राजपाल यादव ने मंगलवार को रामायण मेला परिसर और रैन बसेरा में बन रहे विशाल पंडाल का निरीक्षण किया। वह डीएम हृदेश कुमार से मिले और संकल्प पूर्ति महोत्सव की तैयारियों व प्रशासन द्वारा दिये जाने वाले सहयोग के बाबत चर्चा की।
उप्र के ही शाहजहांपुर के छोटे से गांव कुंडरा के मूल निवासी राजपाल यादव ने एक विशेष भेंट में बताया कि उन्होंने लखनऊ की भारतेन्दु नाट्य अकादमी से डिप्लोमा लेने के बाद दिल्ली में भारतीय नाट्य संस्थान से डिग्री ली। उसके बाद मुम्बई का रुख किया। आम स्ट्रगलर की तरह ही उन्होंने भी वह सब किया जो दूसरे करते हैं, पर आत्म विश्वास के चलते उन्हें वर्ष 99 में 'जंगल' फिल्म मिली। जंगल के हिट होने के बाद तो फिल्मों की लाइन लग गयी।
चित्रकूट। फिल्मों में अपने अभिनय से धूम मचाने वाले राजपाल यादव का मानना है कि चित्रकूट जीवन जीने का प्रेरणा स्थल है। यहां पर स्वयं भगवान राम, मां जानकी और लक्ष्मण के साथ साढ़े ग्यारह साल तक रहे।
वैदिक आध्यात्म को आत्मसात करने में लगे फिल्म स्टार राजपाल यादव ने सोमवार शाम यहां उतरते ही सबसे पहले चित्रकूट की रज माथे पर लगायी। धर्मनगरी में आगामी आठ जुलाई से होने वाले यज्ञ के सिलसिले में यहां आये राजपाल यादव ने मंगलवार को रामायण मेला परिसर और रैन बसेरा में बन रहे विशाल पंडाल का निरीक्षण किया। वह डीएम हृदेश कुमार से मिले और संकल्प पूर्ति महोत्सव की तैयारियों व प्रशासन द्वारा दिये जाने वाले सहयोग के बाबत चर्चा की।
उप्र के ही शाहजहांपुर के छोटे से गांव कुंडरा के मूल निवासी राजपाल यादव ने एक विशेष भेंट में बताया कि उन्होंने लखनऊ की भारतेन्दु नाट्य अकादमी से डिप्लोमा लेने के बाद दिल्ली में भारतीय नाट्य संस्थान से डिग्री ली। उसके बाद मुम्बई का रुख किया। आम स्ट्रगलर की तरह ही उन्होंने भी वह सब किया जो दूसरे करते हैं, पर आत्म विश्वास के चलते उन्हें वर्ष 99 में 'जंगल' फिल्म मिली। जंगल के हिट होने के बाद तो फिल्मों की लाइन लग गयी।
मंगलवार, 23 जून 2009
तपती धूप पर भारी पड़ी आस्था
Jun 23, 11:37 am
चित्रकूट। उन्हें न तो तपती धूप में पैरों के जलने की चिंता है और न उनको इस बात की फिक्र कि वह कैसे अपने घर पहुंचेंगे। वह तो परिक्रमा लगा कामतानाथ के दर्शन को बढ़े चले जा रहे थे। भीषण गर्मी और कड़ी धूप अगर उनके मुंह से कोई शब्द निकल रहा था तो वह भगवान कामतानाथ का जयकारा।
सोमवती अमावस्या के चलते हजारों श्रद्धालुओं ने रविवार को ही तीर्थ क्षेत्र के इर्दगिर्द डेरा डाल दिया था। रात बारह बजते ही स्फटिक शिला परिसर से लेकर रामघाट तक मंदाकिनी के विभिन्न घाटों में स्नान करने वालों का मेला सा लग गया। स्नान करने के बाद मत्स्यगयेन्द्र नाथ का जलाभिषेक कर भक्तों का रेला कामतानाथ जी की ओर हो गया। देर रात शुरू हुई साढ़े पांच किलोमीटर के परिक्रमा पथ पर सोमवार की देर शाम तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी। लोग किसी प्रकार से अपनी परिक्रमा पूरी करने की जद्दोजहद में लगे थे। भज ले पार करइया का और भज ले पर्वत वाले के उद्घोष फिजाओं में गूंज रहे थे।
कई बार मची भगदड़
दोनो प्रदेशों के परिक्रमा पथ पर भारी भीड़ के कारण कई बार भगदड़ मची। सोमवार तड़के पांच बजे राम मुहल्ले के कामतानाथ प्रमुख द्वार पर भी भगदड़ हुई। प्रत्यक्षदर्शी सुरेन्द्र त्रिवेदी का कहना है इसमें घायल तो लगभग आधा दर्जन लोग हुए पर कम से कम तीन लोगों को बेहोशी की हालत में लादकर अस्पताल ले जाया गया। कुछ इसी तरह का हाल यूपी के क्षेत्र खोही में हुआ। यह हाल बरहा के हनुमान जी से लेकर श्री राम भरत मिलन के मंदिर तक बना रहा।
पानी की रही मारा-मारी
मध्य प्रदेश के क्षेत्र में तो पानी की सबसे ज्यादा किल्लत देखी गई। राम मुहल्ले के दुकानदार बड़ा भइया ने बताया कि अमावस्या के मौके पर ही बिजली काट दी गयी और नलों से पानी गायब है। पानी रविवार की रात से ही नही आया। बिजली के गायब होने से गिरहकटों की चांदी रही। यहां एक-एक डिब्बा बीस-बीस रुपये में बेचा गया। खोही के साथ ही अन्य काफी स्थानों पर लोग परिक्रमा कर रहे लोगों को पानी पिलाने का काम कर रहे थे। भागवत पीठ पर कथा आचार्य नवलेश दीक्षित खुद ही अपने लोगों के साथ पानी पिलाने के काम में जुटे दिखाई दिये। उन्होंने बताया कि रात से अभी तक वे लगभग छह ड्रम पानी लोगों को पिला चुके हैं। कर्वी से सीतापुर तक कई स्थानों पर तमाम स्वयंसेवी भी पानी पिलाते दिखायी दिये।
खूब हुई डग्गामारी
मेले में सफाई व्यवस्था चौकस दिखी। पालिका कर्वी व नगर पंचायत चित्रकूट के लोग जहां सफाई करने में लगे रहे वहीं डग्गामारों ने जमकर कमाई की। आठ सवारी से ज्यादा न बैठाने के आदेश का कहीं भी पालन होता नही दिखा। टेंपो, टैक्सी, टै्रक्टर, तांगे व रिक्शा के साथ जीपों व बसों में लोगों ने लटक-लटक कर यात्रा की। खोया पाया केंद्रों से लगातार बिछुड़ने वालों को मिलाने के लिए घोषणाएं हो रही थीं।
खूब बिके सड़े गले फल
वैसे तो अमावस्या के मौके पर लोग अपना खाना खुद ही बांध कर लाते हैं। फिर भी ग्वालियर से लेकर डभौरा और सतना से लेकर नरैनी तक के दुकानदार यहां पर चार-पांच दिनों पहले से आकर अपनी दुकानदारी के लिए डेरा जमा लेते हैं। बासी चाट पकौड़ी के साथ कटे हुए फल खूब बिकते दिखाई दिये।
श्रद्धालुओं ने जतायी नाराजगी
रोडवेज के अस्थायी बस स्टैंड को एक कार्यक्रम के कारण रैन बसेरा परिसर से शिफ्ट कर लगभग एक किलोमीटर दूर शिफ्ट कर देने पर बाहर से आये श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी थी। लोगों का कहना था कि भले ही भगवान के काम के लिए ऐसा किया जा रहा है पर वास्तव में दिक्कत तो लाखों लोगों को हुई ही।
चित्रकूट। उन्हें न तो तपती धूप में पैरों के जलने की चिंता है और न उनको इस बात की फिक्र कि वह कैसे अपने घर पहुंचेंगे। वह तो परिक्रमा लगा कामतानाथ के दर्शन को बढ़े चले जा रहे थे। भीषण गर्मी और कड़ी धूप अगर उनके मुंह से कोई शब्द निकल रहा था तो वह भगवान कामतानाथ का जयकारा।
सोमवती अमावस्या के चलते हजारों श्रद्धालुओं ने रविवार को ही तीर्थ क्षेत्र के इर्दगिर्द डेरा डाल दिया था। रात बारह बजते ही स्फटिक शिला परिसर से लेकर रामघाट तक मंदाकिनी के विभिन्न घाटों में स्नान करने वालों का मेला सा लग गया। स्नान करने के बाद मत्स्यगयेन्द्र नाथ का जलाभिषेक कर भक्तों का रेला कामतानाथ जी की ओर हो गया। देर रात शुरू हुई साढ़े पांच किलोमीटर के परिक्रमा पथ पर सोमवार की देर शाम तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी। लोग किसी प्रकार से अपनी परिक्रमा पूरी करने की जद्दोजहद में लगे थे। भज ले पार करइया का और भज ले पर्वत वाले के उद्घोष फिजाओं में गूंज रहे थे।
कई बार मची भगदड़
दोनो प्रदेशों के परिक्रमा पथ पर भारी भीड़ के कारण कई बार भगदड़ मची। सोमवार तड़के पांच बजे राम मुहल्ले के कामतानाथ प्रमुख द्वार पर भी भगदड़ हुई। प्रत्यक्षदर्शी सुरेन्द्र त्रिवेदी का कहना है इसमें घायल तो लगभग आधा दर्जन लोग हुए पर कम से कम तीन लोगों को बेहोशी की हालत में लादकर अस्पताल ले जाया गया। कुछ इसी तरह का हाल यूपी के क्षेत्र खोही में हुआ। यह हाल बरहा के हनुमान जी से लेकर श्री राम भरत मिलन के मंदिर तक बना रहा।
पानी की रही मारा-मारी
मध्य प्रदेश के क्षेत्र में तो पानी की सबसे ज्यादा किल्लत देखी गई। राम मुहल्ले के दुकानदार बड़ा भइया ने बताया कि अमावस्या के मौके पर ही बिजली काट दी गयी और नलों से पानी गायब है। पानी रविवार की रात से ही नही आया। बिजली के गायब होने से गिरहकटों की चांदी रही। यहां एक-एक डिब्बा बीस-बीस रुपये में बेचा गया। खोही के साथ ही अन्य काफी स्थानों पर लोग परिक्रमा कर रहे लोगों को पानी पिलाने का काम कर रहे थे। भागवत पीठ पर कथा आचार्य नवलेश दीक्षित खुद ही अपने लोगों के साथ पानी पिलाने के काम में जुटे दिखाई दिये। उन्होंने बताया कि रात से अभी तक वे लगभग छह ड्रम पानी लोगों को पिला चुके हैं। कर्वी से सीतापुर तक कई स्थानों पर तमाम स्वयंसेवी भी पानी पिलाते दिखायी दिये।
खूब हुई डग्गामारी
मेले में सफाई व्यवस्था चौकस दिखी। पालिका कर्वी व नगर पंचायत चित्रकूट के लोग जहां सफाई करने में लगे रहे वहीं डग्गामारों ने जमकर कमाई की। आठ सवारी से ज्यादा न बैठाने के आदेश का कहीं भी पालन होता नही दिखा। टेंपो, टैक्सी, टै्रक्टर, तांगे व रिक्शा के साथ जीपों व बसों में लोगों ने लटक-लटक कर यात्रा की। खोया पाया केंद्रों से लगातार बिछुड़ने वालों को मिलाने के लिए घोषणाएं हो रही थीं।
खूब बिके सड़े गले फल
वैसे तो अमावस्या के मौके पर लोग अपना खाना खुद ही बांध कर लाते हैं। फिर भी ग्वालियर से लेकर डभौरा और सतना से लेकर नरैनी तक के दुकानदार यहां पर चार-पांच दिनों पहले से आकर अपनी दुकानदारी के लिए डेरा जमा लेते हैं। बासी चाट पकौड़ी के साथ कटे हुए फल खूब बिकते दिखाई दिये।
श्रद्धालुओं ने जतायी नाराजगी
रोडवेज के अस्थायी बस स्टैंड को एक कार्यक्रम के कारण रैन बसेरा परिसर से शिफ्ट कर लगभग एक किलोमीटर दूर शिफ्ट कर देने पर बाहर से आये श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी थी। लोगों का कहना था कि भले ही भगवान के काम के लिए ऐसा किया जा रहा है पर वास्तव में दिक्कत तो लाखों लोगों को हुई ही।
सोमवार, 15 जून 2009
नटखट भगवान श्रीकृष्ण की लीला से श्रोता मंत्रमुग्ध
Jun 16, 02:18 am
चित्रकूट। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुनाकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गये। भगवान ने बचपन में नटखट पन दिखाकर संदेश दिया कि बालक अबोध होता है। अपनी मनमोहक हरकतों से दूसरों को परेशान करने में भगवान को मजा आता था।
सरैंया के बेलऊहां पुरवा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास चंदन दीक्षित ने गोकुल में श्रीकृष्ण द्वारा बाल्यावस्था में की गई माखनचोरी, शेषनाग कथा व गोर्वधन पर्वत धारण करने की कथा झांकी चित्रण सहित प्रस्तुत की। भक्ति रस में लीन श्रोताओं को भगवान श्रीकृष्ण के बाल चरित्र की कथाओं का चित्रण देखकर खूब आनंद आया। पूरा माहौल श्रीकृष्ण भक्तिमय हो गया था।
कथा व्यास ने कहा कि माता यशोद के सामने मासूम व बेकसूर बनने वाले श्रीकृष्ण बेहद नटखट थे। वे जानबूझकर मक्खन चोरी करके गोपियों व दोस्तों को फंसा देते थे। कभी गोपियों की मटकी में पत्थर मारकर भाग जाते थे। गोवर्धन पूजा व पर्वत धारण की कथा सुनाते हुये कहा कि जब ब्रजवासी इंद्र की पूजा करने जा रहे थे तक श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की तमाम खूबियां बताकर उसकी पूजा करने को कहा। बृजवासी पर्वत की पूजा करने लगे तो नाराज इंद्र के प्रकोप से बचने के लिये श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को एक अंगुली से उठाकर पूरे बृज को संकट से बचाया। पूरी कथा के दौरान भक्तगण श्रीकृष्ण भक्ति में लीन दिखे।
चित्रकूट। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुनाकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गये। भगवान ने बचपन में नटखट पन दिखाकर संदेश दिया कि बालक अबोध होता है। अपनी मनमोहक हरकतों से दूसरों को परेशान करने में भगवान को मजा आता था।
सरैंया के बेलऊहां पुरवा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास चंदन दीक्षित ने गोकुल में श्रीकृष्ण द्वारा बाल्यावस्था में की गई माखनचोरी, शेषनाग कथा व गोर्वधन पर्वत धारण करने की कथा झांकी चित्रण सहित प्रस्तुत की। भक्ति रस में लीन श्रोताओं को भगवान श्रीकृष्ण के बाल चरित्र की कथाओं का चित्रण देखकर खूब आनंद आया। पूरा माहौल श्रीकृष्ण भक्तिमय हो गया था।
कथा व्यास ने कहा कि माता यशोद के सामने मासूम व बेकसूर बनने वाले श्रीकृष्ण बेहद नटखट थे। वे जानबूझकर मक्खन चोरी करके गोपियों व दोस्तों को फंसा देते थे। कभी गोपियों की मटकी में पत्थर मारकर भाग जाते थे। गोवर्धन पूजा व पर्वत धारण की कथा सुनाते हुये कहा कि जब ब्रजवासी इंद्र की पूजा करने जा रहे थे तक श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की तमाम खूबियां बताकर उसकी पूजा करने को कहा। बृजवासी पर्वत की पूजा करने लगे तो नाराज इंद्र के प्रकोप से बचने के लिये श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को एक अंगुली से उठाकर पूरे बृज को संकट से बचाया। पूरी कथा के दौरान भक्तगण श्रीकृष्ण भक्ति में लीन दिखे।
संकल्प पूर्ति यज्ञ के लिए प्रशासन ने हाथ बंटाया
Jun 16, 02:18 am
चित्रकूट। तीर्थ क्षेत्र के रामायण मेला परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र में होने वाले पैंतालीसवें संकल्प पूर्ति महारुद्र यज्ञ के लिए जहां एक तरफ दद्दा शिष्य मंडल तैयारियां करने में रात दिन एक किये हुए हैं वहीं आज मौके पर जिलाधिकारी हृदेश कुमार भी अपनी पूरी प्रशासनिक टीम के साथ पहुंचकर आयोजकों के साथ बैठक कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यह आयोजन इस जिले में होने वाला विशेष है। इसके लिए सभी को टीम भावना के तहत काम करना है।
कार्यक्रम का प्रमुख रुप से काम काज देख रहे फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने प्रशासन की तरफ से मदद करने के लिए चौबीस घंटे बिजली, पानी और सफाई के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं के लिए कहा। जिलाधिकारी ने मौके पर ही पीडब्लू डी अधिशासी अधिकारी एके शर्मा को वीवीआईपी गेस्ट हाउस में बिजली दुरस्त करवाये जाने के साथ ही अधिशाषी अभियंता बिजली कमलेश कुमार को मेला प्रांगण में चौबीस घंटे बिजली के प्रवाह के लिये एमडी व चेयरमैन से बात कर सुचारु व्यवस्था के लिए कहा। एएसपी जुगुल किशोर को आने वाले सभी लोगों की सुरक्षा के लिए कहा।
चित्रकूट। तीर्थ क्षेत्र के रामायण मेला परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र में होने वाले पैंतालीसवें संकल्प पूर्ति महारुद्र यज्ञ के लिए जहां एक तरफ दद्दा शिष्य मंडल तैयारियां करने में रात दिन एक किये हुए हैं वहीं आज मौके पर जिलाधिकारी हृदेश कुमार भी अपनी पूरी प्रशासनिक टीम के साथ पहुंचकर आयोजकों के साथ बैठक कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यह आयोजन इस जिले में होने वाला विशेष है। इसके लिए सभी को टीम भावना के तहत काम करना है।
कार्यक्रम का प्रमुख रुप से काम काज देख रहे फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने प्रशासन की तरफ से मदद करने के लिए चौबीस घंटे बिजली, पानी और सफाई के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं के लिए कहा। जिलाधिकारी ने मौके पर ही पीडब्लू डी अधिशासी अधिकारी एके शर्मा को वीवीआईपी गेस्ट हाउस में बिजली दुरस्त करवाये जाने के साथ ही अधिशाषी अभियंता बिजली कमलेश कुमार को मेला प्रांगण में चौबीस घंटे बिजली के प्रवाह के लिये एमडी व चेयरमैन से बात कर सुचारु व्यवस्था के लिए कहा। एएसपी जुगुल किशोर को आने वाले सभी लोगों की सुरक्षा के लिए कहा।
पर्यटनस्थल नहीं तपोभूमि है धर्मनगरी : आशुतोष राणा
Jun 16, 02:18 am
चित्रकूट। 'मैं चित्रकूट से काफी कुछ लेने आया हूं' यहां की आबोहवा में वह तासीर है जो व्यक्ति का सम्पूर्ण व्यक्तित्व बदल देती है। यहां आकर हर व्यक्ति राममय हो जाता है। इस मिट्टी में वह क्षमता है कि जिसने प्रभु राम को साढ़े ग्यारह साल तक बांध कर रखा। यह बात सोमवार को यहां फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि चित्रकूट में मेरी नजर में पर्यटन स्थल नहीं बल्कि तपोस्थली है और मै भी इस तपस्थल पर थोड़ा तप कर अपने आपको धन्य करने आया हूं।
आगामी आठ जुलाई से होने वाले यज्ञ की व्यवस्थाओं के बारे में जायजा लेने आये आशुतोष राणा ने कहा कि यहां पर नौ दिनों तक लगभग ढाई लाख लोग निवास करेंगे। प्रतिदिन लगभग साठ लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जायेगा।
चित्रकूट। 'मैं चित्रकूट से काफी कुछ लेने आया हूं' यहां की आबोहवा में वह तासीर है जो व्यक्ति का सम्पूर्ण व्यक्तित्व बदल देती है। यहां आकर हर व्यक्ति राममय हो जाता है। इस मिट्टी में वह क्षमता है कि जिसने प्रभु राम को साढ़े ग्यारह साल तक बांध कर रखा। यह बात सोमवार को यहां फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि चित्रकूट में मेरी नजर में पर्यटन स्थल नहीं बल्कि तपोस्थली है और मै भी इस तपस्थल पर थोड़ा तप कर अपने आपको धन्य करने आया हूं।
आगामी आठ जुलाई से होने वाले यज्ञ की व्यवस्थाओं के बारे में जायजा लेने आये आशुतोष राणा ने कहा कि यहां पर नौ दिनों तक लगभग ढाई लाख लोग निवास करेंगे। प्रतिदिन लगभग साठ लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जायेगा।
संकट में भक्त की मदद को आते हैं भगवान
Jun 15, 02:03 am
चित्रकूट। संकट के समय भक्त की मदद को भगवान दौड़े चले आते हैं, किंतु इसके लिये भक्त को धैर्य व भक्ति पर भरोसा रखना चाहिये।
यह बात आचार्य चंदन दीक्षित ने सरैंया गांव के बेलौंहन पुरवा में चल रही कथा के चौथे दिन कही। उन्होंने श्रीराम जन्म का मार्मिक चित्रण करते हुये कहा कि श्रीराम का जन्म त्रेतायुग में हुआ था। उन्होंने असुरों के आतंक से मुक्ति दिलाकर समाज में आदर्श, अनुशासन व समर्पण प्रस्तुत किया गया, जबकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ। उन्होंने भी अपनी विचित्र लीलाओं से दुष्टों का संहार किया।
कथा व्यास ने भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण के जन्म की कथा के दौरान अलग-अलग माहौल बनाने का प्रयास किया। कभी अयोध्या तो कभी गोकुल के दृश्यों का वर्णन सुन भक्तगण श्रद्धा से ताली बजाकर कभी रामधुन तो कभी श्रीकृष्ण धुन गाते रहे।
इसके बाद कथाव्यास ने गज मोक्ष की कथा में बताया कि नहाने गये गजराज को जब मगरमच्छ ने पकड़ लिया तो भगवान विष्णु को उसने मदद के लिये पुकारा तो भगवान ने स्वयं जाकर उसे बचाया।
चित्रकूट। संकट के समय भक्त की मदद को भगवान दौड़े चले आते हैं, किंतु इसके लिये भक्त को धैर्य व भक्ति पर भरोसा रखना चाहिये।
यह बात आचार्य चंदन दीक्षित ने सरैंया गांव के बेलौंहन पुरवा में चल रही कथा के चौथे दिन कही। उन्होंने श्रीराम जन्म का मार्मिक चित्रण करते हुये कहा कि श्रीराम का जन्म त्रेतायुग में हुआ था। उन्होंने असुरों के आतंक से मुक्ति दिलाकर समाज में आदर्श, अनुशासन व समर्पण प्रस्तुत किया गया, जबकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ। उन्होंने भी अपनी विचित्र लीलाओं से दुष्टों का संहार किया।
कथा व्यास ने भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण के जन्म की कथा के दौरान अलग-अलग माहौल बनाने का प्रयास किया। कभी अयोध्या तो कभी गोकुल के दृश्यों का वर्णन सुन भक्तगण श्रद्धा से ताली बजाकर कभी रामधुन तो कभी श्रीकृष्ण धुन गाते रहे।
इसके बाद कथाव्यास ने गज मोक्ष की कथा में बताया कि नहाने गये गजराज को जब मगरमच्छ ने पकड़ लिया तो भगवान विष्णु को उसने मदद के लिये पुकारा तो भगवान ने स्वयं जाकर उसे बचाया।
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