अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

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सोमवार, 15 जून 2009

संकट में भक्त की मदद को आते हैं भगवान

Jun 15, 02:03 am
चित्रकूट। संकट के समय भक्त की मदद को भगवान दौड़े चले आते हैं, किंतु इसके लिये भक्त को धैर्य व भक्ति पर भरोसा रखना चाहिये।
यह बात आचार्य चंदन दीक्षित ने सरैंया गांव के बेलौंहन पुरवा में चल रही कथा के चौथे दिन कही। उन्होंने श्रीराम जन्म का मार्मिक चित्रण करते हुये कहा कि श्रीराम का जन्म त्रेतायुग में हुआ था। उन्होंने असुरों के आतंक से मुक्ति दिलाकर समाज में आदर्श, अनुशासन व समर्पण प्रस्तुत किया गया, जबकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ। उन्होंने भी अपनी विचित्र लीलाओं से दुष्टों का संहार किया।
कथा व्यास ने भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण के जन्म की कथा के दौरान अलग-अलग माहौल बनाने का प्रयास किया। कभी अयोध्या तो कभी गोकुल के दृश्यों का वर्णन सुन भक्तगण श्रद्धा से ताली बजाकर कभी रामधुन तो कभी श्रीकृष्ण धुन गाते रहे।
इसके बाद कथाव्यास ने गज मोक्ष की कथा में बताया कि नहाने गये गजराज को जब मगरमच्छ ने पकड़ लिया तो भगवान विष्णु को उसने मदद के लिये पुकारा तो भगवान ने स्वयं जाकर उसे बचाया।