Jun 23, 11:37 am
चित्रकूट। उन्हें न तो तपती धूप में पैरों के जलने की चिंता है और न उनको इस बात की फिक्र कि वह कैसे अपने घर पहुंचेंगे। वह तो परिक्रमा लगा कामतानाथ के दर्शन को बढ़े चले जा रहे थे। भीषण गर्मी और कड़ी धूप अगर उनके मुंह से कोई शब्द निकल रहा था तो वह भगवान कामतानाथ का जयकारा।
सोमवती अमावस्या के चलते हजारों श्रद्धालुओं ने रविवार को ही तीर्थ क्षेत्र के इर्दगिर्द डेरा डाल दिया था। रात बारह बजते ही स्फटिक शिला परिसर से लेकर रामघाट तक मंदाकिनी के विभिन्न घाटों में स्नान करने वालों का मेला सा लग गया। स्नान करने के बाद मत्स्यगयेन्द्र नाथ का जलाभिषेक कर भक्तों का रेला कामतानाथ जी की ओर हो गया। देर रात शुरू हुई साढ़े पांच किलोमीटर के परिक्रमा पथ पर सोमवार की देर शाम तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी। लोग किसी प्रकार से अपनी परिक्रमा पूरी करने की जद्दोजहद में लगे थे। भज ले पार करइया का और भज ले पर्वत वाले के उद्घोष फिजाओं में गूंज रहे थे।
कई बार मची भगदड़
दोनो प्रदेशों के परिक्रमा पथ पर भारी भीड़ के कारण कई बार भगदड़ मची। सोमवार तड़के पांच बजे राम मुहल्ले के कामतानाथ प्रमुख द्वार पर भी भगदड़ हुई। प्रत्यक्षदर्शी सुरेन्द्र त्रिवेदी का कहना है इसमें घायल तो लगभग आधा दर्जन लोग हुए पर कम से कम तीन लोगों को बेहोशी की हालत में लादकर अस्पताल ले जाया गया। कुछ इसी तरह का हाल यूपी के क्षेत्र खोही में हुआ। यह हाल बरहा के हनुमान जी से लेकर श्री राम भरत मिलन के मंदिर तक बना रहा।
पानी की रही मारा-मारी
मध्य प्रदेश के क्षेत्र में तो पानी की सबसे ज्यादा किल्लत देखी गई। राम मुहल्ले के दुकानदार बड़ा भइया ने बताया कि अमावस्या के मौके पर ही बिजली काट दी गयी और नलों से पानी गायब है। पानी रविवार की रात से ही नही आया। बिजली के गायब होने से गिरहकटों की चांदी रही। यहां एक-एक डिब्बा बीस-बीस रुपये में बेचा गया। खोही के साथ ही अन्य काफी स्थानों पर लोग परिक्रमा कर रहे लोगों को पानी पिलाने का काम कर रहे थे। भागवत पीठ पर कथा आचार्य नवलेश दीक्षित खुद ही अपने लोगों के साथ पानी पिलाने के काम में जुटे दिखाई दिये। उन्होंने बताया कि रात से अभी तक वे लगभग छह ड्रम पानी लोगों को पिला चुके हैं। कर्वी से सीतापुर तक कई स्थानों पर तमाम स्वयंसेवी भी पानी पिलाते दिखायी दिये।
खूब हुई डग्गामारी
मेले में सफाई व्यवस्था चौकस दिखी। पालिका कर्वी व नगर पंचायत चित्रकूट के लोग जहां सफाई करने में लगे रहे वहीं डग्गामारों ने जमकर कमाई की। आठ सवारी से ज्यादा न बैठाने के आदेश का कहीं भी पालन होता नही दिखा। टेंपो, टैक्सी, टै्रक्टर, तांगे व रिक्शा के साथ जीपों व बसों में लोगों ने लटक-लटक कर यात्रा की। खोया पाया केंद्रों से लगातार बिछुड़ने वालों को मिलाने के लिए घोषणाएं हो रही थीं।
खूब बिके सड़े गले फल
वैसे तो अमावस्या के मौके पर लोग अपना खाना खुद ही बांध कर लाते हैं। फिर भी ग्वालियर से लेकर डभौरा और सतना से लेकर नरैनी तक के दुकानदार यहां पर चार-पांच दिनों पहले से आकर अपनी दुकानदारी के लिए डेरा जमा लेते हैं। बासी चाट पकौड़ी के साथ कटे हुए फल खूब बिकते दिखाई दिये।
श्रद्धालुओं ने जतायी नाराजगी
रोडवेज के अस्थायी बस स्टैंड को एक कार्यक्रम के कारण रैन बसेरा परिसर से शिफ्ट कर लगभग एक किलोमीटर दूर शिफ्ट कर देने पर बाहर से आये श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी थी। लोगों का कहना था कि भले ही भगवान के काम के लिए ऐसा किया जा रहा है पर वास्तव में दिक्कत तो लाखों लोगों को हुई ही।
रैन बसेरा परिसर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रैन बसेरा परिसर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, 23 जून 2009
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
