मंगलवार, 6 अक्टूबर 2009
तो क्या एक बार फिर चित्रकूट अपने पुराने वैभव को प्राप्त को प्राप्त करेगा या फिर अपनों के द्वारा ही छला जाता रहेगा। शायद अब तो यहां पर ऐसा होता ही दिखाई देता है। भारत के विशिष्टतम तीर्थों के साथ ही पर्यटन स्थलों पर अपनी जगह बना चुका चित्रकूट आज भी भौतिक सुखसुविधाओं के लिहाज से काफी पीछे है। शासन प्रशासन के द्वारा यहां के विकास के लिये बनाई गई करोडों की योजनायें या तो कागजों पर हैं या फिर अधिकारियों और नेताओं के द्वारा बंदरबांट कर डाली गई। ताजा प्रमाण उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में पर्यटन विभाग द्वारा करचाया जा रहा त्र
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