Oct 04, 10:32 pmबताएं
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चित्रकूट। पतित पावनी मंदाकिनी का किनारा और रिमझिम बरसते बादल। ऐसे सुहाने मौसम में शुरू हुये शरदोत्सव में कई प्रांतों से आये कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का रंग बिखेरा तो गोयनका घाट एक बार फिर रोशनाई में नहा गया।
मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत पद्मश्री नाना जी देशमुख का जन्म दिन पर की गई। शाम को राम नाथ गोयनका घाट के दूसरे किनारे पर बने खुले मंच पर शरदोत्सव के कार्यक्रमों की शुरूआत मप्र के संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के माध्यम से चित्रकूट की पवित्र भूमि में संस्कृति के सृजन व संरक्षण का काम किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध संत राजगुरू प्रपन्नाचार्य महाराज ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत से पहले मंदाकिनी की अर्चना के बाद नयनाभिराम गीतों व नृत्यों की श्रंखला प्रारंभ हुई। हल्की फुहारों के बीच नावों पर बैठकर लोगों नें बृज की होली और त्रिपुरारी के सुदर्शन चक्र के दृश्यों का लिया। हरियाणा का घूमर, मध्य प्रदेश का लोक नृत्य व उड़ीसा प्रांतों के डंडे में खड़े होकर नृत्य करने वाले कलाकारों को भी काफी सराहना मिली। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देर रात तक समा बांधा। उनके गाये हुये राम पहिरे फूलन का सेहरा, मनवा राम नाम गाये जा को बेहद पसंद किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम का आनंद लेने के लिये दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सतना सांसद गणेश सिंह, डीएम सतना सुखबीर सिंह, संस्कृति सचिव मध्य प्रदेश शासन मनोज श्रीवास्तव, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडे, विधायक ब्रजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ ही अन्य लोग मौजूद रहे।
इस मौके पर दीन दयाल शोध संस्थान की तरफ से पद्म श्री नाना जी देशमुख के जन्म दिन की खुशी में सभी का मुंह मीठा कराने का पूरा इंतजाम भी किया गया था। शरद पूर्णिमा के मौके पर आसमान से बरसने वाले अमृत के मद्देनजर यहां पर भी खीर को खिलाने का पूरा इंतजाम किया गया था।
रविवार, 4 अक्टूबर 2009
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