अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

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शनिवार, 3 अक्टूबर 2009

धवल चांदनी में अमृत के साथ चखा प्रसाद

चित्रकूट। शरद पूर्णिमा की रात यानी आसमान से अमृत बरसने की रात ! जी हां तीर्थ क्षेत्र में जहां एक तरफ हजारों लोगों ने आसमान से बरसे अमृत को चावल व साबूदाने से बनी खीर में समेटा वहीं काफी लोगों ने इस अमृत के साथ ही दमा और श्वांस की बीमारी की दवा का भी सेवन किया। लगभग साढ़े पांच किलोमीटर लम्बे परिक्रमा मार्ग के साथ तीर्थ क्षेत्र के अन्य स्थानों पर शनिवार की रात कामद बूटी का खुमार लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था।
सुबह से ही तीर्थ क्षेत्र में दमा स्वांस से पीडि़तों का आना प्रारंभ हो चला था। जिसे जो भी वाहन मिला वह भागता प्रमुख द्वार पहुंच गया। दोपहर से ही मिट्टी की हांड़ी, उपले व चावल व दूध के लिये लोग जुगाड़ लगाने लगे। खीर बनाने में लगने वाले समान का भाव इतना बढ़ा कि देर शाम तक एक लीटर दूध का भाव सौ रुपये लीटर के साथ उपले का भाव पांच रुपये प्रति नग तक हो गया। लोगों ने शाम से ही परिक्रमा मार्ग पर अपना डेरा जमा लिया। रात होने के बाद बाबा हीरा लाल उधौ प्रसाद शर्मा के वंशज पात्रों में दवा को लेकर निकले और बिना किसी का चेहरा देखे पत्तलों पर रखी गयी खुली खीर पर उसे डालते गये यह क्रम काफी देर तक चला। बाद में लोगों ने इसे खाया और फिर नहा धोकर परिक्रमा लगाने के बाद वापस लौट गये।
लगभग 130 वर्षो से दमा और स्वांस की दवा का शरद पूर्णिमा की रात में नि:शुल्क वितरण करने वाले चौथी पीढ़ी के रामेश्वर प्रसाद मिश्र बताते हैं कि यह तो एक प्राचीन संत की देन उनके परिवार को है। वर्ष में एक बार शरद पूर्णिमा को उनको यह दवा बांटने का सुअवसर मिलता है। यह उनका सौभाग्य है। बताया कि शरद पूर्णिमा पर यहां पर अपने देश के सभी प्रांतों के साथ ही नेपाल से भी मरीज आते हैं। आनंद मोहन मिश्र 'नंदू भैया' कहते हैं कि दमा और स्वांस का मर्ज ठंड के मौसम में अधिक होता है और उपलों के धुवें से इसका बैर है पर पुराने ऋषियों ने इसको उपले पर बनाये जाने वाली खीर को बनाते वक्त यहां पर उनको कोई दिक्कत नही होती यह श्री कामतानाथ नाथ स्वामी का ही प्रताप है। यहां के अलावा सीतापुर के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में भी दवा के बांटने का इंतजाम किया गया है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. एस एन पांडेय ने बताया कि अजुनत्व चूर्ण, पीपर और पाधर के साथ अरर मदार की जड़ से तैयार बूटी से लोगो की स्वांस और दमा की बीमारी दूर होती है। दवा को बांटने का एक और आयोजन राम घाट पर महात्मा औघड़ बाबा सेवा न्यास के कार्यकर्ताओं द्वारा भी किया गया।

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