चित्रकूट। इस अनुपम तीर्थ स्थल की महिमा ही निराली है, यहां जो भी यहां आता है वह राम की भक्ति में डूब जाता है। यह विचार हैं जानेमाने पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर के। वह धर्मनगरी में चल रहे शरदोत्सव कार्यक्रम में आये थे।
उन्होंने कहा यह उनका दुर्भाग्य है कि वे अब तक चित्रकूट नही आये थे। कहा कि जल्द ही वे अपने पूरे परिवार के साथ यहां पर हफ्ते भर के लिए आयेंगे। उन्होंने इस पावन भूमि को विशिष्टता की श्रेणी में रखते हुए कहा कि जहां प्रभु राम के चरण पड़ें हो वह जगह तो अपने आप में ही विशेष हो जाती है। यहां पर प्रकृति ने अपना अनुपम सौंदर्य भी उड़ेल दिया है। उन्होंने अपने पहले गाये हुये गीत 'सोना करे झिलमिल' को दिल के करीब बताते हुए कहा कि वैसे तो उन्हें उनके गाये सभी गीत पसंद हैं। अपना सर्वाधिक पसंदीदा गीत 'सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है' को बताते हुए कहा कि भले ही इसमें शायरी दिखती है पर वास्तव में यह गीत जीवन की सच्चाई को बयान करता है। उन्होंने संगीत को आध्यात्म से जोड़ नये गायकों को संदेश देते हुए कहा कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं है। गुरु के चरणों पर बैठकर जो संगीत मिलता है वह आध्यात्मिक के साथ ही धार्मिक भी हो जाता है और गुरु के आर्शीवाद से ही सफलता की राह काफी आसान हो जाती है।
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2009
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