Jun 16, 02:18 am
चित्रकूट। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुनाकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गये। भगवान ने बचपन में नटखट पन दिखाकर संदेश दिया कि बालक अबोध होता है। अपनी मनमोहक हरकतों से दूसरों को परेशान करने में भगवान को मजा आता था।
सरैंया के बेलऊहां पुरवा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास चंदन दीक्षित ने गोकुल में श्रीकृष्ण द्वारा बाल्यावस्था में की गई माखनचोरी, शेषनाग कथा व गोर्वधन पर्वत धारण करने की कथा झांकी चित्रण सहित प्रस्तुत की। भक्ति रस में लीन श्रोताओं को भगवान श्रीकृष्ण के बाल चरित्र की कथाओं का चित्रण देखकर खूब आनंद आया। पूरा माहौल श्रीकृष्ण भक्तिमय हो गया था।
कथा व्यास ने कहा कि माता यशोद के सामने मासूम व बेकसूर बनने वाले श्रीकृष्ण बेहद नटखट थे। वे जानबूझकर मक्खन चोरी करके गोपियों व दोस्तों को फंसा देते थे। कभी गोपियों की मटकी में पत्थर मारकर भाग जाते थे। गोवर्धन पूजा व पर्वत धारण की कथा सुनाते हुये कहा कि जब ब्रजवासी इंद्र की पूजा करने जा रहे थे तक श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की तमाम खूबियां बताकर उसकी पूजा करने को कहा। बृजवासी पर्वत की पूजा करने लगे तो नाराज इंद्र के प्रकोप से बचने के लिये श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को एक अंगुली से उठाकर पूरे बृज को संकट से बचाया। पूरी कथा के दौरान भक्तगण श्रीकृष्ण भक्ति में लीन दिखे।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें