अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

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सोमवार, 15 जून 2009

पर्यटनस्थल नहीं तपोभूमि है धर्मनगरी : आशुतोष राणा

Jun 16, 02:18 am
चित्रकूट। 'मैं चित्रकूट से काफी कुछ लेने आया हूं' यहां की आबोहवा में वह तासीर है जो व्यक्ति का सम्पूर्ण व्यक्तित्व बदल देती है। यहां आकर हर व्यक्ति राममय हो जाता है। इस मिट्टी में वह क्षमता है कि जिसने प्रभु राम को साढ़े ग्यारह साल तक बांध कर रखा। यह बात सोमवार को यहां फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि चित्रकूट में मेरी नजर में पर्यटन स्थल नहीं बल्कि तपोस्थली है और मै भी इस तपस्थल पर थोड़ा तप कर अपने आपको धन्य करने आया हूं।
आगामी आठ जुलाई से होने वाले यज्ञ की व्यवस्थाओं के बारे में जायजा लेने आये आशुतोष राणा ने कहा कि यहां पर नौ दिनों तक लगभग ढाई लाख लोग निवास करेंगे। प्रतिदिन लगभग साठ लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जायेगा।

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