अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

रविवार, 1 नवंबर 2009

जो सही श्रोता नहीं वह वक्ता नहीं: आचार्य नवलेश

चित्रकूट। दीपावली की अमावस्या को प्रभु श्रीराम, जानकी और भाई लक्ष्मण के साथ कामता नाथ स्वामी की परिक्रमा करते हैं, इस दिन यहां दीपदान करने वाले का जीवन धन्य हो जाता है।

यह उद्गार कथावक्ता आचार्य नवलेश दीक्षित ने मुख्यालय में बस स्टैंड के समीप जय शंकर मिश्र के आवास पर चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि वक्ता से ज्यादा बुद्धिमान श्रोता को होना चाहिये। वास्तव में जो सही श्रोता नहीं बन सकता वह वक्ता बन नहीं सकता। कहा कि किसी की रोटी छीनना महापाप है। किसी को रुलाने का प्रयास किया तो उससे दो गुना खुद ही रोना होगा। अगर हमारे हाथ से किसी का किंचित मात्र भी भला हो तो यही सबसे बड़ा भाग्य होगा।

उन्होंने कहा कि सुदामा की सबसे बड़ी विशेषता उनके संतोष रूपी धन की है। जाति की पूजा नहीं अपितु गुणों की पूजा होती है। संस्कृति के हिसाब से सुदामा ब्राह्मण होने के साथ ही गुणी भी थे। तभी तो श्री कृष्ण खुद ही सुदामा जी की दशा देखकर रोये और अपने नयनों के जल से उनके पैरों को धोया।

कथावाचक ने कहा कि दीपावली की रात तीर्थ क्षेत्र के श्री कामतानाथ मंदिर के आसपास दीपदान करने का विशेष महत्व है। यहां दीपदान करने से जीवन में प्रकाश छा जाता है व जीवन उल्लासमय हो जाता है।

कथा के अंतिम दिन कथा को सुनने के लिये सांसद आर के पटेल, ब्लाक प्रमुख मनोज सिंह, राजबहादुर यादव, गौरी शंकर मिश्र, शक्ति प्रताप सिंह, जयशंकर मिश्र व माया सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहें।

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2009

तो क्‍या एक बार फिर चित्रकूट अपने पुराने वैभव को प्राप्‍त को प्राप्‍त करेगा या फिर अपनों के द्वारा ही छला जाता रहेगा। शायद अब तो यहां पर ऐसा होता ही दिखाई देता है। भारत के विशिष्‍टतम तीर्थों के साथ ही पर्यटन स्‍थलों पर अपनी जगह बना चुका चित्रकूट आज भी भौतिक सुखसुविधाओं के लिहाज से काफी पीछे है। शासन प्रशासन के द्वारा यहां के विकास के लिये बनाई गई करोडों की योजनायें या तो कागजों पर हैं या फिर अधिकारियों और नेताओं के द्वारा बंदरबांट कर डाली गई। ताजा प्रमाण उत्‍तर प्रदेश के क्षेत्र में पर्यटन विभाग द्वारा करचाया जा रहा त्र

वाल्मीकि आश्रम के विकास का संतों ने लिया संकल्प

चित्रकूट। रामायणम् के रचयिता आदि कवि वाल्मीकि ने ही विश्व को श्री राम से परिचित कराने का काम किया था। इसके बाद ही संत तुलसीदास ने श्री राम को पूर्ण पुरुषोत्तम के रूप में श्री राम चरित मानस में प्रस्तुत कर उन्हें जन-जन का राम बना दिया।
यह बात महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विद्यालय में रविवार को वाल्मीकि जयंती पर आयोजित संत सम्मेलन में महंत दिव्य जीवनदास ने कही। उन्होंने कहा कि आदिकवि वाल्मीकि महान युगदृष्टा थे। महंत रामदुलारे दास ने कहा कि पदुम पुराण और अश्वमेघ यज्ञ पुराण में उल्लेख है कि वाल्मीकि आश्रम में श्रीराम के पुत्र लव ने अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को बांध लिया था। इसके पूर्व संत सम्मेलन में जुटे संत-महंतों ने लालापुर के वाल्मीकि आश्रम की उपेक्षा पर नाराजगी जतायी। निर्णय लिया गया कि चित्रकूट के सभी साधु संत वाल्मीकि आश्रम के विकास का प्रयास करेगे।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे आचार्य चंद्रदत्त पांडेय ने बताया कि सन् 1700 में औरंगजेब के कहर का शिकार लालापुर का मां आशांबरा देवी मंदिर व वाल्मीकि आश्रम भी हो गया था। इस मौके पर आश्रम के महंत कुटिलानंद, मानिकपुर नगर पंचायत अध्यक्ष नत्थू कोल, रामधाम आश्रम के रामकुमार दास, अवध बिहारी दास आदि मौजूद रहे।

फुहारों के बीच शुरू हुआ शरदोत्सव

चित्रकूट। पतित पावनी मंदाकिनी का किनारा और रिमझिम बरसते बादल। ऐसे सुहाने मौसम में शुरू हुये शरदोत्सव में कई प्रांतों से आये कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का रंग बिखेरा तो गोयनका घाट एक बार फिर रोशनाई में नहा गया।
मध्य प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरूआत पद्मश्री नाना जी देशमुख का जन्म दिन पर की गई। शाम को राम नाथ गोयनका घाट के दूसरे किनारे पर बने खुले मंच पर शरदोत्सव के कार्यक्रमों की शुरूआत मप्र के संस्कृति एवं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि शरदोत्सव के माध्यम से चित्रकूट की पवित्र भूमि में संस्कृति के सृजन व संरक्षण का काम किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध संत राजगुरू प्रपन्नाचार्य महाराज ने की।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत से पहले मंदाकिनी की अर्चना के बाद नयनाभिराम गीतों व नृत्यों की श्रंखला प्रारंभ हुई। हल्की फुहारों के बीच नावों पर बैठकर लोगों नें बृज की होली और त्रिपुरारी के सुदर्शन चक्र के दृश्यों का लिया। हरियाणा का घूमर, मध्य प्रदेश का लोक नृत्य व उड़ीसा प्रांतों के डंडे में खड़े होकर नृत्य करने वाले कलाकारों को भी काफी सराहना मिली। सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने देर रात तक समा बांधा। उनके गाये हुये राम पहिरे फूलन का सेहरा, मनवा राम नाम गाये जा को बेहद पसंद किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम का आनंद लेने के लिये दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, सतना सांसद गणेश सिंह, डीएम सतना सुखबीर सिंह, संस्कृति सचिव मध्य प्रदेश शासन मनोज श्रीवास्तव, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडे, विधायक ब्रजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ ही अन्य लोग मौजूद रहे।
इस मौके पर दीन दयाल शोध संस्थान की तरफ से पद्म श्री नाना जी देशमुख के जन्म दिन की खुशी में सभी का मुंह मीठा कराने का पूरा इंतजाम भी किया गया था। शरद पूर्णिमा के मौके पर आसमान से बरसने वाले अमृत के मद्देनजर यहां पर भी खीर को खिलाने का पूरा इंतजाम किया गया था।

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैजनिया

चित्रकूट। देश भर के विभिन्न प्रांतों से आये लोक कलाकारों के दलों की भावाभिराम प्रस्तुतियां शरदोत्सव की दूसरी शाम की गवाह बनीं। हजारों श्रोताओं ने मंत्रमुग्ध कर देने वाले कार्यक्रमों को खुले आसमान के नीचे बैठकर चांदनी में अपलक निहारा। वहीं मंदाकिनी की धवन जल राशि में पड़कर चांदनी के साथ ही बिजली के रिफ्लेक्टरों की रोशनी अप्रतिम आभा बिखेर रही थी।
कार्यक्रम की दूसरी शाम का प्रारंभ मप्र की उच्च शिक्षामंत्री अर्चना चिटनिस ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने शरदोत्सव के तीसरे आयोजन के अवसर को चित्रकूट में लगातार होने को प्रभु कामतानाथ की कृपा बताते हुए कहा कि यहां पर आने वाले श्रोता भी धन्य हैं। उन्होंने नाना जी देशमुख को ऋषि की उपमा देते हुए कहा कि 'स्नेह दान देकर सभी को अपनाया, अपने घर का धन जितना बने लुटाया।' उन्होंने कहा कि नाना जी जैसे लोग विरले ही होते हैं जो केंद्रीय मंत्री रहते हुए समाज सेवा के लिये अपने पद का त्याग कर दें। सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत गायक पवन तिवारी के भजन सुनो रे राम कहानी से हुई। मिनी अनूप जलोटा के नाम से जाने जाने वाले इस गायक ने ठुमक चलत राम चंद्र बाजत पैजनिया पर लोगों की वाहवाही बटोरी। हरियाणा से आये लोक कलाकारों ने घूमर नृत्य , उड़ीसा के कलाकारों ने चढै़या, मध्य प्रदेश के कलाकारों ने नैनागढ़ की लड़ाई की प्रस्तुतियों से शमा बांध दिया। रामायणी कुटी के महंत राम हृदय दास, दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, विधायक सुरेन्द्र गहरवार, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक प्रो. अवधेश पांडेय सहित हजारो लोग मौजूद रहे।

रिमझिम बारिश में भी झूमते रहे लोग

चित्रकूट। शरदोत्सव की अंतिम शाम में पा‌र्श्व गायक सुरेश वाडकर की आवाज का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। रिमझिम बारिश के बावजूद उनको सुनने के लिए ढाई घंटे तक हजारों लोग डटे रहे।
तीन दिवसीय शरदोत्सव के अंतिम दिन जब मशहूर पा‌र्श्व गायक सुरेश वाडकर स्टेज पर आये तो लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। उन्होंने 'मैं हूं प्रेम रोगी' 'और इस दिल में क्या रखा है' 'लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है' 'राम तेरी गंगा मैली हो गयी' सुनाये तो लोग झूम उठे। इसके बाद इंडियन आइडल द्वितीय के सातवें फाइनलिस्ट रवि त्रिपाठी ने 'नैन लड़जइहैं तौ मनवा मां कसक होइबै करी' 'यम्मा यम्मा ये खूबसूरत शमा' व 'मुम्बई से आया मेरा दोस्त' गीत गाकर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। युवाओं के उत्साह को देखकर सुरेश वाडकर ने कहा उन्हें पता नही था कि गांवों में भी इतनी अच्छी प्रतिभाएं हैं। इनको डांस इंडिया डांस या बूगी-बूगी जैसे कार्यक्रमों में जाना चाहिए। उन्होंने स्टेज पर ही ग्रामोदय विवि के छात्र बिजेन्द्र को बुलाकर इनाम भी दिया। उन्होंने अपने दूसरे दौर की प्रस्तुतियों में पिछली बार के अपेक्षाकृत तेज बीट वाले नगमे सुनाये। 'भंवरे ने खिलाया फूल -फूल' 'सपने में मिलती है कुड़ी मेरी सपने में मिलती है' 'चप्पा-चप्पा चरखा चले' गीतों पर तो शाम अपने पूरे शबाब पर पहुंच गयी।
सुनने और सुनाने वाले दोनो भीगे
कार्यक्रम की प्रस्तुति की सबसे बड़ी बात तो यह रही कि शुरुआत में ही इंद्र देव ने अपना हल्का रूप दिखाया और स्टेज के बाहर का वातावरण हल्का गीला हो गया पर लोग सुरेश वाडेकर को सुनने के लिये डटे रहे। इस दौरान गायक ने बरसात से संबंधित गाने भी खूब गाये। लेकिन बरसात से संबंधित गाने बंद होने के बाद पानी तो बिलकुल बंद हो गया पर स्टेज के ऊपरी भाग में बरसात के पानी ने अपना रंग दिखाया। संगत कर रहे भोपाल से आये वादकों के साथ ही पा‌र्श्व गायकों पर भी पानी के छींटे पड़े।

यहां राम की भक्ति में डूब जाते सभी : सुरेश वाडेकर

चित्रकूट। इस अनुपम तीर्थ स्थल की महिमा ही निराली है, यहां जो भी यहां आता है वह राम की भक्ति में डूब जाता है। यह विचार हैं जानेमाने पा‌र्श्व गायक सुरेश वाडेकर के। वह धर्मनगरी में चल रहे शरदोत्सव कार्यक्रम में आये थे।

उन्होंने कहा यह उनका दुर्भाग्य है कि वे अब तक चित्रकूट नही आये थे। कहा कि जल्द ही वे अपने पूरे परिवार के साथ यहां पर हफ्ते भर के लिए आयेंगे। उन्होंने इस पावन भूमि को विशिष्टता की श्रेणी में रखते हुए कहा कि जहां प्रभु राम के चरण पड़ें हो वह जगह तो अपने आप में ही विशेष हो जाती है। यहां पर प्रकृति ने अपना अनुपम सौंदर्य भी उड़ेल दिया है। उन्होंने अपने पहले गाये हुये गीत 'सोना करे झिलमिल' को दिल के करीब बताते हुए कहा कि वैसे तो उन्हें उनके गाये सभी गीत पसंद हैं। अपना सर्वाधिक पसंदीदा गीत 'सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है' को बताते हुए कहा कि भले ही इसमें शायरी दिखती है पर वास्तव में यह गीत जीवन की सच्चाई को बयान करता है। उन्होंने संगीत को आध्यात्म से जोड़ नये गायकों को संदेश देते हुए कहा कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं है। गुरु के चरणों पर बैठकर जो संगीत मिलता है वह आध्यात्मिक के साथ ही धार्मिक भी हो जाता है और गुरु के आर्शीवाद से ही सफलता की राह काफी आसान हो जाती है।