अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

शनिवार, 11 सितंबर 2010

हां. हमें मालूम है आजादी का सही मतलब

चित्रकूट। भले ही आजादी के पहले का दौर इन्होंने देखा हो पर वे आज के बदलते हिंदुस्तान के हिमायती है। कभी हिंदुस्तानियों को अंग्रेजों के बूटों के तले रौंदने का मंजर इनके सामने से होकर गुजरा था पर बेबसी और डर के कारण हिम्मत नही जुटा पाये पर मुखर होकर पुरानी पीढ़ी के ये नौजवान कहते हैं वह सचमुच चौंकाने वाला है।
बुजुर्ग शरद चंद्र चतुर्वेदी कहते हैं कि हम होंगे कामयाब नही बल्कि अब हम हो चुके कामयाब नारा होना चाहिये। आज भारत विश्व गुरु बन चुका है। बाबा रामदेव को बिट्रेन हो या अमेरिका सभी जगह पर आदर के साथ बुलाया जाता है। अमेरिका ने तो अपनी कीमती जमीन भी योग और आध्यात्म के प्रचार के लिये दी है। अंग्रेजों के जमाने की बातें गुजरा हुआ कल था, आज हमारे पक्ष में पूरे विश्व में बयार बह रही है। भारतीयों की तूती पूरे विश्व में गूंज रही है। अमेरिका का राष्ट्रपति अपने बैग में हनुमान जी की मूर्ति रखता और दीपावली पर दिये जलाता है। यह भारत और भारतीयता की जीत है।
बुजुर्ग रामकृष्ण यादव कहते हैं कि आज हम विश्व शक्ति बनने के करीब हैं। फिर तमाम बातें अनर्गल क्यों की जा रही हैं। विश्व के लगभग सभी देशों में भारतीय मेघा अपना कब्जा कर रखा है। अमेरिका का व्हाइट हाउस तो भारतीय अधिकारियों से भरा पड़ा है। इस तरह में अपने आपकी बुराई कर खुद को हतोत्साहित करने का काम कोई गंदी मानसिकता का भारतीय ही कर सकता है।
पेशे से शिक्षक अवधेश कुमार शुक्ला कहते हैं कि क्या अंग्रेजों के जमाने में भ्रष्टाचार नही था। वे भी खूब भ्रष्टाचार करते थे पर उनकी दहशत के कारण कोई उनका विरोध नही करता था उस जमाने
के जागीरदार और लम्बरदार भी बड़े भ्रष्टाचारी हुआ करते थे।
एसएन पांडेय कहते हैं कि हिंदुस्तान की बुराई करने वालों को वे हिंदुस्तानी नही मानते। जिस देश की संस्कृति और सभ्यता का लोहा पूरा विश्व मानता हो उसे अपने ही गाली दें यह अच्छा नही है। आज भारतीय सिरमौर हैं और रहेंगे।

नाग पंचमी पर घर-घर पूजे गये नाग देव

चित्रकूट। बुंदेलखंड का प्रमुख माने जाने वाला नागपंचमी का त्योहार लोगों ने जोरदार तरीके से मनाया। जहां घर-घर में दरवाजों पर नाग देवता की आकृति बनाकर उनकी पूजा अर्चना की गई। इस दौरान काफी जगहों पर गुडि़या पीटी गई तो कई क्षेत्रों में दंगल होने की भी सूचनायें आ रही हैं।
जानकारी के मुताबिक लोगों का हुजूम सुबह से ही पवित्र नदियों और सरोवरों की तरफ जाता दिखाई दे रहा था। वहां पर लोगों ने डुबकियां मारकर शिवालयों पर रुद्राभिषेक करने के साथ नाग देवताओं का विशेष पूजन किया। इस दौरान महिलाओं की संख्या भारी मात्रा में रही।
घरों में महिलाओं ने गोबर के आस्तिक बना कर दूबा और घी, गुड और अक्षतों से उनकी पूजा की। इस दौरान राजा परीक्षित को तक्षक नाग द्वारा डसने के बाद उनकी पीढ़ी की नागों से सुरक्षित रखने की कथा भी सुनी सुनाई गई।
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में इस मौके पर विशाल दंगल का आयोजन हुआ। यहां पर विवि के अलावा बाहर के भी पहलवानों ने भाग लिया। इस दौरान कुलपति प्रो. के बी पांडेय के अलावा समस्त स्टाफ मौजूद रहा। शाम के समय कुछ जगहों कपड़े की बनी गुडि़या भी कूटी गई।

भारत माता की जय व पर्यावर ण के नारों से गूंजा नगर

चित्रकूट। सूर्यदेव की रंग बदलती काया और हल्की फुहारों के बीच जब जागरण परिवार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रभात फेरी आयोजित करने के लिये देशभक्ति से ओतप्रोत नारे लगाते बच्चों के बीच पहुंचा तो सभी प्रसन्न हो उठे। ज्यों ही उन्हें पर्यावरण संबंधी नारे लिखी तख्तियां दी गईं तो वे भारत माता की जय के साथ ही पर्यावरण बचाओ के नारे भी लगाने लगे।
स्वतंत्रता दिवस की सुबह सात बजे से ही ट्रैफिक चौराहा, पटेल तिराहा, पुराना अस्पताल चौराहा, चकरेही चौराहा, भगवानदीन चौराहा, काली देवी चौराहा आदि जगहों पर स्कूली बच्चे रंग बिरंगे परिधानों से सजे दिखाई दे रहे थे। स्कूलों की प्रभातफेरियां भी आकर्षक स्वरूपों के साथ थीं। कहीं महात्मा गांधी रघुपति राघव राजा राम कहते चल रहे थे तो कहीं सुभाषचंद्र बोस तुम मुझे खून दो में तुम्हें आजादी दूंगा का नारा बुलंद कर रहे थे। सहज पब्लिक स्कूल, पूर्व माध्यमिक विद्यालय नया बाजार कर्वी, प्राथमिक विद्यालय नया बाजार कर्वी, भाभा कान्वेंट स्कूल, प्राथमिक विद्यालय कर्वी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय कर्वी, सहज ग‌र्ल्स इंटर कालेज, डा. अंबेडकर पब्लिक स्कूल, ज्ञान भारती इंटर कालेज, किंग्सन इंग्लिश स्कूल, शांती पब्लिक स्कूल, रामदयाल विद्या मंदिर, सरस्वती शिशु मंदिर, मार्डन पब्लिक स्कूल आदि के बच्चों ने जागरण परिवार के नारे शुद्ध वातावरण के समर्थन में हामी भरी।

..नहीं चल सकीं ट्रेनें

चित्रकूट। एक घोषणा नेता की तो दूसरी घोषणा अधिकारी की, पर मजे की बात तो यह कि दोनों की घोषणा अभी तक महज लफ्फाजी साबित हो रही है। मामला रेलवे से संबंधित है। रेल मंत्रालय की मुखिया ममता बनर्जी ने बुंदेलखंड के इस भूभाग के लिये एक ट्रेन कानपुर से चित्रकूटधाम कर्वी के लिये नयी चलाने के साथ निजामुद्दीन से मानिकपुर तक चलने वाली उप्र संपर्क क्रांति एक्सप्रेस को रोजाना चलाये जाने की घोषणा की थी, पर अभी तक केवल संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के आने के समय के बदलाव के अलावा कुछ परिवर्तन होता दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय रेलवे के अधिकारी कहते हैं कि कानपुर-चित्रकूटएक्सप्रेस के आने व जाने का समय तो आ चुका है। संपर्क क्रांति के आने के समय में परिवर्तन भी हो चुका है। अभी रेलवे के पास नये रैक न होने के कारण नयी ट्रेन प्रारंभ नहीं हो पा रही है।
गौरतलब है कि बुंदेलखंड़वासियों की विशेष मांग के साथ ही जब दो केंद्रीय मंत्रियों की संस्तुति जुड़ी तो रेल मंत्रालय ने बुंदेलखंड के इस भूभाग के लिये एक नयी ट्रेन चलाने के साथ ही संपर्क क्रांति को रोजाना करने की घोषणा की। कानपुर से चित्रकूटधाम कर्वी एक्सप्रेस ट्रेन की घोषणा कराने में जहां केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल का विशेष योगदान रहा वहीं उप्र संपर्क क्रांति को रोजाना करवाये जाने के पीछे ग्राम्य विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने प्रयास किये। इनके प्रयास तो रंग ले आये और रेल मंत्री ममता बनर्जी ने इन दोनों ट्रेनों की घोषणा भी कर दी। लेकिन जब इनके संचालन की बात आई तो यह कहा गया कि रेलवे की नयी समय सारणी जुलाई से प्रारंभ होती है और जुलाई से ही ये चलेंगी। जुलाई के महीने में सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस के निजामुद्दीन से आने का समय जरुर साढ़े आठ बजे से साढ़े सात बजे हो गया लेकिन ट्रेनों का संचालन नहीं शुरू हो सका। वैसे बीच में यहां पर आये डीआरएम ने भी पत्रकारों से बात करते हुये कहा था कि जल्द ही रैक की व्यवस्था होने पर ट्रेनों का संचालन कर दिया जायेगा।
उपस्टेशन अधीक्षक एसके सिंह ने बताया कि कानपुर-चित्रकूट एक्सप्रेस ट्रेन के आने का समय 17:53 बजे व 17:56 पर जाने का समय आ चुका है। संपर्क क्रांति को पूरे हफ्ते चलाये जाने के लिये अभी तो व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि ट्रेनों का संचालन तो ऊपर से ही होगा। अप्रैल में हुई इस घोषणा के बाद रेलवे की नयी समय सारणी में कई स्टेशनों पर आगमन और प्रस्थान का समय के साथ ट्रेन नंबर भी आ गया है पर ट्रेनों के संचालन में रेलवे विभाग पीछे हटता नजर आ रहा है।

कहीं सूखा न पड़ जाय!

चित्रकूट। मां मंदाकिनी के किनारे रहने वाले जहां पानी की कमी के कारण कराह रहे हैं वहीं पाठा पर इंद्रदेव की मेहरबानी कुछ इस तरह की हुई कि आशा बंधाकर किसानों को निराश कर दिया। कुछ इसी तरह के हाल भरतकूप और बरगढ़ और मऊ के इलाकों के हैं। कृषि विभाग के अधिकारी भी इस बात की आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि कहीं अवर्षण की स्थिति में सूखा न पड़ जाय।
पिछले एक दशक से सूखे के कारण कराहते बुंदेलखंड के इस भूभाग पर मौसम की मेहरबानी उस अंदाज में नहीं हुई जिसकी आशा इस साल भी की गई। पहले तो पन्द्रह जून को धता बताकर मानसून की पहली फुहार एक जुलाई को गिरी और फिट एक महीने में छिटपुट बारिश होती रही। पिछले एक हफ्ते से तो इंद्रदेव ने जहां अपना काम हल्के फुलके अंदाज में किया वहीं गर्मी और उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया। जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराये जाने को लेकर भाजपा, कांग्रेस और सपा के नेता आंदोलन छेड़ने की बात तो करते हैं पर पंचायत चुनावों के चक्कर में वे अभी सीधे तौर पर सड़क पर उतरने से कतरा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी व रवि त्रिपाठी कहते हैं कि इस समय किसान की हालत काफी दयनीय है। पहले तो हलकी बारिश कर ऊपर वाले ने आशा बंधाई कि फसल जोरदार होगी, लेकिन अब पानी न बरसा कर उनकी भावनाओं पर तुषारापात कर रहा है।
कांग्रेस के रघुनाथ द्विवेदी मुखर होकर कहते हैं कि वास्तव में इस समय अन्नदाता की स्थिति काफी खराब है। खेतों पर पड़ा दाना भी वापस होता दिखाई नहीं देता। ऐसे में कर्ज लेकर खेती करने वाला किसान क्या करेगा? जल्द ही किसानों को सरकार की तरफ से राहत दी जानी चाहिये।
सपा के ब्लाक प्रमुख पहाड़ी मनोज सिंह कहते हैं कि पहाड़ी ब्लाक के गांवों में तो हालत दूसरे क्षेत्रों से ज्यादा खराब है। यहां पर नदी के तटवर्ती इलाकों के हालात और भी ज्यादा खराब हैं। यहां पर तो जमीन पर हल ही नहीं चल पा रहा है। जब किसान का हल ही नहीं चलेगा तो क्या खाक खेती होगी।
जिला कृषि अधिकारी हर नाथ सिंह कहते हैं कि लगता है कि एक बार फिर सूखे के हालातों का सामना चित्रकूट जिले को करना पड़ सकता है। अभी तो कुल 186 मिमी पानी की जिले में बरसा है। यह भी क्षेत्रवार ही बरसा है। कहीं पर तो तीन सौ मिमी के आसपास पानी बरस चुका है तो कहीं पर पचास मिमी पानी नहीं बरसा। उन्होंने कहा कि खेती के लिये तो हर माह पानी की जरूरत रहती है।

खौफ से ठिठके कदम बढ़े शिक्षा की ओर

चित्रकूट। केवल एक कारण कैसे पूरे एक इलाके की दशा और दिशा को बदल देता है। पहले के एक कारण ने लगभग आठ सालों तक क्षेत्र में पुलिस और डाकुओं के कारण दहशत का माहौल कायम रखा तो अब केवल एक व्यक्ति ने यहां की आब-ओ-हवा को बिलकुल बदल दिया।
जी हां, यह इलाका है पवित्र धाम चित्रकूट का पश्चिम की तरफ का प्रवेश द्वार भरतकूप। सन् 2001 में डाकू अम्बिका पटेल उर्फ ठोकिया के डकैत बनने के बाद बगहिया से लेकर मडफा पहाड़ का पूरा इलाका उसके खौफ के कारण दहशत में रहा करता था। ठोकिया के मददगारों की लिस्ट में इस इलाके के लोगों के ज्यादा नाम होने के कारण उनके परिवार के लोगों को ज्यादा कष्ट भोगना पड़ा। इस तरह से बच्चों की पढ़ाई भी काफी बाधित होती थी।
जहां कभी शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करना बेमानी प्रतीत होता था। वहीं पर अब वातावरण पूरी तरह से बदल चुका है। राजकीय इंटर कालेज घुरेटनपुर के छात्रों को देखकर लगता नही कि अब यहां पर पुलिस या डाकुओं के खौफ का कोई साया भी है। पूरी तरह से तैयार ड्रेस में जब यहां के छात्र और छात्रायें पीटी, ड्रिल और कदमताल करते हैं तो यह समझ नही पड़ता कि ये छात्र-छात्रायें इतनी यांत्रणा भोग चुके हैं। साढ़े तीन सौ छात्र-छात्राओं को नये तरह के हिंदुस्तान से परिचित कराने का काम पिछले ही सत्र में यहां पर आये प्रधानाचार्य एमपी सिंह ने किया। प्रधानाचार्य जहां बच्चों के अंदर से डाकुओं और पुलिस का डर निकालकर उन्हें मानव बनाने के साथ ही सच्चा देशभक्त इंसान बनाने की बात करते हैं। वहीं उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ भी मुहिम छेड़ रखी है। वे बताते हैं कि उनके विद्यालय में लगभग चालीस प्रतिशत छात्र व छात्रायें शादीशुदा हैं। काफी का गौना अभी नही हुआ है। कहते हैं कि नया एडमीशन और गौना बालिग हो जाने पर ही अभिभावक लें इसके लिये वे पहले से अभिभावकों से लिखित वायदा करवा रहे हैं। इस साल हाई स्कूल बोर्ड की परीक्षा आठ बच्चों ने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। एक बालिका ने तो सत्तर प्रतिशत से ज्यादा अंक लाये।
पर्यावरण का रक्षक बने छात्र
इस विद्यालय की सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर पौधों का रोपण बच्चों द्वारा करवाया गया है। बच्चों ने न केवल पौधों का रोपण किया बल्कि उनकी सुरक्षा और पोषण की पूरी जिम्मेदारी भी उठाई हुई है। फलदार पौधों में नींबू, आंवला, आम, अमरुद, केला, संतरा, महुवा व फूल वाले पौधों में गंदा, चांदनी, बेला, कनेर, बोगेनबेलिया के साथ ही शीशम और सागौन गुलमोहर आदि के पौधे हैं। प्रधानाचार्य बताते हैं कि आसपास के रहने वाले छात्र सुबह से आते हैं और वे पौधों में पानी डालते हैं।
कहते हैं अधिकारी
जिला विद्यालय निरीक्षक मंशा राम कहते हैं कि घुरेटनपुर का राजकीय इंटर कालेज वास्तव में इस समय न केवल शिक्षा बल्कि संस्कारों और खेलकूद के लिये जिले का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बना हुआ है। इसका पूरा श्रेय वहां के प्रधानाचार्य को जाता है। देहात में रहने वाले बच्चों के अंदर जो संस्कार डालने का काम उन्होंने किया है वह वास्तव में काबिल-ए-तारीफ है।

ज्यादा फल देने वाले पौधे लगायें - डा. गौतम

चित्रकूट। खाद्य एवं प्रसंस्करण के अन्तर्राष्ट्रीय सलाहकार डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी विश्वविद्यालय हिमांचल विश्वविद्यालय के शिक्षा विस्तार शिक्षा निदेशक डा. डीआर गौतम ने कहा कि श्रेष्ठ गुणवत्ता वाले पौध उत्पादन पर विशेष ध्यान देना चाहिये। ताकि बाग भविष्य में अधिक उत्पादन और उच्च गुणवत्ता वाला फल दे सके। हमारे संसाधन अवश्य सीमित हैं। किंतु हमारा प्रयास इस तरह रहे कि कम भूमि में अधिक आय प्राप्त कर सकें।
डा. गौतम मंगलवार को महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्व विद्यालय में आयोजित उच्च गुणवत्ता युक्त पौधशाला और भविष्य की सफल बागवानी विषयक विशिष्ट व्याख्यान में विचार व्यक्त कर रहे थे। इस क्षेत्र में बारिश कम होने तथा सिंचाई के अभाव में किसानों की आर्थिक स्थिति अच्छी नही है। प्रकृति प्रदत्त नदी, नालों में वारिस का पानी तो रहता है। किन्तु उसका व्यवस्थित संचय न होने के कारण किसानों को पूरा लाभ नही मिल पाता है। नदी नालों में चेक डैम का निर्माण करके धरातलीय पानी के स्तर और मात्रा को और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जलाभाव वाले क्षेत्रों में बेल, अमरूद,जामुन,करौदा,इमली,हरड,बहेड़ा,आंवला, अनार इत्यादि प्रजाति वाले फलो का उत्पादन किया जाना लाभकारी होता है। सघन बागवानी इस दिशा में अच्छा कदम होगा। बदलते पर्यावरण और ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार को भी हम इन प्रयासों से कम कर सकते है।
व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये कुलपति प्रो. केबी पाण्डेय ने कहा कि देश की लगभग प्रत्येक समस्या के समाधान और विकास के लिये वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ अनुसंधान का लाभ जन सामान्य को भी मिले इसका प्रयास होना चाहिये। उन्होंने कहा कि शोधों का निष्कर्ष लोक भाषा में भी प्रसारित कराया जाना चाहिये। इस दौरान विवि परिवार के काफी सदस्य मौजूद रहे।