चित्रकूट, संवाददाता: मंशा तो थी कि यहां पर लोग सुबह और शाम की ताजी हवा खाकर अपने आपको स्वस्थ रखे। कार्य योजना भी बनी। बड़ी-बड़ी बातें हुई और पत्थर लगाकर काम को शुरू करने का दावा भी किया गया पर शहर के बच्चे, बूढे और जवान इसका इंतजार ही करते रह गये कि कब यह योजना पूरी होगी और औषधियों से युक्त ताजी हवा में उन्हें टहलने का मौका मिलेगा। पिछले आठ सालों से जिलाधिकारी आवास के पीछे की जमीन पर अलंकृत उद्यान की योजना को पूरा किया जाने से ज्यादा टरकाने का काम ज्यादा दिखाई देता है। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि यह एक ऐसा स्थान है जिसमें एक बार नही दो बार एक ही काम के लिये शुभारंभ जिलाधिकारियों ने किया पर उनके द्वारा तैयार करवाई गई कार्ययोजना अभी तक पूरी नही हो सकी।
पिछले आठ सालों में अलंकृत उद्यान को अलग-अलग तरह से दो बार उद्घाटन होने के बाद भी अभी यह पार्क डरावनी जगह के तौर पर ही जाना जाता है। गौरतलब है कि जिला बनने के बाद जिलाधिकारी जगन्नाथ सिंह ने सबसे पहले इस खाली पड़ी जमीन की चिंता व्यक्त की थी। उन्होने पहली बार उद्यान विभाग को लगभग एक हेक्टेयर का पूरा रकबा राजकीय उद्यान बनाने के लिये दिलवाया था। उनकी मंशा थी कि यहां पर न केवल अच्छे फल और फूलों वाले पौधों का उत्पादन किया जाये और इसे घूमने के पार्क के रूप में विकसित किया जाये।
वर्ष 2003 में तत्कालीन जिलाधिकारी राम सूरत दुबे ने यहां पर अलंकृत उद्यान की परिकल्पना कर 13 मई को इसका विधिवत शुभारंभ किया। उनकी कार्ययोजना में बच्चों के लिये पार्क जिसमें झूले लगे हों और बड़ों के टहलने के लिये पाथ वे तथा औषधीय पौधों की प्रचुरता वाले पार्क का निर्माण हो। बच्चों के मनोरंजन के लिये झूले और अन्य समान तो लगाये गये पर औषधियों से भरा बगीचा अलंकृत उद्यान नही बन सका। इसके बाद आये जिलाधिकारियों ने इसकी सुधि नही ली। इसके बाद वर्ष 2009 में पूर्व जिलाधिकारी हृदेश कुमार ने फिर से एक बार रूचि लेकर एक जुलाई को राजकीय अलंकृत उद्यान में बागवानी के शुभारंभ का काम कर दिया। जिला उद्यान अधिकारी धीरेन्द्र मिश्र ने बताया अलंकृत उद्यान में पिछले साल काफी पौधे लगवाये गये थे। अभी पौधों के बढ़ने में समय है। फिर भी उनकी देखरेख के लिये लोग लगे हैं जल्द ही पार्क का स्वरूप दिखाई देगा।
पिछले आठ सालों में अलंकृत उद्यान को अलग-अलग तरह से दो बार उद्घाटन होने के बाद भी अभी यह पार्क डरावनी जगह के तौर पर ही जाना जाता है। गौरतलब है कि जिला बनने के बाद जिलाधिकारी जगन्नाथ सिंह ने सबसे पहले इस खाली पड़ी जमीन की चिंता व्यक्त की थी। उन्होने पहली बार उद्यान विभाग को लगभग एक हेक्टेयर का पूरा रकबा राजकीय उद्यान बनाने के लिये दिलवाया था। उनकी मंशा थी कि यहां पर न केवल अच्छे फल और फूलों वाले पौधों का उत्पादन किया जाये और इसे घूमने के पार्क के रूप में विकसित किया जाये।
वर्ष 2003 में तत्कालीन जिलाधिकारी राम सूरत दुबे ने यहां पर अलंकृत उद्यान की परिकल्पना कर 13 मई को इसका विधिवत शुभारंभ किया। उनकी कार्ययोजना में बच्चों के लिये पार्क जिसमें झूले लगे हों और बड़ों के टहलने के लिये पाथ वे तथा औषधीय पौधों की प्रचुरता वाले पार्क का निर्माण हो। बच्चों के मनोरंजन के लिये झूले और अन्य समान तो लगाये गये पर औषधियों से भरा बगीचा अलंकृत उद्यान नही बन सका। इसके बाद आये जिलाधिकारियों ने इसकी सुधि नही ली। इसके बाद वर्ष 2009 में पूर्व जिलाधिकारी हृदेश कुमार ने फिर से एक बार रूचि लेकर एक जुलाई को राजकीय अलंकृत उद्यान में बागवानी के शुभारंभ का काम कर दिया। जिला उद्यान अधिकारी धीरेन्द्र मिश्र ने बताया अलंकृत उद्यान में पिछले साल काफी पौधे लगवाये गये थे। अभी पौधों के बढ़ने में समय है। फिर भी उनकी देखरेख के लिये लोग लगे हैं जल्द ही पार्क का स्वरूप दिखाई देगा।

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