अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन

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बुधवार, 23 मार्च 2011

पानी की कमी से जूझ रहे पाठा के कलाकार

चित्रकूट, संवाददाता : एक नही आश्चर्य करने के कई कारण फिर भी रहा वही रोना? तीर्थनगरी के प्रवेश द्वार रानीपुर भट्ट के अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के भारत जननी परिसर में परिसर में चौथे लोकलय समारोह में आये पाठा के कलाकारों ने मंच पर गाते और थिरकते हुये भले ही उत्साह और उमंग से लबरेज रहे हों पर मंच से उतरने के बाद जब उनसे उनके इलाके में पीने के पानी की समस्या पर जागरण ने सवाल पूंछे तो उनका दर्द चेहरों पर साफ उभर आया।
मानिकपुर के पाठा क्षेत्र के गांव सरहट, गोपीपुर , करौंहा, टिकरिया, जमुनिहाई, छोटी व बड़ी पाटिन व मोटवन आदि गांवों से आये कलाकारों ने रूंधे गले से पानी की कमी की बात कही।
टिकरिया के रहने वाले राजाराम, आनंद, सुधा व संगीता ने कहा कि हैंडपम्पों ने साथ छोड़ना प्रारंभ कर दिया है। कुंये और तालाब तो पहले ही बरबाद हो चुके थे। अब तो केवल चोहड़ों का भरोसा है।
मारकुंडी की रहने वाली गीता, सुमन ने कहा कि अभी तो हैंडपम्पों में रूक-रूक कर पानी आ रहा है लेकिन जल्द ही यह जवाब दे जायेगे फिर तो तीन किलोमीटर दूर चोहडे से पानी भरना उनकी मजबूरी होगी।
उमेश, संजू, सुखराम, सुधा आदि ने तो इस बार की होली को पानी की कमी के कारण फीका बताते हुये कहा कि आने वाले दिनों में स्थिति क्या होगी क्योंकि अभी तो पूरी गर्मी ही पड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि वे देहाती कलाकार हैं अगर सरकार वास्तव में उनका भला चाहती है तो अन्य योजनाओं के पहले पानी पिलाने की योजना पर काम करे जिससे कम से कम वे जिंदा तो रह सकें।

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