चित्रकूट। राम और कृष्ण एक हैं। इस बात का अद्भुत साम्य श्री रथ यात्रा पर दिखाई देता है। यहां के चौथे दिन गुंड़ीचा धाम में जब श्री विष्णु के अवतार जगत के नाथ जगन्नाथ को रूठने के बाद मनाने के लिये मां अन्नपूर्णा जानकी को आने की बात सुन थोड़ा आश्चर्य होता है। क्योंकि जब भगवान विष्णु के अंश जगन्नाथ स्वामी को तो मनाने के लिये मां राधा को आना चाहिये पर यहां पर उद्बोधन व डोली में सजी मां जानकी दिखाई पड़ती हैं। मुख्यालय से सटे हुये सोनेपुर गांव के प्राइमरी स्कूल में लगा विशाल मेला और वहां पर लगातार भक्तों की उमड़ती भीड़ इस बात की गवाही देती है कि आधुनिकता के इस दौर में भी पुरानी धार्मिक परंपराओं से जुड़ी बातें कितनी सच हैं। चित्रकूट में आकर मां राधा जानकी जी में परिवर्तित हो जाती हैं।
इस सवाल का जवाब बाबा रमाशंकर कुछ ऐसे अंदाज में देते हैं कि भगवान राम हो या फिर भगवान कृष्ण दोनो ही श्री हरि विष्णु के अंश माने जाते हैं जबकि मां राधा और मां जानकी को भी श्री लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। अब इस राममय चित्रकूट में जब सब कुछ राम के नाम पर ही होता है तो मां राधा को जानकी के नाम से पुकारने में क्या बुराई है। वैसे नाम कोई भी लिये जायें हैं तो सब परमात्मा के ही नाम।
शुक्रवार, 16 जुलाई 2010
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