चित्रकूट। जहां एक तरफ गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने श्री राम चरित मानस लिखकर श्री राम के चरित्र को जन-जन तक पहुंचा कर अमर कर दिया और अब श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान के निदेशक डा. राम अवतार शर्मा ने उन स्थलों की खोज कर डाली जहां-जहां कभी प्रभु श्री राम ने वनवास काल में चरण रखे थे।
श्री कामदगिरि परिक्रमा पर श्री राम वन पथ गमन संग्रहालय के लोकार्पण कार्यक्रम के संयोजक डा. राम नारायण त्रिपाठी बताते हैं कि प्रभु श्री राम ने अपने जीवन काल में दो वन यात्रायें कीं। पहले वन गमन की यात्रा अयोध्या से जनकपुर तक की थी और दूसरी अयोध्या से श्री लंका की। डा. शर्मा ने भी इन दोनो वन यात्राओं को खुद किया और 299 स्थलों की खोज की। हर एक स्थान के दुर्लभ व नवीनतम चित्रों का संग्रह किया। उन्होंने अपनी अधिकतर यात्रायें साइकिल से की। बताया कि चित्रकूट में इन सब दुर्लभ चित्रों को एक साथ दिखाने के लिये संग्रहालय भरत मिलाप के महंत राम मनोहर दास द्वारा दान दी गई जमीन पर किया जा रहा है। 20 जून को भंडारे के साथ लोकार्पण काम प्रारंभ होगा। शाम के लोकार्पण सत्र की मुख्य अतिथि किष्किंधा की राजमाता चंद्रकांता देवी होंगी व अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्र संघ चालक श्री कृष्ण माहेश्वरी करेंगे।
उन्होंने बताया कि भगवान श्री राम, मां जानकी व भ्राता लक्ष्मण ने अपने वन वास काल का सर्वाधिक समय 11 वर्ष 8 माह व 25 दिन चित्रकूट में ही व्यतीत किया इसलिये डा. शर्मा ने चित्रकूट को ही संग्रहालय बनाने के लिये उपयुक्त स्थान माना।
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