चित्रकूट। संदीप रिछारिया प्राचीनकाल में गुरुकुल में ऋषि-मुनि बच्चों को आत्म निर्भरता का पाठ पढ़ाते थे। जिसमें आगे चलकर वह ऐसा काम करते थे जो बिना साहस के नही हो सकता। यह बातें सतना सांसद गणेश सिंह व्यक्तित्व विकास शिविर के समापन मौके पर कहीं।
उन्होंने कहा कि देश का हर बच्चा तभी स्वावलम्बी होगा जब उसे प्रारंभ से ही आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया जायेगा। उन्होंने कहा कि दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित आवासीय शैक्षणिक केन्द्र के रूप में गुरुकुल संकुल उसी परम्परा को आगे लेकर चल रहा है। ऐसे बहुत कम विद्यालय देखने को मिले जहां बच्चों को संस्कार दिया जाता है। प्रभु श्री राम और नानाजी देशमुख की कर्मस्थली चित्रकूट में बच्चों के निर्माण का कार्य व्यर्थ नही जायेगा। शिविर में गुरुकुल के बच्चों के साथ आसपास के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अलावा वनवासी अंचल तथा ग्रामीण केन्द्रों के छोटे-बड़े बच्चों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बच्चों को पीटी,योग, चाप, डम्बल, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, कम्प्यूटर, कराटे, लेजिम, ताइक्वाडों , गायन, वादन, संगीत , ढोलक, हारमोनियम, चित्रकला, तैराकी व निशानेबाजी जैसी चीजों के साथ बौद्घिक विकास के विषयों के सत्र भी चलाये गये। कार्यक्रम मे शिविराधिकारी आर.एन. काबरा तथा छतरपुर से अपनी टीम के साथ गायन,वादन में प्रशिक्षण दे रही विभा शुक्ला तथा अन्य सभी प्रशिक्षकों को अतिथियों द्वारा शाल व श्री फल से सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उ.प्र शासन के खाद्य आयुक्त राजीव अग्रवाल, लोक शिक्षण संचनालय म.प्र. के प्रतिनिधि, गुरुकुल संकुल प्रभारी संतोष मिश्र व सुरेन्द्र पाल ग्रामोदय विद्यालय के प्राचार्य मदन तिवारी समारोह में उपस्थित रहे।
रविवार, 27 जून 2010
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