चित्रकूट। धरती पर मां से बड़ा कोई देवता नही, अम्मी ही काबा और मदीना है तो मां ही काशी और मथुरा है। संत इम्तियाज अली 'गोविंद बाबा' ने यह बातें बच्चों में अभिभावकों के प्रति फैल रहे विद्रोह को देखकर कहीं।
उन्होंने मां के महत्व को परिभाषित करते हुये कहा कि नौ देवियों के एक भी लक्षण ऐसे नही जो अपनी मां के भीतर न हों। मां जहां बच्चे को पैदा करते समय धरती का अवतार होती है तो लालन और पालन करते समय अन्नपूर्णा का अवतार होती है। मां में दुर्गा, काली के साथ ही सभी देवों के रुप विद्यमान रहते हैं।
उन्होंने कहा कि लोग विश्व की किसी भी देव स्थल पर जाकर आराधना करें और घर की देवी को नाराज कर वे पुण्य नही प्राप्त कर सकते। घर में बैठे देवी देवता की सेवा करना हर बेटे का परम कर्तव्य है अगर घर के देवी और देवता को प्रसन्न कर लिया तो संसार भर के देवी देवताओं के आर्शीवादों का फल मिल जायेगा।
रविवार, 27 जून 2010
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