रविवार, 27 जून 2010
मां में ही काशी और काबा
चित्रकूट। धरती पर मां से बड़ा कोई देवता नही, अम्मी ही काबा और मदीना है तो मां ही काशी और मथुरा है। संत इम्तियाज अली 'गोविंद बाबा' ने यह बातें बच्चों में अभिभावकों के प्रति फैल रहे विद्रोह को देखकर कहीं।
उन्होंने मां के महत्व को परिभाषित करते हुये कहा कि नौ देवियों के एक भी लक्षण ऐसे नही जो अपनी मां के भीतर न हों। मां जहां बच्चे को पैदा करते समय धरती का अवतार होती है तो लालन और पालन करते समय अन्नपूर्णा का अवतार होती है। मां में दुर्गा, काली के साथ ही सभी देवों के रुप विद्यमान रहते हैं।
उन्होंने कहा कि लोग विश्व की किसी भी देव स्थल पर जाकर आराधना करें और घर की देवी को नाराज कर वे पुण्य नही प्राप्त कर सकते। घर में बैठे देवी देवता की सेवा करना हर बेटे का परम कर्तव्य है अगर घर के देवी और देवता को प्रसन्न कर लिया तो संसार भर के देवी देवताओं के आर्शीवादों का फल मिल जायेगा।
उन्होंने मां के महत्व को परिभाषित करते हुये कहा कि नौ देवियों के एक भी लक्षण ऐसे नही जो अपनी मां के भीतर न हों। मां जहां बच्चे को पैदा करते समय धरती का अवतार होती है तो लालन और पालन करते समय अन्नपूर्णा का अवतार होती है। मां में दुर्गा, काली के साथ ही सभी देवों के रुप विद्यमान रहते हैं।
उन्होंने कहा कि लोग विश्व की किसी भी देव स्थल पर जाकर आराधना करें और घर की देवी को नाराज कर वे पुण्य नही प्राप्त कर सकते। घर में बैठे देवी देवता की सेवा करना हर बेटे का परम कर्तव्य है अगर घर के देवी और देवता को प्रसन्न कर लिया तो संसार भर के देवी देवताओं के आर्शीवादों का फल मिल जायेगा।
सिर्फ कबाड़ बीनना ही इनकी नियति है
चित्रकूट। 'न होगा कपड़ा तो पैरों से पेट को ढक लेंगे' कवि दुष्यंत की कही गई ये पंक्तियां भले ही इन पर पूरी तरह से सही न बैठती हो पर तन ढकने के कपड़े के अलावा रहने का ठिकाना और पेट भरने को दो वक्त की रोटी के लिये गर्मी, सर्दी और बरसात के समय चल रही इनकी मशक्कत को देखकर तो यही लगता है कि जिंदगी का सबसे कड़वा सच यही है। कबाड़ बीनकर अपने पेट की आग को ठड़ा करने के काम में लगा राजू जैसे कितने ही नाम सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा मारने का काम कर रहे हैं।
सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा मारने का काम करने वाले ये असभ्य समझे जाने वाले लोग कभी किसी प्राथमिक स्कूल की दहलीज तक नही पहुंचे। जानकारी के नाम पर रुपयों की पहचान के अलावा इन्हें व्यक्ति के अच्छे और बुरे होने की पहचान है। वैसे कच्ची उम्र में ही कमाई का बोझ सिर पर आ जाने के कारण इन्हें नशे की भी लत आसानी से लग जाती है। नशे का सहारा लेने के लिये चोट के लिये उपयोग में लाई जाने वाली क्रीमों के साथ ही बोरेक्स, बूट पालिश और अन्य दवाओं को को ये ब्रेड में लगाकर खाते हैं। रोटी खाने के नाम बताते हैं कि महीनों पहले होटल पर दाल और रोटी खाई थी। अधिकतर समय ब्रेड और चाय पर ही गुजर जाता है।
समाजसेवी राजेश सोनी कहते हैं कि वास्तव में युवा पीढ़ी का यह हाल देखकर काफी दुख होता हे। स्वयं सेवी संगठन द्वारा संचालित सरकार द्वारा वित्त पोषित इन बच्चों के लिये चलने वाले स्कूल कहां पर चलते हैं यह तो किसी को भी नही मालूम। सरकार का इन बच्चों के हितों के लिये आया बजट उदरस्थ करने में समाजसेवी गौरव महसूस करते हैं।
सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा मारने का काम करने वाले ये असभ्य समझे जाने वाले लोग कभी किसी प्राथमिक स्कूल की दहलीज तक नही पहुंचे। जानकारी के नाम पर रुपयों की पहचान के अलावा इन्हें व्यक्ति के अच्छे और बुरे होने की पहचान है। वैसे कच्ची उम्र में ही कमाई का बोझ सिर पर आ जाने के कारण इन्हें नशे की भी लत आसानी से लग जाती है। नशे का सहारा लेने के लिये चोट के लिये उपयोग में लाई जाने वाली क्रीमों के साथ ही बोरेक्स, बूट पालिश और अन्य दवाओं को को ये ब्रेड में लगाकर खाते हैं। रोटी खाने के नाम बताते हैं कि महीनों पहले होटल पर दाल और रोटी खाई थी। अधिकतर समय ब्रेड और चाय पर ही गुजर जाता है।
समाजसेवी राजेश सोनी कहते हैं कि वास्तव में युवा पीढ़ी का यह हाल देखकर काफी दुख होता हे। स्वयं सेवी संगठन द्वारा संचालित सरकार द्वारा वित्त पोषित इन बच्चों के लिये चलने वाले स्कूल कहां पर चलते हैं यह तो किसी को भी नही मालूम। सरकार का इन बच्चों के हितों के लिये आया बजट उदरस्थ करने में समाजसेवी गौरव महसूस करते हैं।
जल्द ही आदर्श स्टेशन बन जायेगा कर्वी
चित्रकूट। धर्मनगरी के रेलवे स्टेशन को अब आदर्श स्टेशनों की तरह विकसित करने की जद्दोजहद करने में अधिकारी लगे हुये हैं। जहां एक तरफ प्लेटफार्म एक को ऊंचा बनाने के साथ ही पुराने पत्थर निकालकर कोटा स्टोन लगाये जाने का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है वहीं प्लेटफार्म नम्बर दो को भी पूरा पक्का कराने का काम किया जा रहा है।
सहायक अभियंता निर्माण पी के श्रीवास्तव कहते हैं कि आदर्श स्टेशन बनाने के जितने मानक हैं उन सभी बिंदुओं पर यहां पर काम किया जा रहा है। जल्द ही प्लेटफार्म का नया स्वरुप सभी के सामने होगा।
उन्होंने बताया कि प्लेटफार्मो को और चौड़ा व बड़ा बनाया जा रहा है। प्लेटफार्म नम्बर एक को ऊंचा किया जा रहा है साथ ही पूरे में कोटा स्टोन लगाने का काम किया जा रहा है। एरिया का विस्तार किया जा रहा है और नये शेड़ के नीचे पूरे में कोटा स्टोन लगाया जायेगा। दो नम्बर प्लेटफार्म में भी कोटा स्टोन लगाने के साथ ही छोटे-छोटे और काम करवाये जायेंगे।
सहायक अभियंता निर्माण पी के श्रीवास्तव कहते हैं कि आदर्श स्टेशन बनाने के जितने मानक हैं उन सभी बिंदुओं पर यहां पर काम किया जा रहा है। जल्द ही प्लेटफार्म का नया स्वरुप सभी के सामने होगा।
उन्होंने बताया कि प्लेटफार्मो को और चौड़ा व बड़ा बनाया जा रहा है। प्लेटफार्म नम्बर एक को ऊंचा किया जा रहा है साथ ही पूरे में कोटा स्टोन लगाने का काम किया जा रहा है। एरिया का विस्तार किया जा रहा है और नये शेड़ के नीचे पूरे में कोटा स्टोन लगाया जायेगा। दो नम्बर प्लेटफार्म में भी कोटा स्टोन लगाने के साथ ही छोटे-छोटे और काम करवाये जायेंगे।
गुरुकुल संकुल : जहां होता शिक्षा और संस्कार का मिलन
चित्रकूट। संदीप रिछारिया प्राचीनकाल में गुरुकुल में ऋषि-मुनि बच्चों को आत्म निर्भरता का पाठ पढ़ाते थे। जिसमें आगे चलकर वह ऐसा काम करते थे जो बिना साहस के नही हो सकता। यह बातें सतना सांसद गणेश सिंह व्यक्तित्व विकास शिविर के समापन मौके पर कहीं।
उन्होंने कहा कि देश का हर बच्चा तभी स्वावलम्बी होगा जब उसे प्रारंभ से ही आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया जायेगा। उन्होंने कहा कि दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित आवासीय शैक्षणिक केन्द्र के रूप में गुरुकुल संकुल उसी परम्परा को आगे लेकर चल रहा है। ऐसे बहुत कम विद्यालय देखने को मिले जहां बच्चों को संस्कार दिया जाता है। प्रभु श्री राम और नानाजी देशमुख की कर्मस्थली चित्रकूट में बच्चों के निर्माण का कार्य व्यर्थ नही जायेगा। शिविर में गुरुकुल के बच्चों के साथ आसपास के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अलावा वनवासी अंचल तथा ग्रामीण केन्द्रों के छोटे-बड़े बच्चों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बच्चों को पीटी,योग, चाप, डम्बल, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, कम्प्यूटर, कराटे, लेजिम, ताइक्वाडों , गायन, वादन, संगीत , ढोलक, हारमोनियम, चित्रकला, तैराकी व निशानेबाजी जैसी चीजों के साथ बौद्घिक विकास के विषयों के सत्र भी चलाये गये। कार्यक्रम मे शिविराधिकारी आर.एन. काबरा तथा छतरपुर से अपनी टीम के साथ गायन,वादन में प्रशिक्षण दे रही विभा शुक्ला तथा अन्य सभी प्रशिक्षकों को अतिथियों द्वारा शाल व श्री फल से सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उ.प्र शासन के खाद्य आयुक्त राजीव अग्रवाल, लोक शिक्षण संचनालय म.प्र. के प्रतिनिधि, गुरुकुल संकुल प्रभारी संतोष मिश्र व सुरेन्द्र पाल ग्रामोदय विद्यालय के प्राचार्य मदन तिवारी समारोह में उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि देश का हर बच्चा तभी स्वावलम्बी होगा जब उसे प्रारंभ से ही आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया जायेगा। उन्होंने कहा कि दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित आवासीय शैक्षणिक केन्द्र के रूप में गुरुकुल संकुल उसी परम्परा को आगे लेकर चल रहा है। ऐसे बहुत कम विद्यालय देखने को मिले जहां बच्चों को संस्कार दिया जाता है। प्रभु श्री राम और नानाजी देशमुख की कर्मस्थली चित्रकूट में बच्चों के निर्माण का कार्य व्यर्थ नही जायेगा। शिविर में गुरुकुल के बच्चों के साथ आसपास के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अलावा वनवासी अंचल तथा ग्रामीण केन्द्रों के छोटे-बड़े बच्चों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बच्चों को पीटी,योग, चाप, डम्बल, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, कम्प्यूटर, कराटे, लेजिम, ताइक्वाडों , गायन, वादन, संगीत , ढोलक, हारमोनियम, चित्रकला, तैराकी व निशानेबाजी जैसी चीजों के साथ बौद्घिक विकास के विषयों के सत्र भी चलाये गये। कार्यक्रम मे शिविराधिकारी आर.एन. काबरा तथा छतरपुर से अपनी टीम के साथ गायन,वादन में प्रशिक्षण दे रही विभा शुक्ला तथा अन्य सभी प्रशिक्षकों को अतिथियों द्वारा शाल व श्री फल से सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उ.प्र शासन के खाद्य आयुक्त राजीव अग्रवाल, लोक शिक्षण संचनालय म.प्र. के प्रतिनिधि, गुरुकुल संकुल प्रभारी संतोष मिश्र व सुरेन्द्र पाल ग्रामोदय विद्यालय के प्राचार्य मदन तिवारी समारोह में उपस्थित रहे।
शुक्रवार, 25 जून 2010
बुंदेलखंड में रोजगार का जरिया बना सकता पलाश
चित्रकूट। योगेश्वर श्री कृष्ण की लीलाओं से सीधे सरोकार रखने वाले पलाश के पेड़ को लेकर अब शासन गंभीर हो चला है। अगर विकास विभाग की मंशा के अनुरुप काम हुआ तो आने वाले समय पलाश का पौधा भी पूरे बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए आय का एक अच्छा जरिया बन सकता है। प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव भी इन दिनों लैक कल्चर को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए पलाश के पौधों का संरक्षण करने को प्रयासरत हैं। मालूम रहे आयुर्वेद के जानकार भी इसके विभिन्न अवयवों से जटिल रोगों की औषधियों को बना रहे हैं। गौरतलब है कि होली की मस्ती बिना रंगों के अधूरी है और रंगों को पहले फूलों व पत्तियों से ही प्राप्त किया जाता था। इनमें सबसे ऊपर नाम पलाश का ही आता है। फागुन के महीने में पलाश के पौधे पर लगे सुर्ख लाल रंग के फूल लोगों को न केवल अपनी ओर आकर्षित करने का काम करते हैं बल्कि इनसे अच्छी क्वालिटी का रंग भी तैयार होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इसका फूल तोड़े जाने के काफी दिनों बाद भी उपयोग में लाने लायक बना रहता है।
प्रभारी सीडीओ कहते हैं कि महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में पलाश के पौधे से निकलने वाली गोंद से लाख का निर्माण होता है। जिसका प्रयोग महिलाओं के लिये चूडि़यां व कड़े बनाने में होता है। इसके साथ ही वहां पर फूलों से रंग और पत्तियों से पत्तल बनाने का काम भी होता है। यहां के साथ ही समूचे बुंदेलखंड में तो बहुतायत में पलाश का पौधा पाया जाता है। स्थानीय भाषा में इसे छिउल कहा जाता है और इसके नाम पर तो पूरा गांव छिउलहा ही बसा हुआ है।
उन्होंने कहा कि गोंदिया में तो लैक कल्चर का करोड़ों का व्यापार किया जाता है। जिससे काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है। जल्द ही यहां से किसानों व समाजसेवियों के दल को गोंदिया भेजा जायेगा। जिससे वे इसका उपयोग करना सीखें और पलाश के पौधों का उपयोग करें। उधर, आरोग्यधाम की रसशाला के प्रबंधक डा. विजय प्रताप सिंह का कहना है कि पलाश के पौधे का औषधीय प्रयोग काफी समय से हो रहा है पर यहां प्रमुख रुप से कृमि रोगों की दवा इससे बनती है। साथ ही बालों में लगाये जाने वाली डाई में भी इसे इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रभारी सीडीओ कहते हैं कि महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में पलाश के पौधे से निकलने वाली गोंद से लाख का निर्माण होता है। जिसका प्रयोग महिलाओं के लिये चूडि़यां व कड़े बनाने में होता है। इसके साथ ही वहां पर फूलों से रंग और पत्तियों से पत्तल बनाने का काम भी होता है। यहां के साथ ही समूचे बुंदेलखंड में तो बहुतायत में पलाश का पौधा पाया जाता है। स्थानीय भाषा में इसे छिउल कहा जाता है और इसके नाम पर तो पूरा गांव छिउलहा ही बसा हुआ है।
उन्होंने कहा कि गोंदिया में तो लैक कल्चर का करोड़ों का व्यापार किया जाता है। जिससे काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है। जल्द ही यहां से किसानों व समाजसेवियों के दल को गोंदिया भेजा जायेगा। जिससे वे इसका उपयोग करना सीखें और पलाश के पौधों का उपयोग करें। उधर, आरोग्यधाम की रसशाला के प्रबंधक डा. विजय प्रताप सिंह का कहना है कि पलाश के पौधे का औषधीय प्रयोग काफी समय से हो रहा है पर यहां प्रमुख रुप से कृमि रोगों की दवा इससे बनती है। साथ ही बालों में लगाये जाने वाली डाई में भी इसे इस्तेमाल किया जा रहा है।
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