अब चित चेत चित्रकूटहि चलु ! ! ! ! ! !
यह है हमारी पहचान वैदिक संस्क्रति के धवज वाह्क
अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन
गुरुवार, 19 अगस्त 2010
विकलांग विश्वविद्यालय : शिक्षण में जुड़ा एक नया आयाम
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मेरे बारे में
संदीप रिछारिया
कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना छोडो बेकार की बातों को अपने ही काम में मस्त रहना। भले ही मंजिल कितनी दूर हो पर अपना काम सदैव उसकी तरफ आगे बढते रहना।
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