अब चित चेत चित्रकूटहि चलु ! ! ! ! ! !
यह है हमारी पहचान वैदिक संस्क्रति के धवज वाह्क
अपने पिता दरबारी लाल पटेल के साथ व भाई के साथ रवि नंदन
शनिवार, 19 दिसंबर 2009
वर्षो से लटके सवाल आज भी अनुत्तरित
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मेरे बारे में
संदीप रिछारिया
कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना छोडो बेकार की बातों को अपने ही काम में मस्त रहना। भले ही मंजिल कितनी दूर हो पर अपना काम सदैव उसकी तरफ आगे बढते रहना।
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