चित्रकूट। दीपावली की अमावस्या को प्रभु श्रीराम, जानकी और भाई लक्ष्मण के साथ कामता नाथ स्वामी की परिक्रमा करते हैं, इस दिन यहां दीपदान करने वाले का जीवन धन्य हो जाता है।
यह उद्गार कथावक्ता आचार्य नवलेश दीक्षित ने मुख्यालय में बस स्टैंड के समीप जय शंकर मिश्र के आवास पर चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि वक्ता से ज्यादा बुद्धिमान श्रोता को होना चाहिये। वास्तव में जो सही श्रोता नहीं बन सकता वह वक्ता बन नहीं सकता। कहा कि किसी की रोटी छीनना महापाप है। किसी को रुलाने का प्रयास किया तो उससे दो गुना खुद ही रोना होगा। अगर हमारे हाथ से किसी का किंचित मात्र भी भला हो तो यही सबसे बड़ा भाग्य होगा।
उन्होंने कहा कि सुदामा की सबसे बड़ी विशेषता उनके संतोष रूपी धन की है। जाति की पूजा नहीं अपितु गुणों की पूजा होती है। संस्कृति के हिसाब से सुदामा ब्राह्मण होने के साथ ही गुणी भी थे। तभी तो श्री कृष्ण खुद ही सुदामा जी की दशा देखकर रोये और अपने नयनों के जल से उनके पैरों को धोया।
कथावाचक ने कहा कि दीपावली की रात तीर्थ क्षेत्र के श्री कामतानाथ मंदिर के आसपास दीपदान करने का विशेष महत्व है। यहां दीपदान करने से जीवन में प्रकाश छा जाता है व जीवन उल्लासमय हो जाता है।
कथा के अंतिम दिन कथा को सुनने के लिये सांसद आर के पटेल, ब्लाक प्रमुख मनोज सिंह, राजबहादुर यादव, गौरी शंकर मिश्र, शक्ति प्रताप सिंह, जयशंकर मिश्र व माया सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहें।
रविवार, 1 नवंबर 2009
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